आयोडाइज्‍ड नमक की जगह सेंधा नमक और सल्‍फरयुक्‍त चीनी की जगह बिना सल्‍फर की चीनी खायें

कॉस्मेटिक, कीटनाशक, नमक एवं शुगर का ज्‍यादा प्रयोग बढ़ा रहा कैंसर जैसे जटिल रोग

केजीएमयू में आधुनिक जीवन शैली के रोग-उपचार एवं बचाव पर कार्यशाला सम्‍पन्‍न

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में आरोग्य भारती, अवध प्रांत के तत्वावधान में आधुनिक जीवन शैली के रोग-उपचार एवं बचाव पर कार्यशाला सम्पन्न हुई। इस कार्यशाला में सोलन हिमाचल प्रदेश से आए मुख्य वक्ता वैद्य राजेश कपूर ने लगभग 400 पैरामेडिकल एवं नर्सिंग छात्र-छात्राओं को संबोधित किया एवं आज की जीवनशैली में बहुप्रचलित हानिकारक तत्वों के उपयोग से होने वाले रोगों एवं उनके बचाव की जानकारी दी।

 

वैद्य राजेश कपूर ने बताया कि आजकल जो आयोडाइज्‍ड नमक आ रहा है इसका सेवन न करें इसकी जगह सेंधा नमक का सेवन करें। उन्‍होंने बताया कि बाजार में आमतौर पर बिक रहे आयोडाइज्‍ड फ्री फ्लो नमक में कई तरह के केमिकल डाले जाते हैं जो कि कैंसर जैसी बीमारियों का कारण हो सकते हैं। इसी प्रकार उनका कहना था कि सल्‍फरयुक्‍त शुगर की जगह सल्‍फरलेस शुगर या गुड़ का इस्‍तेमाल किया जाना चाहिये। उन्‍होंने कहा कि किस तरह कॉस्मेटिक, कीटनाशक, नमक एवं शुगर के अत्याधिक प्रयोग से कैंसर एवं अन्य जटिल रोगों का प्रतिशत विगत कुछ वर्षो में बढ़ गया है। उनका कहना था कि कॉस्‍मेटिक्‍स, कोल्‍ड ड्रि‍न्‍क, फास्‍ट फूड, डिब्‍बा बंद खाने की चीजें जिनमें परिमिटेड फ्लेवर्स, आदि का जिक्र रहता है उन सबमें जो केमिकल होते हैं ये सभी कैंसर के कारक हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास की भी व्याख्या की एवं पारंपरिक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।

 

इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एमएलबी भट्ट ने छात्र-छात्राओं से नियमित व्यायाम एवं संतुलित खानपान को अपनी जीवनशैली में सम्मिलित किये जाने की अपील की। इस अवसर पर आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर बीएनसिंह, सचिव डॉ अभय नारायण तिवारी, सह-सचिव डॉ अरविन्द गुप्ता, सत्यानंद पाण्डेय,  दिलीप मृदुल,  अधीष श्रीवास्तव,  प्रदीप दीक्षित, प्रोफेसर जीपी सिंह एंव ट्रॉमा सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो संदीप तिवारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

 

इस कार्यक्रम के सफल संचालन में अधिष्ठाता पैरामेडिकल साइंसेज प्रोफेसर विनोद जैन, सह-अधिष्ठाता डॉ अतिन सिंघई, शिवानी श्रीवास्तव, राघवेन्द्र शर्मा, बीनू दुबे सहित अन्य पैरामेडिकल साइंसेज के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।