हैवानियत : बदमाशों ने लूटा, पीटा और घुसेड़ दिया स्टील का गिलास, ऑपरेशन कर निकाला गया

पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचा था मरीज, डॉक्टर ने बताया रेअर ऑफ द रेयरेस्ट केस

यह हैवानियत नहीं तो क्या है कि लोग इन्सान होकर भी इन्सान की तरह व्यवहार न कर हैवान की तरह बर्ताव करें. ऐसा ही एक उदाहरण कानपुर में सामने आया है. इस मामले ने सबको हैरान कर दिया है. यहाँ एक मरीज के पेट से डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके स्टील का गिलास निकला है. यह गिलास बदमाशों ने उसके गुदाद्वार से अन्दर घुसेड़ दिया था. डॉक्टर्स भी खुद आश्चर्य कर रहे हैं, उनका कहना है कि यह रेअर-ऑफ द रेयरेस्ट केस है।

 

मिली जानकारी के अनुसार यहां स्थित रामा हॉस्पिटल में मौजूद डॉक्टर 26 जून को उस वक्त सन्न रह गए जब उन्हें पता चला कि जो मरीज अपने पेट दर्द की समस्या लेकर आया है उसके पेट में एक स्टील का गिलास है। एक्स-रे रिपोर्ट में पेट में गिलास होने का पता चलने के बाद डॉक्टरों ने आनन-फानन में अगले दिन 27 जून को ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने पेट चीर कर गिलास बाहर निकाला। ये ऑपरेशन लगभग दो घंटे तक चला।

 

मिली जानकारी के अनुसार मामला कानपुर के रामा हॉस्पिटल का है जहां दिबियापुर (औरैया) से आए रामदीन (62) नाम के एक शख्स ने पेट में गिलास होने की बात से सबको चौंका दिया। रामदीन तिर्वा, कन्नौज मेडिकल कॉलेज में गार्ड है। मरीज ने बताया कि 10 दिन पहले बदमाशों ने रामदीन को पीटकर बेहोश करने के बाद लूटा और उसके गुदा द्वार में स्टील का गिलास तली की तरफ से ठूंस दिया था, जो उसके पेट में पहुंच गया था।

 

26 जून को मरीज पेट में दर्द और गुदा द्वार से पस आने की शिकायत लेकर आया। अल्ट्रासाउंड कराने पर पेट में गिलास फंसा होने का पता चला। गिलास आंतों के पास फंसा था। 27 जून को सीनियर सर्जन डॉ. दिनेश कुमार ने एनेस्थेटिस्ट डॉ. राजीव कुमार, डॉ. अमित डॉ. रोहित, डॉ. आशीष के साथ मिलकर रामदीन का आरपेशन किया। पहले गुदा द्वार से ही गिलास निकालने की कोशिश की, पर एक घंटे के प्रयास में वह असफल रहे। इसके बाद पेट में चीरा लगाकर गिलास निकाला गया। फिलहाल मरीज ठीक है और उसे बुधवार 4 जुलाई को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है.

 

ऑपरेशन करने वाले रामा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के सीनियर सर्जन डॉ. दिनेश कुमार से जब बात की गयी तो उन्होंने इसे रेअर-ऑफ द रेयरेस्ट केस बताया है और इस ऑपरेशन को बड़ा अचीवमेंट बताया है। उन्होंने बताया कि वे इसे मेडिकल मैग्जीन में प्रकाशित होने के लिए भेजेंगे। यह पूछने पर कि मरीज ने अपने साथ हुए इस हादसे की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज नहीं करायी थी ? इस पर डॉ. दिनेश ने बताया कि मरीज ने पुलिस में रिपोर्ट नहीं दर्ज करायी थी, जब हम लोगों ने उससे इस बारे में कहा तो उसका कहना था कि रिपोर्ट लिखाने से क्या फायदा, हम हमलावरों को पहचानते नहीं हैं, वे लोग जो लूटना था लूट ले गए, जो करना था, कर गए. हालांकि अब देखना यह है कि पुलिस इस घटना के बारे में जानने के बाद मामले पर स्वतः संज्ञान लेगी या नहीं क्योंकि लूट के साथ ऐसा मामला है जिसमें व्यक्ति की जान भी जा सकती थी.