लाइलाज नहीं है इरफान खान की बीमारी न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर

लाखों में किसी एक को होता है यह ट्यूमर, सर्जरी के जरिये हो सकता है ठीक

जब से इरफान खान ने अपनी बीमारी के बारे में खुलासा किया है तब से यह चर्चा चल रही है कि उनकी बीमारी कितनी गंभीर है। आपको बता दें कि इरफान खान ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर अपनी बीमारी की जानकरी दी थी, उन्होंने बताया कि वो इन दिनों न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से जूझ रहे हैं. इरफान खान ने ट्वीट में लिखा है कि वह इसका इलाज कराने लंदन जा रहे हैं।

इस बीमारी का नाम सुन फैंस और बॉलीवुड सेलेब काफी परेशान हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के एचओडी सर्जन डॉक्टर सुमित्रा रावत का कहना है कि इस बीमारी का इलाज संभव है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक वेबपोर्टल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इरफान के मामले में बिना जांच मैं कोई रिपोर्ट तो नहीं दे सकता. लेकिन यह जरूर कह सकता हूं कि यह ट्यूमर सर्जरी के जरिए निकालकर ठीक किया जा सकता है. यह बीमारी लाखों में किसी एक को होती है. लेकिन  इसके इलाज के दौरान और लंबे समय तक मरीज को अपना खास ख्याल रखना पड़ता है.

इरफान की समस्या कितनी गंभीर है इसका अंदाजा ट्यूमर के साइज और लोकेशन पर निर्भर करता है. फिर भी इसके ठीक होने की उम्मीदें ज्यादा हैं.

पिछले दिनों इस बीमारी के पता चलने पर इरफान ने लिखा था कि जिंदगी में अचानक कुछ ऐसा हो जाता है जो आपको आगे लेकर जाती है. मेरी जिंदगी के पिछले कुछ दिन ऐसे ही रहे हैं. मुझे न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी हुई है. लेकिन मेरे आसपास मौजूद लोगों के प्यार और ताकत ने मुझमें उम्मीद जगाई है.

उन्होंने आगे लिखा, इसके इलाज के लिए मैं विदेश जा रहा हूं. मेरी सभी से प्रार्थना है कि वे मेरे लिए दुआएं करते रहें. मेरी बीमारी को लेकर न्यूरो की जो अफवाह फैलाई जा रही हैं, इसके लिए बता दूं कि न्यूरो हमेशा ब्रेन के लिए नहीं होता. जिन लोगों ने मेरे बयान का इंतजार किया, मुझे उम्मीद है कि मैं फिर से और स्टोरी लेकर वापस आऊंगा.

आपको बता दें इरफान को हुई बीमारी न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर व्यक्ति की पाचन ग्रंथि और पेट संबंधी दिक्कतों को पैदा करता है. हाल ही में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इसके एक नए इलाज को भी मान्यता प्रदान की है. ऐसा आवश्यक नहीं है कि यह बीमारी ब्रेन से संबंधित ही हो. इरफान खान को जो बीमारी है वह बहुत ही रेयर है. आंकड़ों की मानें तो एक लाख में सिर्फ पांच लोगों को ही ये बीमारी हो सकती है.