सीओपीडी सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं, हृदय, किडनी पर भी डालती है असर

विश्‍व सीओपीडी दिवस पर केजीएमयू के पल्‍मोनरी विभाग में जागरूकता शिविर आयोजित

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। सी.ओ.पी.डी. (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) बीमारी है तो फेफड़े की लेकिन जब बहुत बढ़ जाती है तो यह हृदय, गुर्दा व अन्‍य अंगों को भी प्रभावित करती है। इस बीमारी का पहला लक्षण सुबह-सुबह खांसी आना होता है।

यह जानकारी आज विश्व सी.ओ.पी.डी. दिवस पर के.जी.एम.यू. के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग में सी.ओ.पी.डी. जागरूकता शिविर के मौके पर रेस्‍परेटरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष व नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा0 सूर्यकान्त ने सी.ओ.पी.डी. के रोगियों एवं उनके परिजनों को सम्बोधित करते हुए दी। उन्‍होंने बताया कि सी.ओ.पी.डी. की एक प्रमुख बीमारी है। उत्तर प्रदेश में लगभग 60 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित है।

डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि सी.ओ.पी.डी. की बीमारी लम्बे समय तक धूल, धुआं व गर्दा के दुष्प्रभाव से होती है। इस बीमारी के लक्षण 30 वर्ष की उम्र के बाद प्रारम्भ होते हैं। सबसे पहला लक्षण सुबह-सुबह खांसी आना होता है। इसके बाद धीरे-धीरे सर्दी के मौसम में एवं फिर बाद में साल भर खांसी आती रहती है, तत्पश्चात बलगम भी आने लगता है। बीमारी बढ़ने पर रोगी की सांस भी फूलने लगती है। डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि सी.ओ.पी.डी. सिर्फ फेफड़े की ही बीमारी नही है, बल्कि बीमारी की तीव्रता बढ़ने पर हृदय,  गुर्दा व अन्य अंग भी प्रभावित हो जाते है। शरीर कमजोर हो जाता है, भूख कम लगती है तथा हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं।

हमारे देश में सी.ओ.पी.डी. के प्रमुख कारण धूम्रपान (बीड़ी, सिगरेट, चिलम, हुक्का), वाहन प्रदूषण, वायु प्रदूषण एवं लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना आदि हैं। डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि सी.ओ.पी.डी. के बचाव के लिए धूम्रपान नहीं करना चाहिए, लकड़ी के चूल्हे के बजाय गैस के चूल्हे पर खाना बनाना चाहिए। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से गरीब परिवारों के घरों में प्रदूषण कम हो रहा है जिससे भविष्य में महिलाओं में सी.ओ.पी.डी. के रोगियों में कमी आयेगी। डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि वायु प्रदूषण से बचने के लिए अंगौछा (गमछा) की चार परत से नाक व मुँह ढंकें, भाप लें तथा प्राणायाम करें।

इस रोगी जागरूकता शिविर का आयोजन के.जी.एम.यू. के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग एवं इण्डियन चेस्ट सोसाइटी तथा नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन्स के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर विभाग के डा0 आरएएस कुशवाहा ने सी.ओ.पी.डी. की चिकित्सा के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन्हेलर नियमित रूप से लेना चाहिये। इस कार्यक्रम में विभाग के समस्त जूनियर डॉक्टर्स उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में सी.ओ.पी.डी. के रोगियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिये गये।