गर्मियों में अधिक होती है गुर्दे की पथरी की संभावना

डॉ. विनोद जैन

लखनऊ। वैज्ञानिक शोध में यह पाया गया है कि गर्मियों में मूत्र तंत्र की पथरी अथवा पथरी के कणों के बनने की संभावना अन्य मौसम की अपेक्षा ज्यादा होती है, क्योंकि गर्मी के मौसम में हमारे शरीर से पसीना निकलता है तथा शरीर से न दिखने वाली भाप द्वारा भी अधिक मात्रा में पानी शरीर से बाहर निकल जाता है। पानी की कमी से मूत्र गाढ़ा होने लगता है और पथरी के कण बनने लगते हैं। इसलिए आवश्यक है कि इस मौसम में पानी का अधिक प्रयोग करें। यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिये कि 24 घंटे में दो लीटर से अधिक मूत्र का विसर्जन हो, इतना पानी पीना चाहिये।

मूत्र का रंग गाढ़ा हो तो ज्यादा पीयें पानी

यह महत्वपूर्ण जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय के सर्जन डॉ. विनोद जैन ने एक मुलाकात में देते हुए बताया कि अधिक पानी पीने से मूत्र गाढ़ा नहीं होगा और न ही पथरी के कण बन सकेंगे। उन्होंने बताया कि मोटे तौर पर अगर यह देखना हो कि पीने वाले पानी की मात्रा ठीक है अथवा नहीं तो यह देखना चाहिये मूत्र का रंग हल्का है अथवा गाढ़ा, अगर रंग हल्का है तो ठीक है अन्यथा मूत्र विसर्जित करते समय इसका रंग ज्यादा गाढ़ा होने का मतलब है कि पथरी का खतरा है, ऐसे में पानी पीने की मात्रा बढ़ा देनी चाहिये।

मेहनत वाला कार्य करने वाले ज्यादा पीयें पानी

उन्होंने बताया कि ऐसे व्यक्ति जो गर्म जगह पर परिश्रम वाला कार्य करते हैं, पथरी से ज्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को ऑफिस में बैठकर काम करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा ज्यादा पानी पीना चाहिये। शोध में यह भी पता चला है कि गर्मी के मौसम में शरीर को अधिक प्रकाश मिलता है जिससे अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में विटामिन डी बनता है। अधिक गर्मी में कैल्शियमयुक्त एवं खनिजयुक्त भोजन करने से विटामिन डी की अधिकता के कारण कैल्शियम पथरियों की संभावना ज्यादा रहती है। इसलिए गर्मी के मौसम में पथरी के रोगियों के लिए उपयुक्त पेय पदार्थों का सेवन विशेष रूप से लाभदायक होता है।

बाजार वाले कोल्ड ड्रिंक का अत्यधिक सेवन ठीक नहीं

डॉ जैन ने बताया कि ज्यादा पानी पीना ठीक  है लेकिन बहुत से लोग कोला आदि कोल्ड ड्रिंक का नियमित सेवन करते हैं जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है। यह जरूर है कि कार्बोहाइड्रेड पानी के सेवन से सामान्य पानी के सेवन की अपेक्षा पथरी बनने की संभावना कम है परन्तु फासफोरिक एसिड से अम्लीय किये गये कोल्ड ड्रिंक के नियमित सेवन से पथरी बनने की संभावना अधिक होती है। शोध में यह भी देखा गया है कि सिट्रिक एसिड द्वारा अम्लीय किये गये पेय पदार्थ का भी पथरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है लेकिन समस्या है कि किस कोल्ड ड्रिंक में कौन सा पदार्थ मिला है यह तो पता नहीं होता है इसलिए मेरा कहना यह है कि पथरी के रोगी को सामान्यत: सोडा पेय पदार्थ के नियमित  सेवन से बचना चाहिये।

संतरा, नीबू, मुसम्बी का रस है लाभदायक

डॉ जैन ने बताया कि संतरा, मुसम्बी, नीबू इत्यादि श्रेणी के फलों एवं उनके रस के सेवन से पथरी का बचाव हो सकता है। परन्तु यह देखा गया है कि सेब और अंगूर के रस के सेवन से दोबारा पथरी बनने की संभावना अधिक हो जाती है। संतरे के रस का सेवन कैल्शियम एवं यूरिक एसिड पथरी रोगियों के लिए पथरी रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभप्रद है। उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो घर पर ही निकाले गये फलों के रस का ही प्रयोग करें। नीबू-पानी के सेवन से मूत्र में यूरिक एसिड एवं कैल्शियम की मात्रा कम होने के साथ-साथ साइट्रेट की मात्रा अधिक हो जाती है, साइट्रेट पथरी बनने से रोकता है।