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आम व्‍यक्ति की अपेक्षा रक्‍तदान करने वाले के स्‍वस्‍थ रहने की संभावना अधिक : कुलपति

-केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने निकाली रक्‍तदान जागरूकता रैली

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी ने लोगों से अपील की है की स्वैच्छिक रक्तदान आज के परिप्रेक्ष्य में अति आवश्यक है उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति रक्त देता है सदैव उसके स्वस्थ रहने की संभावना आम लोगों से ज्यादा होती है।

कुलपति ने यह विचार आज केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित रक्तदान जागरूकता रैली निकाले जाने के मौके पर व्यक्त किए। इस मौके पर छात्रों ने नाटक की प्रस्तुति के माध्यम से लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक भी किया। कुलपति ने कहा कि‍ केजीएमयू का रक्त कोष भारतवर्ष का सबसे बड़ा रक्तकोष है, यहां प्रतिवर्ष लगभग 70000 यूनिट रक्त एकत्रित होता है। उन्‍होंने कहा कि यहां का ब्लड बैंक अत्याधुनिक तकनीकी से सुसज्जित है। उन्‍होंने कहा कि यहां रक्त में हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी संक्रमण की जांच करने वाली विश्व की सबसे आधुनिक तकनीकी नेट टेस्टिंग है जिससे हम इन बीमारियों को आरंभ में ही पकड़ लेते हैं तथा मरीजों के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित रक्त की आपूर्ति करते हैं।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का यह प्रथम रक्तकोष है जिसमें नेट टेस्टिंग की जांच प्रारंभ की गयी, यहां ब्लड ग्रुपिंग एवं एंटीबॉडी स्क्रीनिंग तथा क्रॉस मैचिंग अत्याधुनिक तकनीक द्वारा की जाती है जिससे मरीज के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित रक्त की आपूर्ति हो पाती है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू को प्रदेश के सभी ब्लड बैंक के रक्त की गुणवत्ता जांचने के लिए नोडल सेंटर बनाया गया है। यहां डिप्लोमा इन ब्लड ट्रांसफ्यूजन टेक्निशियन भी प्रशिक्षित किये जाते हैं। इनकी आवश्यकता प्रदेश के हर रक्त कोष में होगी एवं रक्त कोषों के कार्य की गुणवत्ता में सुधार होगा।

इस समारोह के मुख्य अतिथि सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व एएमडी एनएचएम प्रांजल यादव ने कहा कि इस प्रकार की रक्तदान जागरूकता रैली के आयोजन से आम जनमानस रक्तदान के प्रति प्रेरित एवं जागरूक होता है। उन्होंने पैरामेडिकल छात्रों, कर्मचारियों, जो रैली में सम्मिलित हैं, की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका यह संदेश मरीजों के तीमारदारों एवं समाज में दूर तक जाएगा कि रक्तदान करना पूर्णतया सुरक्षित है उन्होंने बताया कि रक्त अवयव की आवश्यकता एवं महत्व देखते हुए जिन जिलों में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना की जानी है वहां यह कार्य जल्दी ही पूरा होगा।

समारोह में जनरल मैनेजर ब्लड सेल एन एच एम एसपीएमयू डॉ आरपी दीक्षित ने ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के पैरामेडिकल छात्रों द्वारा रक्तदान पर नाट्य प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह नाटक बहुत ही उत्प्रेरक एवं भाव से परिपूर्ण था, छात्रों ने बहुत ही सहजता से रक्तदान का महत्व जनमानस के सामने प्रस्तुत किया।

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ तूलिका चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष की 2% आबादी भी अगर नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करे तो समाज में किसी भी मरीज को रक्त मिलने में दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि पुरुष हर तीन माह एवं महिला 4 माह में रक्तदान कर सकती है। रक्तदान करने वाले की उम्र 18 वर्ष से 65 वर्ष के बीच तथा वजन 50 किलोग्राम या उससे अधिक होना चाहिये तथा इसके साथ ही हीमोग्लोबिन 12.5% से ऊपर हो तो ऐसे लोग रक्तदान कर सकते हैं नियमित रक्त दाताओं में हृदयाघात में 5% की कमी आती है, उनका बोन मैरो सक्रिय हो जाता है एवं ऊर्जा का संचार होता है।

उन्‍होंने कहा कि रीप्लेसमेंट रक्तदान के स्थान पर स्वैच्छिक रक्तदान बढ़ जाए तो सभी रक्त कोषों में रक्त की कमी नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा कि रक्त किसी फैक्‍टरी में नहीं बनाया जा सकता है, न ही इसे पैसे से खरीदा जा सकता है। एक रक्तदान से 4 मरीजों की जान बचाई जा सकती है क्योंकि आजकल रक्त अवयव जैसे पीआरबीसी, एफएफपी, प्लेटलेट्स, क्रायो आदि को अलग कर लिया जाता है तथा इसे जरूरतमंद को चढ़ाया जाता है इस प्रकार एक मरीज का रक्त चार लोगों के काम आ सकता है।

जागरूकता रैली केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग शताब्दी फेस 2 से प्रारंभ होकर शहीद स्मारक तक गई। इस मौके पर केजीएमयू के कुलसचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी  सहित अनेक चिकित्सक, कर्मचारी, छात्रगण उपस्थित रहे।

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