इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में रेजीडेंट्स डॉक्‍टरों को भी सिखाया जा रहा सीटी हेड का आकलन करना

इलाज की दिशा शीघ्र तय करने के लिए उठाया गया कदम, मास्‍टरक्‍लास आयोजित

 

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍व विद्यालय के ट्रॉमा सेंटर स्थित इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में बेहोश होकर पहुंचे व्‍यक्ति का इलाज और जल्‍दी शुरू किया जा सके इसके लिए विभाग द्वारा रेजीडेंट्स डॉक्‍टरों को सीटी हेड का आकलन करना सिखाया जा रहा है। इससे मरीज के इलाज की दिशा तय करने में समय की बचत होगी।

 

इस विषय में शनिवार को ट्रॉमा सेंटर स्थित इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में सीटी हेड की व्याख्या के विषय पर रेडियोलॉजी मास्टरक्लास का आयोजन किया गया। इसमें अतिथि वक्ता प्रो अनित परिहार ने इस बारे में रेजीडेंट डॉक्‍टरों को महत्‍वपूर्ण जानकारी दी। इन डॉक्‍टरों को बताया गया कि सीटी फि‍ल्‍म देखकर किस तरह पता लगायें कि उसके उपचार में अगला कदम क्‍या उठाना है।

 

यह जानकारी देते हुए इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रो हैदर अब्‍बास ने बताया कि सीटी हेड आपातकालीन विभाग में सबसे महत्वपूर्ण नैदानिक तौर तरीकों में से एक है। यह सिर की चोट और स्ट्रोक के मामलों और उसके बाद के उपचार के तत्काल निदान के लिए महत्वपूर्ण है। उन्‍होंने बताया कि आने वाले कुल मरीजों में करीब 15 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिनकी बीमारी पहचानने के लिए उनका सीटी हेड कराना जरूरी होता है।

 

उन्‍होंने बताया कि इस मास्‍टरक्‍लास का उद्देश्‍य मरीज के इलाज की दिशा तय करने में लगने वाले समय को कम करना था इसके लिए रेजीडेंट डॉक्‍टरों को सीटी फि‍ल्‍म देखकर उसे पढ़ने की ट्रेनिंग देना बहुत जरूरी है क्‍योंकि रेजीडेंट ही मरीज के सम्‍पर्क में सबसे पहले आते हैं। उन्‍हें अगर सीटी हेड की रिपोर्ट देखना आ जायेगा होगा तो इलाज शुरू करने के लिए सीनियर चिकित्‍सक द्वारा रिपोर्ट देखने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे तुरंत ही सही दिशा की तरफ इलाज शुरू कर सकते हैं।

 

मास्‍टरक्‍लास सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर हैदर अब्बास ने की और इसमें आपातकालीन चिकित्सा और रेडियो-निदान के डॉक्टरों ने भाग लिया। विभाग के डॉ लोकेंद्र गुप्ता ने विजिटिंग फैकल्टी और इस मास्टरक्लास में मौजूद सभी लोगों का धन्यवाद किया।