एक साल बाद भी समझौते लागू नहीं, राज्‍य कर्मचारी करेंगे बड़ा आंदोलन

12 अक्टूबर को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई, होगी बड़े आन्दोलन की घोषणा

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अपनी एक साल पुरानी मांगों पर मुख्‍य सचिव के साथ हुए समझौतों पर कार्यवाही न होने के विरोध में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है। आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए परिषद ने आगामी 12 अक्‍टूबर को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलायी है।

यह जानकारी परिषद के महामंत्री अतुल मिश्र ने देते हुए बताया कि पिछले साल 9 व 12 अक्टूबर को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की प्रमुख मांगों पर मुख्य सचिव के साथ हुए समझौतों पर कार्यवाही न होने को लेकर परिषद ने आज हाई कमान की बैठक बलरामपुर चिकित्सालय में बुलाई, जिसकी अध्यक्षता सुरेश रावत ने की। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश मिश्र, महामंत्री अतुल मिश्रा, संगठन प्रमुख के0के0 सचान, प्रमुख उपाध्यक्ष एवं राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव एवं सचिव डा0 पी0के0 सिंह उपस्थित थे।

उन्‍होंने बताया कि 9 व 12 अक्टूबर के पूर्व अनेक आन्दोलनों के माध्यम से शासन व सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया था, जिसके फलस्वरूप बैठक में परिषद की प्रमुख मांगों पर अनेक समझौते/निर्णय लिये गये थे।

उन्‍होंने बताया कि निर्णय के बाद परिषद लगातार शासन से पत्राचार करता रहा है। शासन द्वारा संविदा/आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति का निर्माण फरवरी 2019 में पूर्ण कर लिया गया लेकिन अभी तक मंत्रिपरिषदसे पारित नही कराया गया। संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मचारियो की स्थाई नीति जारी न होने से कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है। कुछ विभागों में पूर्व से चली आ रही योजनाओं के कार्मिकों को सेवा से बाहर किए जाने की नोटिस पकडा़ दी गयी। इसी प्रकार समझौतों पर कार्यवाही तो नही हो सकी बल्कि उसके स्थान पर राज्य कर्मचारियों पर अभी तक प्राप्त हो रहे छः भत्ते समाप्त कर जले पर नमक छिड़कने जैसा कार्य किया गया।

पुरानी पेंशन ब्यस्था बहाली पर अनेक आन्दोलनों के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नही की जा रही है। अनेक ऐसे संवर्ग है जिनमें छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां व्याप्त है, वित्त विभाग द्वारा एक माह में परीक्षण कर कार्यवाही कराने का निर्देश दिया गया था परन्तु अभी तक उसपर कोई कार्यवाही सम्पन्न नही हुई है। केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति भत्तों की समानता, वाहन भत्ता एवं मकान किराए भत्तें के संशोधन के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही की गयी, जिससे केन्द्रीय एवं राज्य कर्मचारियों को प्राप्त हो रहे भत्तों में बड़ा अन्तर आ गया है।

डिप्लोमा इंजीनियर के भांति सभी राज्य कर्मचारियों को रू0 4600/- ग्रेड पे को इग्नोर करते हुए रू0 4800 के समतुल्य मैट्रिक्स लेवल वेतनमान प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा पुनः परीक्षण किये जाने का निर्णय लिया गया था। प्रदेश में सीधी भर्ती अधिकतम आयु 40 वर्ष के दृष्टिगत ए0सी0पी0 में 08, 16 एवं 24 वर्ष की सेवा पर तीन पदोन्नति वेतनमान दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक परीक्षण कर कोई प्रस्ताव नही बनाया गया । उपार्जित अवकाश के संचय की तीन सौ दिन की सीलिंग समाप्त कर सेवा निवृत्ति पर 600 दिनों का नकदीकरण दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा परीक्षण कर प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसपर एक वर्श के पश्चात भी कोई कार्यवाही नही की गयी है। इस बींच कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उन्हे आर्थिक नुकसान हो रहा है।

यह भी निर्णय लिया गया था कि एक समान शैक्षिक योग्यता वाले संवर्गों को एक समान वेतन भत्ते अनुमन्य किए जाये चाहे वे किसी भी विभाग में कार्यरत हो, परन्तु वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही हो सकी है।

बार-बार समझौतों के बावजूद कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा अभी तक प्रारम्भ नही हो सकी जबकि पूर्व से मिल रहे चिकित्सा प्रतिपूर्ति भूगतान हेतु बजट के अनुदान की ग्रुपिंग में फेरबदल कर उसे और जटिल बना दिया गया, यहा तक कि सरकारी चिकित्सालयों में दवाओं के लोकल परचेज पर भी रोक लगा दी गयी। चिकित्सा विभाग के आप्टोमेट्रिस्ट लैब टेक्निशियन सहित अन्य संवर्गों की वेतन विसंगति केन्द्र सरकार द्वारा दूर की जा चुकी है परन्तु समझौतो के बावजूद प्रदेश में अभी वेतन विसंगति लम्बित है। अन्य संवर्गो की वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियों एवं शेष भत्तों पर अक्टूबर 2018 में ही मंत्रिपरिषद से निर्णय कराने का निर्णय लिया गया था जो एक वर्ष बाद भी अभी तक लम्बित है। निर्णयों का क्रियान्वयन न कर शासन द्वारा 50 वर्ष पूर्ण कर रहे कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया जा रहा है। जो नितान्त गलत है।

राजकीय फार्मासिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि प्रदेश के एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयूर्वेदिक, यूनानी एवं वेटनरी फार्मासिस्ट चिकित्सालयों की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहें है, महत्वपूर्ण कार्य एवं दायित्व तथा शैक्षिक एवं तकनीकी योग्यता को देखते हुए वेतन समिति द्वारा वेतन उच्चीकरण कर राज्य में कार्यरत अन्य डिप्लोमा धारकों के बराबर करने का निर्णय लिया गया था मुख्य सचिव द्वारा उक्त विसंगति को एक माह के अन्दर मंत्रिपरिषद से पारित कराकर लागू कराने का निर्णय बैठक में लिया गया था, परन्तु अभी तक उक्त समझौता शासन की फाईलो में दर्ज है, जिससे प्रदेश के फार्मासिस्टों का हजारो रूपया प्रतिमाह आर्थिक नुकसान हो रहा है।

ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार द्वारा कर्मचारी हितों की अनदेखी की जा रही है। इसलिए कर्मचारियों मे व्याप्त नाराजगी को देखते हुए आज परिषद की हाईकमान ने निर्णय लिया कि 12 अक्टूबर को प्रान्तीय कार्यकारिणी की बैटक में बड़े व कड़े आन्दोलन की घोषणा की जायेगी।

परिषद ने मुख्य मंत्री से मांग की है कि तत्काल हस्तक्षेप कर समझौतो का क्रियान्वयन कराने का निर्देश जारी करें साथ ही कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोके अन्यथा प्रदेश के लाखों कर्मचारी आन्दोलन को विवश होंगें।

 प्रमुख मांगें एवं उन पर लिये गये निर्णय

*   केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में 03 लाख आउटसोर्सिंग/संविदा/ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों हेतु स्थाई नीति बनाई जायेगी।*

*   सी0एस0डी0 कैन्टीन की भॉति राज्य कर्मचारियों को भी राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के माध्यम से स्टेट जी0एस0टी0 मुक्त सामग्री क्रय की सुविधा का मिलेगा लाभ तथा कर्मचारी कल्याण निगम कर्मियों की बदहाली होगी दूर।

*वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियॉ एवं शेष बचे भत्तों पर इसी माह मंत्रिपरिषद से अनुमोदन हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया जायेगा।

*पूर्व विनियमित कर्मचारियों की अर्हकारी सेवाएं को जोड़ते हुए पेंशन निर्धारित की जायेंगी।

*डिप्लोमा इंजीनियर्स की भॉति ग्रेड वेतन 4600/- को इग्नोर करके 4800/- के ग्रेड वेतन के समान मैट्रिक्स लेवल अनुमन्य कराने पर विचारोपरान्त जल्द सकारात्मक निर्णय किया जायेगा।

*उपार्जित अवकाश में 300 दिन के संचय की सीमा को समाप्त किया जायेगा।

*राजस्व संवर्ग सींचपर्यवेक्षक, जिलेदार सेवा नियमावली, एवं तकनीकी पर्यवेक्षक नलकूप सेवानियमावली, अधीनस्थ वन सेवानियमावली एक माह के अन्दर प्रख्यापित कराई जायेगी।

*सभी संवर्गो का पुनर्गठन किया जाय। जिनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नही हैं, उसे प्रख्यापित कराया जाय पर सख्त निर्देश दिये कि समयबद्धता के साथ आवश्यक कार्यवाही कराई जाय।

*राज्य सड़क परिवहन निगम में ए0सी0पी0 पर लगी रोक को हटाने व वेतन विसंगतियों को दूर करने सहित समझौतों को शीघ्र लागू करने के निर्देश मुख्य सचिव द्वारा दिये गये।