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भारतीय पौधों से पेप्टिक अल्सर की दवा विकसित करने के वैज्ञानिक तरीके बताये

-आरएमएलआई, लखनऊ में किया गया राष्ट्रीय फार्माकोलॉजी दिवस 2026 का आयोजन

सेहत टाइम्स

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (डॉ. आरएमएलआईएमएस), लखनऊ के औषधि विज्ञान विभाग द्वारा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के सहयोग से 17 अगस्त को राष्ट्रीय फार्माकोलॉजी दिवस 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन हाइब्रिड मोड में दोपहर 2:30 बजे से 4:00 बजे तक किया गया। इस वर्ष के राष्ट्रीय फार्माकोलॉजी दिवस का विषय ”बेहतर स्वास्थ्य के लिए औषधि खोज को बढ़ावा देना” था। कार्यक्रम का उद्देश्य औषधि विज्ञान एवं नवीन औषधि खोज की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत संबोधन एवं उद्घाटन के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. गौतम पालित, पूर्व वैज्ञानिक, सीडीआरआई, लखनऊ द्वारा “दवा की खोज : पेप्टिक अल्सर की बीमारी के लिए भारतीय औषधीय पौधों से ‘लीड्स’ (संभावित दवाएं) विकसित करने के वैज्ञानिक तरीके” विषय पर अतिथि व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। व्याख्यान में औषधि खोज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा पेप्टिक अल्सर रोग के उपचार के लिए नवीन औषधीय लीड विकसित करने में भारतीय औषधीय पौधों की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

“सफ़र का जश्न और भविष्य के लिए प्रेरणा”

कार्यक्रम में “सफ़र का जश्न और भविष्य के लिए प्रेरणा” विषय पर पूर्व छात्र विशेष का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभाग के पूर्व छात्रों की व्यावसायिक यात्रा एवं उपलब्धियों को साझा किया गया तथा विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों को औषधि विज्ञान एवं जैव-चिकित्सीय अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का समापन आभार ज्ञापन के साथ हुआ।

निदेशक, प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह तथा डीन प्रो. (डॉ.) प्रद्युम्न सिंह के मार्गदर्शन में कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष की जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष, औषधि विज्ञान विभाग (डॉ.) अर्पिता सिंह ने तथा आयोजन सचिव की जिम्मेदारी सहायक आचार्य, औषधि विज्ञान विभाग डॉ. पारुल कमल ने निभायी। कार्यक्रम का संचालन भी डॉ. पारुल कमल ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम का संचालन किया।

कार्यक्रम ने संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच शैक्षणिक संवाद और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया। इस अवसर पर औषधि खोज एवं विकास में फार्माकोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका तथा सुरक्षित, प्रभावी एवं सुलभ उपचार विकल्पों के विकास के लिए निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया गया।