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‘अंगदान किया जाना चाहिये’, इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव

-विश्व अंगदान दिवस के मौके पर आईएसए यूपी ने आयोजित की फेसबुक लाइव चर्चा “अंगदान जीवनदान”

-इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स उत्तर प्रदेश का “ऑपरेशन थिएटर से जनता तक” अभियान शुरू

सेहत टाइम्स

लखनऊ। विश्व अंगदान दिवस की पूर्व संध्या पर इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (ISA) उत्तर प्रदेश द्वारा 12 अगस्त 2026 को “ऑपरेशन थिएटर से जनता तक” अभियान के प्रथम एपिसोड का आयोजन किया गया। प्रथम एपिसोड का विषय “अंगदान जीवनदान” रहा। विशेषज्ञों ने ब्रेन डेथ, अंगदान एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रिया, अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों तथा इसमें एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका पर आम जनता को सरल एवं वैज्ञानिक जानकारी दी। कार्यक्रम का प्रसारण ISA उत्तर प्रदेश के आधिकारिक Facebook Page पर Facebook Live के माध्यम से हुआ, जिसमें विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों एवं ISA UP के पदाधिकारियों ने ऑनलाइन सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्घाटन आईएसए नेशनल प्रेसीडेंट डॉ. नवीन मल्होत्रा एवं सचिव डॉ. राजीव गुप्ता ने किया। विशेषज्ञ पैनल में डॉ. गगन श्रीवास्तव, डॉ. सुरुचि अम्बस्ता, डॉ. शाहबाज़ अहमद एवं डॉ. रणवीर सिंह त्यागी शामिल रहे।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए आईएसए उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार दुबे और सचिव डॉ तन्मय तिवारी ने बताया कि कार्यक्रम में अनेक प्रकार के प्रश्नों पर चर्चा हुई, इनमें एक खास सुझाव आया कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए इसे स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिये, आज के विद्यार्थी भविष्य के वे नागरिक होंगे जिनकी अच्छा समाज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विद्यार्थियों को जब शुरू से अंगदान का महत्व बताते हुए जागरूक किया जायेगा, तो बड़े होकर वे लोग अंगदान को सामान्य प्रक्रिया मानेंगे, अगर हम लोग ऐसा नहीं करेंगे तो जरूरतमंदों को अंगों की कमी जो हम आज महसूस कर रहे हैं, आने वाले 15-20 वर्षों में भी हम उसे पूरा नहीं कर पायेंगे।

डॉ तन्मय ने बताया कि इसके अतिरिक्त चर्चा का एक विषय यह भी था कि अंगदान करने वाले के परिवारवालों का अंगदान की इच्छा से भली-भांति परिचित रहना, क्योंकि कई बार ऐसा होता है, व्यक्ति अंगदान का फैसला लेते हुए पंजीकरण करा लेता है, लेकिन उनके परिजनों को इसकी जानकारी नहीं रहती है।

किसी भी धर्म में अंगदान की मनाही नहीं

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में कुछ लोगों ने प्रश्न पूछा कि क्या कोई धर्म हमें मना करता है कि अंगदान नहीं करना चाहिये, इस पर गोरखपुर के ऐनेस्थीसिया के प्रोफेसर डॉ शाहबाज अहमद ने पुरजोर तरीके से बताया कि सभी धर्म कहते हैं कि अंगदान करना चाहिये, उन्होंने कहा कि हमारे धर्म में भी कोई मनाही नहीं है बल्कि अंगदान एक अच्छी चीज है कि दुनिया से जाने के बाद भी आप किसी और तरीके से जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा ​कि इस चीज को सामाजिक तौर पर काफी बढ़ावा देने की जरूरत है। इस पर लोगों के साथ चर्चा करने की आवश्यकता है, क्योंकि अगर लोग इसे नहीं समझेंगे तो यह भ्रांति और बढ़ती जायेगी।

चिकित्सक बेटे को गांव वालों ने सुनायी खरी-खोटी

डॉ तन्मय ने कहा कि चर्चा में डॉ शाहबाज अहमद ने कहा कि दिक्कत यह होती है कि जब व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके बाद उसके परिवार वाले व अन्य साथी अंगदान होने नहीं देते हैं। इस बारे में उन्होंने एक घटना साझा करते हुए बताया कि एक चिकित्सक ने अपने चिकित्सक बेटे से कहा था कि बेटा मेरी मृत्यु के बाद मेरे अंग दान कर देना, मृत्यु के बाद पिता के अंगों को दान करने के बाद जब बेटा उनके पार्थिव शरीर को गांव ले गया तो लोगों ने कहा कि बेटे को इतना पढ़ाया-लिखाया, लेकिन बेटे ने पिता के अंगों को बेच दिया। यहां तक कि गांव में उनके शव के अंतिम संस्कार करने के लिए भी मना किया जाने लगा।