-फास्ट फूड, मिलावटी व प्रिजर्वेटिव खाद्य पदार्थ, व्यायाम की कमी इसका मुख्य कारण
-होम्योपैथिक में कारगर उपचार उपलब्ध, जीसीसीएचआर में हुए शोध का हो चुका है प्रकाशन
-विश्व लिवर दिवस (19 अप्रैल) के मौके पर विशेष रिपोर्ट

सेहत टाइम्स
लखनऊ। बदलती जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों के चलते आजकल बच्चों और युवाओं में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें, अधिक चिकनाई और व्यायाम की कमी इस बीमारी के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
विश्व लिवर दिवस (19 अप्रैल) के अवसर पर गौरांग क्लिनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च (जीसीसीएचआर) के संस्थापक व मुख्य परामर्शदाता डॉ. गिरीश गुप्ता ने ‘सेहत टाइम्स’ से विशेष बातचीत में बताया कि फैटी लिवर, जिसे फैटी इंफिल्ट्रेशन ऑफ लिवर भी कहा जाता है, अब केवल शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि अधिक चिकनाई और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन, जैसे पिज्जा, बर्गर, चाउमिन, मोमोज और बार-बार गर्म किए गए तेल में बनी चीजें, बिना सलाह दवाओं का सेवन और व्यायाम की कमी इस बीमारी के मुख्य कारण हैं। बार-बार गर्म किए गए तेल में लॉन्ग फैटी एसिड चेन बन जाती हैं, जो शरीर में आसानी से नहीं टूटतीं और लिवर पर जमा होकर समस्या को बढ़ाती हैं। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त मिलावटी खाद्य पदार्थ, खेतों में रासायनिक खादों का प्रयोग, प्रिजर्वेशन के लिए किये जाने वाले रसायन भी फैटी लिवर रोग का कारण बन रहे हैं।
यह पूछने पर कि इसके लक्षण क्या हैं, उन्होंने बताया कि फैटी लिवर के सामान्य लक्षणों में भूख में कमी, जी मिचलाना, उल्टी, अनियमित वजन घटना, याददाश्त कमजोर होना, पसलियों में दर्द, मुंह सूखना, बुखार और पैरों में सूजन शामिल हैं।
होम्योपैथी में कारगर उपचार मौजूद
होम्योपैथी में लिवर रोगों, विशेषकर फैटी लिवर के उपचार की प्रभावी संभावनाएं मौजूद हैं। जीसीसीएचआर में इस विषय पर किया गया शोध प्रतिष्ठित एशियन जर्नल ऑफ होम्योपैथी (नवंबर 2010-जनवरी 2011 अंक, वॉल्यूम 4, नंबर 4(13)) में प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में भी इस पर एक और क्लीनिकल स्टडी हो रही है। उन्होंने बताया फैटी लिवर तीन ग्रेड का होता है, इस स्टडी में तीनों ग्रेड के फैटी लिवर का उपचार शामिल है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि उपचार की वैज्ञानिक प्रमाणिकता के लिए मरीजों की जांच उपचार से पहले, उपचार के दौरान और उपचार के बाद में कराई गई, जांचों में अल्ट्रासाउंड, लिवर फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल और यूरिन टेस्ट शामिल थे।
उन्होंने कहा कि सबसे आदर्श स्थिति तो यही है कि बीमारी को होने से बचाया जाये इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तली-भुनी और बाहरी खाद्य सामग्री से परहेज, तथा बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं के सेवन से बचना इस बीमारी से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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