Friday , April 10 2026

जैसे चाहें वैसे करायें सामान्य प्रसव, लेटकर या बैठकर, खड़े होकर या घुटने के बल, दायीं करवट, बायीं करवट

-सुरक्षित मातृत्व व आधुनिक प्रसूति देखभाल पर देश-विदेश के ​विशेषज्ञ लखनऊ में विशेषज्ञ करेंगे मंथन

-फॉग्सी की नेशनल कॉन्फ्रेंस ”फॉग्सी आर्ट ऑफ बर्थिंग कॉन्क्लेव – वूम्ब टू वर्ल्ड कॉन 2026” 10, 11 व 12 अप्रैल को

सेहत टाइम्स

लखनऊ। महिला संतान को लेटकर जन्म देना चाहती है, या बैठकर, दायीं करवट या बायीं करवट, घुटने के बल बैठकर या खड़े होकर, यहां तक अगर पानी में भी अगर प्रसव चाहती है तो यह संभव है, क्योंकि इनमें से किसी भी मुद्रा, जिसमें मां को आराम मिल रहा है, तो जहां सामान्य प्रसव (Normal delivery) आसानी से हो जाता है, वहीं जन्म देते समय मां की पीड़ा भी कम हो जाती है। कुछ इसी प्रकार के तरीकों जिनसे सुरक्षित प्रसव हो सके, के बारे में नयी-नयी जानकारियों के आदान-प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ यहां लखनऊ में 10 से 12 अप्रैल तक हो रही तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ”फॉग्सी आर्ट ऑफ बर्थिंग कॉन्क्लेव – वूम्ब टू वर्ल्ड कॉन 2026” में जुट रहे हैं। इसका आयोजन फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया Federation of Obstetric and Gynaecological Societies of India (FOGSI) के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह आयोजन केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेन्शन सेंटर में किया जा रहा है।

कॉन्फ्रेंस के बारे में जानकारी देने के लिए आज 9 अप्रैल को यहां स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता में कॉन्क्लेव की आयोजन अध्यक्ष डॉ प्रीती कुमार, आयोजन सचिव डॉ सीमा मेहरोत्रा के साथ ही डॉ मंजू शुक्ला, डॉ उर्मिला सिंह, डॉ सुजाता देव, डॉ निवेदिता दत्ता, डॉ अनीता सिंह और डॉ वरदा शुक्ला भी उपस्थित रहीं।

आयोजन अध्यक्ष डॉ प्रीती कुमार ने बताया कि फॉग्सी के प्रेसीडेंट डॉ. भास्कर पाल के नेतृत्व में हो रहे इस कॉन्क्लेव में नॉर्मल डिलीवरी पर फोकस इस कॉन्फ्रेंस में अनेक चर्चाएं की जायेंगी जो सुरक्षित प्रसव को आसान बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि होता यह है कि प्रसव के समय गर्भवती माता जितना रिलेक्स फील करती है, उतना ही प्रसव आसान हो जाता है। डॉ प्रीती कुमार ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सामान्य प्रसव Normal vaginal delivery कराने पर जोर देने के लिए किये जा रहे प्रयास की दिशा में ही विभिन्न मुद्राओं में प्रसव Alternative Birth Positions की सुविधा मुहैया कराने का कॉन्सेप्ट दिया गया है। प्रसव के समय शरीर की हर वह मुद्रा, जिसमें महिला ज्यादा आराम महसूस कर रही है, और वह मुद्रा नॉर्मल डिलीवरी के अनुकूल है, तो उसी मुद्रा में डिलीवरी करायी जाती है। उन्होंने कहा कि लेकिन यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि मनचाही मुद्रा में प्रसव तभी कराया जायेगा जब स्थिति कम जोखिम वाली होगी, हाई रिस्क प्रेगनेंसी में यह बात लागू नहीं होगी।

डॉ प्रीती कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में असंतुलित जीवनशैली, कुपोषण और जागरूकता की कमी के चलते गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई मामलों में प्रसव के दौरान गंभीर जोखिम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे मां और शिशु दोनों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आंकड़ों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रति एक लाख प्रसव के दौरान 170 से 180 प्रसूताओं की मौत हो जाती है, जबकि केरल में मौत की संख्या मात्र 28 है। उन्होंने कहा कि समय पर नियमित जांच, विशेषज्ञों की उचित देखरेख और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आधुनिक तकनीकों और उन्नत प्रशिक्षण के माध्यम से सुरक्षित व सम्मानजनक प्रसव को बढ़ावा देना संभव है, जिसके लिए यह कॉन्क्लेव एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।

आयोजन सचिव डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि बताया कि कॉन्फ्रेंस में 500 गायनेकोलॉजिस्ट के साथ ही 400 से 500 नर्सिंग ऑफीसर्स भी हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि इसमें 40 डॉक्टर, 25 नर्सिंग स्टाफ एवं विभिन्न सीएचसी (CHC) और सरकारी अस्पतालों के स्वास्थ्यकर्मी भी भाग लेंगे। सभी को नई तकनीकों, सुरक्षित डिलीवरी के तरीकों और जटिल मामलों को समय पर उच्च संस्थानों में रेफर करने की सही प्रक्रिया सिखाई जाएगी, ताकि अनावश्यक जटिलताओं से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस के प्रथम दिन कार्यशालाओं का आयोजन होगा जबकि दूसरे और तीसरे दिन कॉन्क्लेव के लिए रखे गये हैं। दिन पर दिन बढ़ते जा रहे सिजेरियन प्रसव को कैसे कम करके सामान्य प्रसव को बढ़ावा दिया जाये, इस बारे में चर्चाएं की जायेेंगी।

मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि एनीमिया, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कुपोषण जैसी समस्याओं के कारण गर्भावस्था में जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। सुरक्षित मातृत्व के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित एवं पौष्टिक आहार और डॉक्टर की सलाह का पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को सक्रिय रहना चाहिए और किसी भी समस्या के लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की मदद से मां और शिशु दोनों की सुरक्षा को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकता है।