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जननांगों से जुड़ी तीन बेहद दुर्लभ जन्मजात समस्याओं से ग्रस्त किशोरी को मिला नया जीवन

-आरएमएलआई के यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विभाग में चरणबद्ध तरीके से किया गया उपचार

-ऐसी तीनों बीमारियां एकसाथ होने का यह पहला मामला 

डॉ. ईश्वर राम धायल

सेहत टाइम्स

लखनऊ। बचपन से पेशाब पर नियंत्रण न रख पाने की परेशानी से त्रस्त बालिका की जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही थी, वैसे-वैसे उसकी परेशानी बढ़ रही थी और घट रहा था आत्मविश्वास क्योंकि अब वह नादान बच्ची नहीं रही थी, बलिया की रहने वाली इस लड़की के किशोरावस्था की दहलीज पर पहुंचते-पहुंचते स्थितियां बेहद परेशानी और आत्मविश्वास तोड़ने वाली बनती जा रही थीं, ऐसे में घरवालों ने सम्पर्क किया लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में।

डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS), लखनऊ के यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विभाग ने हाल ही में एक बेहद दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित किशोरी का सफल इलाज कर एक मिसाल कायम की है। बलिया, उत्तर प्रदेश की रहने वाली 12 वर्षीया किशोरी को इस जटिल समस्या के समाधान के बाद एक नया जीवन मिला है। बताया जा रहा है कि लडकी को जो समस्याएं थीं, ये एक साथ किसी में हुई हों, अभी ऐसा कोई केस नहीं दिखा है, इसलिए बहुत संभावना है कि यह पहला मामला हो।

इस बारे में सर्जरी करने वाले डॉ. ईश्वर राम धायल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विभाग ने बताया कि बचपन से ही लड़की को पेशाब पर नियंत्रण न रहने की परेशानी थी, जिसमें पेशाब असामान्य रूप से हो जाता था। इसके साथ-साथ उसे लंबे समय से पेट साफ़ न होने की भी समस्या थी। इन कारणों से उसका रोज़मर्रा का जीवन और आत्मविश्वास दोनों प्रभावित हो रहे थे। RMLIMS पहुंचने पर यूरोलॉजी टीम ने बहुत बारीकी से जांच की, जिससे किसी गंभीर अंदरूनी समस्या का संदेह हुआ।

डॉ धायल ने बताया कि आधुनिक जांचों के बाद पता चला कि तीन बेहद दुर्लभ जन्मजात समस्याएँ एक साथ मौजूद थीं, जो अब तक किसी एक बच्चे में साथ-साथ दर्ज नहीं की गई थीं। इनमें बच्चेदानी की बनावट में असामान्यता ( दो बच्चेदानी, दो योनियाँ ), मूत्र नलिकाओं का गलत स्थान पर खुलना और गुदा मार्ग से जुड़ी जन्मजात समस्या( गुदा मार्ग का योनि के बहुत नज़दीक होना) शामिल थीं।

डॉ. ईश्वर राम धायल के नेतृत्व में कदम-दर-कदम उपचार किया गया। पहले गुदा मार्ग से जुड़ी समस्या को चरणों में ठीक किया गया ताकि पेट की क्रिया सामान्य हो सके। इसके बाद अगले चरण में पेशाब पर नियंत्रण लाने के लिए आवश्यक सर्जरी की गई।

उन्होंने बताया कि इलाज के बाद किशोरी को पेशाब पर पूरा नियंत्रण मिल गया है, पेट की समस्या भी लगभग सामान्य हो चुकी है और उसकी जीवन-शैली में बड़ा सुधार आया है। घरवाले बेहद खुश हैं। डॉ धायल ने बताया कि “सही समय पर पहचान, टीमवर्क और चरणबद्ध इलाज से इतनी जटिल जन्मजात बीमारियों का भी सफल इलाज संभव है,” डॉ. धायल कहते हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता RMLIMS की विशेषज्ञता और बच्चों के प्रति समर्पित देखभाल का सशक्त उदाहरण है।

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