-आरजीएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के विद्या समारम्भ समारोह में होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ गिरीश गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित


सेहत टाइम्स
लखनऊ। होम्योपैथी की वैज्ञानिक प्रामाणिकता के साथ ही अनेक जटिल रोगों के सफल इलाज पर शोधों से राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च, लखनऊ के चीफ कन्सल्टेंट वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ गिरीश गुप्ता ने मेडिकल छात्रों को सीख देते हुए कहा है कि आप जिस पैथी की शिक्षा ग्रहण करें, उसे अपनी मां समझें, उस पर पूर्ण आत्मविश्वास रखें, गर्व करते हुए सफलताएं हासिल करें लेकिन सम्मान सभी चिकित्सा पद्धतियों का करें।
डॉ गिरीश ने ये विचार आज 29 नवम्बर को बख्शी का तालाब क्षेत्र स्थित आरजीएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित आयुर्वेद विद्या समारम्भ एवं शिष्योपनयन संस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दिये अपने भाषण में व्यक्त किये। अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने आरजीएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व अन्य अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज मेें आपने अपने छात्रों के विद्या समारम्भ कार्यक्रम में मुझ जैसे होम्योपैथिक विधा के चिकित्सक को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि हालांकि होम्योपैथिक और आयुर्वेद दोनों सरकार के बनाये हुए विभाग आयुष के अंग हैं, अगर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अन्य सिस्टम के साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे तो विश्व स्वास्थ्य संगठन का नारा हेल्थ फॉर ऑल को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दी गयी हेल्थ की परिभाषा में पहले सिर्फ भौतिक स्वास्थ्य शामिल था फिर मानसिक स्वास्थ्य जुड़ा, फिर सामाजिक स्वास्थ्य और अंत में आध्यात्मिक स्वास्थ्य जोड़ा गया।


उन्होंने कहा कि ऐलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के अतिरिक्त सभी चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ लाने के लिए आयुष विभाग का गठन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुआ तथा आयुष के लिए पृथक मंत्रालय बनाने का कार्य वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में केंद्र में आने के बाद हुआ। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के भारत में आने से पूर्व यहां सिर्फ आयुर्वेद पद्धति ही चलन में थी। अंग्रेजों ने ऐलोपैथी को भारत में फैला दिया, उन्होंने कहा कि मैं ऐलोपैथी के खिलाफ नहीं हूं लेकिन साथ ही मैं दूसरी पद्धतियों का सम्मान करता हूं। उन्होंने कहा कि दुर्घटना या दूसरी कोई इमरजेंसी होने पर, सर्जरी की नौबत आने पर ऐलोपैथी ही सबसे ज्यादा कारगर है। इसी प्रकार कुछ ऐसे रोग हैं जिनमें आयुर्वेद सर्वोत्तम है जबकि कुछ ऐसे रोग हैं जिनमें होम्योपैथिक से अच्छा इलाज और कहीं नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि आप जिस पैथी के विशेषज्ञ हैं, उसी पैथी की दवाओं को लिखें, दूसरी पैथी की दवाएं न लिखें, मिक्सोपैथी न करें, अपनी पैथी पर गर्व करते हुए शोध-अध्ययन से दवा की खोज करें, और दूसरों के सामने अपनी सफलता को साबित करके दिखायें। डॉ गिरीश ने कहा कि एक बात का ध्यान रखें कि यदि आपको लगता है कि मरीज का इलाज आपके पास नहीं है, तो उसे बिना किसी विलम्ब के दूसरी पैथी के डॉक्टर के पास जाने की सलाह दें, इससे लोगों के बीच जहां आपकी छवि अच्छी जायेगी वहीं उस मरीज को भी शीघ्र लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि 21वीं शताब्दी साक्ष्यों की है इसलिए मरीजोें का इलाज करते समय प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन करते हुए डायग्नोसिस से लेकर क्योर होने तक की जांच रिपोर्ट्स को रखें, जिससे मरीज के रोगमुक्त होने का साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेंगे।
डॉ गिरीश ने सभागार में उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं, और आशा करता हूं कि मरीजों के प्रति अपनी आयुर्वेदिक पैथी के साथ साथ एक और पैथी ‘सिम्पैथी’ का भी प्रयोग करेंगे जिससे मरीज दोगुनी तेजी से स्वस्थ होता है।
समारोह में भगवान धन्वन्तरि के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन, प्रार्थना के बाद डॉ गिरीश का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया, बाद में अंगवस्त्र से सम्मान किया गया। आरजीएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य डॉ अरुण कुमार पाणिग्रही ने अपने सम्बोधन में डॉ गिरीश गुप्ता को धन्यवाद के साथ उनका आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने चिकित्सीय अनुभव से जो छात्रों को सफलता के मंत्र दिये हैं, वे प्रशंसनीय हैं। उन्होंने कहा कि डॉ गिरीश का यह कथन कि अपनी पैैथी पर कायम रहो, यह गीता का भी उपदेश है जिसमें किसी भी परिस्थिति में धर्म का पालन करने की सीख दी गयी है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि डॉ गिरीश का भाषण हम सभी का पथ प्रदर्शन करेगा।
कार्यक्रम में कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ आरके मिश्रा ने कहा कि छात्रों को यह सीखने की जरूरत है कि आज जब डॉ गिरीश गुप्ता को दिखाने के लिए मरीज अन्य प्रदेशों यहां तक कि नेपाल से भी आते हैं, तो आखिर मरीजों में यह विश्वास कैसे पैदा हुआ, इस पर चिंतन करें, मरीजों और लोगों का यही विश्वास आपको भी पैदा करना है। समारोह में प्रो एसजी प्रसन्ना, डॉ राकेश गुप्ता सहित अनेक फैकल्टी उपस्थित रहे। समारोह का संचालन डॉ एसपी शांडिल्य ने किया। सभागार में बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने शालीनतापूर्वक बड़ी ही उत्सुकता और मनोयोग से वक्ताओं की बात सुनी और अच्छे वक्ततव्यों पर अपनी करतल ध्वनि से वातावरण में जोश भी भरा।

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