-श्वेत पत्र तैयार करने वाली टीम में डॉ सूर्यकांत भी शामिल, केजीएमयू के खाते में एक और उपलब्धि
-कोविड वायरस को संक्रमित मनुष्य की कोशिकाओं के अंदर जाने से रोकती है आइवरमेक्टिन

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। फाइलेरिया तथा अन्य कृमिजनित बीमारियों के उपचार में 40 वर्षों से भी ज्यादा समय से उपचार में प्रयोग में लायी जा रही आइवरमेक्टिन दवा के कोविड-19 के इलाज में अच्छे परिणामों को लेकर किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो सूर्यकांत सहित देश के अन्य नामचीन चिकित्सकों द्वारा तैयार किये गये श्वेत पत्र को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी वेबसाइट पर स्थान देते हुए प्रदर्शित किया है। यही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने तो कोविड-19 के मरीजों को उपचार तथा उनके परिजनों को बचाव के लिए देने पर दो माह पूर्व बाकायदा गाइड लाइन्स जारी कर दी हैं, ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश भारत का पहला राज्य हो गया है।

केजीएमयू के प्रो सूर्यकांत के श्वेत पत्र तैयार करने वाली टीम का हिस्सा रहने से केजीएमयू ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धियों में अपना नाम शामिल किया है। इस बारे में प्रो सूर्यकांत ने बताया कि यह दवा फाइलेरिया एवं रिवर ब्लाइन्डनेस जैसी बीमारियों में काफी कारगर साबित हुयी है। इसी कारण इस दवा की खोज करने वाले चिकित्सकों जापान के डा0 संतोषी ओमूरा तथा अमेरिका के डा0 विलियम सी0 कैम्पबेल को 2015 मे नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि आइवरमेक्टिन फाइलेरिया तथा अन्य कृमिजनित बीमारियों के अतिरिक्त कई वायरस जनित बीमारियों मे भी कारगर होती है। इस दवा का असर कोविड-19 वायरस के विरुद्ध प्रयोगशाला मे देखा गया साथ ही कई देशों में इसके प्रभाव से कोविड-19 बीमारी पर रोकथाम हुई एवं इससे होने वाली मृत्यु दर मे भी कमी आयी।
डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि आइवरमेक्टिन कई तरीकों से कोरोना वायरस पर असर करती है। यह वायरस को संक्रमित मनुष्य की कोशिकाओं के अंदर जाने से रोकती है साथ ही कोशिका के अंदर न्यूक्लीयस में भी जाने से रोकती है। इसके साथ ही कोरोना की प्रतिलिपियां बनाने की प्रक्रिया को भी रोकती है। साथ ही यह अन्य दवाओं जैसे डॉक्सीसाइक्लीन व हायड्रोक्सी क्लोरोक्यून के साथ मिलकर भी प्रभावी कार्य करती है। भारत सहित पूरी दुनिया में लगभग 40 क्लीनिकल ट्रायल इस दवा की कोविड-19 के उपचार एवं बचाव में असर को लेकर चल रहे हैं।
ज्ञात हो इस दवा के इन प्रभावों एवं उपयोग को ध्यान मे रखते हुए डॉ सूर्यकान्त एवं देश के अन्य विषेषज्ञों डॉ वी0के0 अरोरा (दिल्ली), डॉ दिगम्बर बेहरा (चंडीगढ़), डॉ अगम बोरा (मुम्बई), डॉ टी0 मोहन कुमार (कोइम्बटूर), डा0 नारायणा प्रदीप (केरल) आदि द्वारा आइवरमेक्टिन पर एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) प्रकाशित किया गया। इस श्वेत पत्र का अब तक 100 से अधिक देशों के चिकित्सक एवं वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है व इसमें वर्णित जानकारी से लाभान्वित हुये हैं। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया है। यह के0जी0एम0यू0, उ0प्र0 एवं देश के लिये गौरव की बात है।
डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा 6 अगस्त को आइवरमेक्टिन को कोविड-19 के बचाव एवं उपचार के सम्बन्ध मे एक शासनादेश पारित किया जा चुका है। देश में उत्तर प्रदेश ऐसा करने वाला प्रथम राज्य बन गया है। डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि इस शासनादेश के अनुसार कोविड-19 के लक्षण रहित एवं माइल्ड तथा मॉडरेट रोगियों के उपचार तथा रोगियो के परिजनों एवं कोविड-19 के उपचार मे शामिल चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के बचाव के लिए आइवरमेक्टिन उपयोग में लायी जाती है। यह बहुत सुरक्षित दवा है। केवल गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं एवं दो वर्ष से छोटे बच्चों मे इसका प्रयोग नहीं किया जाता है।

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