Thursday , July 28 2022

85 फीसदी मरीज जानते ही नहीं कि उन्‍हें हीमोफीलिया की शिकायत

हीमोफीलिया के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्‍यकता

 

लखनऊ। हीमोफीलिया फेडरेशन (इंडिया) की शाखा हीमोफीलिया सोसायटी (लखनऊ) ने आज उत्तर प्रदेश के नागरिकों से रक्तस्राव से जुड़ी जानलेवा बीमारी हीमोफीलिया के बारे में जन जागरूकता लाने की अपील की। इस जन जागरूकता की मदद से मरीजों की पहचान और उनका उपचार संभव होगा। उत्तर प्रदेश के लोगों में इस दुर्लभ बीमारी की जानकारी बहुत कम है और यहां ज्यादातर चिकित्सा केंद्रों में हीमाफीलिया की जांच के लिए पर्याप्त सुविधा भी नहीं है।

 

उत्तर प्रदेश में अब तक हीमोफीलिया के केवल 2,650 मरीजों की पहचान हुई है, जो कि राज्य के कुल अनुमानित हीमोफीलिया के मरीजों की संख्या के महज 15 प्रतिशत के बराबर है। इस समय उत्तर प्रदेश में 26 चिकित्सा केंद्रों में उच्च गुणवत्ता वाली फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। जन जागरूकता के जरिये ज्यादा से ज्यादा हीमोफीलिया के मरीजों तक फैक्टर रिप्लेसमेंट, मॉनिटरिंग और फिजियोथेरेपी की पहुंच होगी और वे बेहतर व दर्दमुक्त जीवन जी सकेंगे।

 

लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी विभाग में हीमोफीलिया की जांच की सुविधा है, वहीं संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआईएमएस) के हेमेटोलॉजी विभाग में इसकी सुविधा उपलब्ध है। लखनऊ के बाहर लोग बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में भी इस जांच सुविधा का प्रयोग कर सकते हैं। वर्ल्‍ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया के मुताबिक, हर 10,000 में से 1 व्यक्ति हीमोफीलिया के साथ जन्म लेता है। इसलिए अनुमानित तौर पर भारत में करीब एक लाख लोग हीमोफीलिया के शिकार हैं।

 

हीमोफीलिया सोसायटी (लखनऊ) के सचिव विनय मनचंदा के अनुसार, “हम हीमोफीलिया के मरीजों और उनके परिजनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और उन्हें पर्याप्त उपचार मुहैया करा रहे हैं। हमारा अनुभव कहता है कि फैक्टर रिप्लेसमेंट, बेहतर मॉनिटरिंग और अच्छी फीजियोथेरेपी के जरिये हीमोफीलिया के सभी मरीज अच्छी और दर्दमुक्त जीवन जी सकते हैं। लोगों को रक्त से जुड़ी इस अनियमितता के बारे में बताना जरूरी है, ताकि अगर चोट के बाद जोड़ों में सूजन या ज्यादा रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखें तो परिजन तत्काल जांच के लिए आगे आएं।“

 

विनय मनचंदा ने आगे कहा, “इस जानलेवा बीमारी से लड़ने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है हीमोफीलिया के बारे में जागरूक होना और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध उपचार तक पहुंचना। हम सरकार से अपील करते हैं कि राज्य के दूरदराज के इलाकों में हीमोफीलिया के उपचार के लिए और भी केंद्र खोले जाएं जिससे ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक तत्काल जांच और उपचार की सुविधा पहुंचाई जा सके। मैं लोगों से भी अपील करता हूं कि रक्तस्राव से जुड़ी इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाएं ताकि हीमोफीलिया से जुड़े ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहचान हो सके और हम उन्हें पर्याप्त उपचार दे सकें।“