
लखनऊ। गर्मी के मौसम में अक्सर खबरें आती हैं कि अमुक गांव एवं शहर में खाना खाने से लोग बीमार हो गये। क्यों होते हैं लोग खाना खाने से बीमार? होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ अनुरुद्ध कुमार वर्मा ने बताया कि गर्मी के मौसम में कटे-सड़े एवं खुले फलों, कीड़े वाली सब्जियों, खुले में रखे भोजन, ढाबे एवं सडक़ों के किनारे के खाने एवं बासी खाने में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं तथा भोजन में उपलब्ध कुछ रासायनिक तत्व भी भोजन को दूषित कर देते हैं, यही दूषित भोजन जब हम प्रयोग करते हैं तो पेट में दर्द, पेट में ऐठन, उल्टियां, दस्त जैसी गम्भीर समस्यायें उत्पन्न होती है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है। चिकित्सकों की भाषा में इसे फूड प्वॉइजनिंग अथवा भोजन विषाक्तता कहा जाता है। फूड प्वाइजनिंग जन स्वास्थ्य के लिए गम्भीर खतरा है।
आखिर क्या है फूड प्वॉइजनिंग
डॉ वर्मा ने बताया कि फूड प्वॉइजनिंग भोजन मे साफ-सफाई के अभाव, गंदगी, बासी खाना, साफ हाथों से खाना न परोसने के कारण उत्पन्न होने वाले संक्रमणों के कारण होता है। अक्सर बस स्टेशनों , रेलवे स्टेशनों अथवा होटलों में बासी खाना परोस दिया जाता है या भोजन के साथ पिया जाने वाला पानी अशुद्ध होता है। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में आप फलों, गन्ने का रस, कोल्ड ड्रिंक, जूस और बाहर के चटपटे भोजन में ऐसे उलझ जाते हैं तथा यह नहीं समझ पातें हैं कि हम जो खा-पी रहे हैं वह किस पानी से कब बना था। यही अशुद्ध खाना-पीना आप को बीमार करने के लिये पर्याप्त है।
फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण
डॉ. वर्मा ने बताया कि दूषित खाने-पीने से शरीर में अनेक लक्षण उत्पन्न होते हैं उनमें दस्त या डायरिया हो सकता है, दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है जो घातक हो सकती है। इसके अतिरिक्त उल्टी, बुखार, दस्त में खून आना, पेट दर्द या पेट में ऐठन, सुस्ती या ज्यादा नींद आना प्रमुख हैं।
फूड प्वॉइजनिंग से बचने के लिये क्या करें
डॉ वर्मा ने बताया कि फूड प्वॉइजनिंग से बचने के लिए लोगों को चाहिये कि वे ऐसी जगह पर भोजन करें जो साफ सुथरी हो। इसके अतिरिक्त खाने से पहले हाथ अवश्य धोयें। उन्होंने बताया कि गर्म व ताजा पकाया गया भोजन सर्वाेत्तम होता है बजाए कि ठंडा या काफी देर से बना हुआ खाना। उन्होंने बताया कि इसी तरह खाने से पहले फलों और सब्जियों को भली प्रकार से धों लें। इसके अलावा पानी को उबाल कर पियें। अगर डायरिया या उल्टी जैसी फीलिंग महसूस कर रहें हों तो आपकों तुरन्त खूब सारा पानी पीना चाहिये। डायरिया में नमक-चीनी का घोल थोड़ी-थोड़ी देर पर पीतें रहें। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है।
क्या न करें
डॉ अनुरुद्ध वर्मा ने सलाह दी कि लोगों को चाहिये कि चाय, कॉफी, सिगरेट, डेयरी में बने उत्पाद, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक आदि का प्रयोग बिल्कुल न करें। तला हुआ भोजन न करें। इस दौरान ज्यादा शारीरिक श्रम न करें। उन्होंने बताया कि अगर फूड प्वाइजनिंग के लक्षण दिखें तो तत्काल अपने चिकित्सक से सलाह लें।
सम्भव है फूड प्वॉइजनिंग के कारण उत्पन्न होने वाली परेशानियों का निराकरण
डॉ वर्मा ने बताया कि फूड प्वॉइजनिंग से बचाव के लिए आवश्यक है कि खाने-पीने में पूर्ण सावधानी बरती जाये क्योंकि उपचार से ज्यादा जरूरी है सर्तकता। उन्होंने कहा कि फिर भी अगर व्यक्ति फूड प्वॉइजनिंग का शिकार हो जाये तो होम्योपैथिक औषधियों द्वारा फूड प्वॉइजनिंग के कारण होने वाली परेशानियों का निराकरण किया जा सकता है। यदि स्थिति गम्भीर हो तो तत्काल चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिये। फूड प्वॉइजनिंग के उपचार मेें आर्सोनिक, पोडोफाइलम, मार्कसॉल, वेरेट्रम एल्बम, इपिकाक, एलेस्टोनिया, कैम्फर, चाइना आदि औषधियों का प्रयोग लक्षणों के आधार पर किया जाना चाहिये। होम्योपैथिक दवाइयां प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह से लेनी चाहिये।
