थायरोप्लास्टी से वापस आ गयी युवती की आवाज

वर्कशॉप में भाग लेने आये चिकित्सक व अन्य

लखनऊ। कुछ समय पहले उस युवती की थायरायड सर्जरी हुई थी, इस सर्जरी के कॉम्प्लीकेशन के फलस्वरूप युवती की आवाज अचानक बदल गयी, यानी उसके स्वर यंत्र के परदे को पैरालिसिस हो गया और युवती होर्सनेस ऑफ वॉयस का शिकार हो गयी। ऐसे में उसकी मूल आवाज को वापस लाने का काम किया ईएनटी सर्जन डॉ राकेश श्रीवास्तव ने। यहां सुश्रुत इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक सर्जरी एंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में युवती का आज ऑपरेशन कर उसकी मूल आवाज वापस आ गयी।

पत्रकारों को जानकारी देते डॉक्टर एससी श्रीवास्तव और डॉक्टर राकेश श्रीवास्तव

सिप्स हॉस्पिटल में किये गये कई ऑपरेशन

एसोसिएशन ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया एओआई की लखनऊ शाखा ने अपने स्थापना दिवस पर एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया। इसमें कई जटिल सर्जरीज सिप्स हॉस्पिटल में की गयीं। इन सर्जरीज के बारे में जानकारी यहां  एओआई लखनऊ शाखा के अध्यक्ष डॉ एससी श्रीवास्तव व सचिव डॉ राकेश श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से दी। अपनी ओरिजनल आवाज खो चुकी युवती की सर्जरी करने वाले डॉ राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि 20 वर्षीया युवती की आवाज को ठीक करने के लिए थायरोप्लास्टी की गयी। इस बीमारी के बारे में उन्होंने बताया कि इंजरी और बुखार आदि से होर्सनेस ऑफ वायस की शिकायत हो जाती है इस बीमारी में स्वर यंत्र के दोनों परदे जो बोलते समय एक साथ खुलते और बंद होते हैं, उनमें एक परदा पूरी तरह वह बंद होने की स्थिति में भी पूरी तरह से बंद नहीं हो पाता है नतीजतन उसमें से हवा निकल जाती है। जिससे आवाज में भारी पन आ जाता है। इस दिक्कत की चिकित्सा के लिए थायरोप्लास्टी करके प्रभावित परदे को स्वस्थ परदे के नजदीक ले आया जाता है जिससे दोनों परदे आपस में एक साथ बंद होने और खुलने लगते हैं।

कान में सर्जरी से पिस्टन लगा कर वापस ला दी सुनने की क्षमता

कान से कम सुनने की शिकायत वाले 28 वषीय युवक दीपचंद की माइक्रोसर्जरी सर गंगाराम हॉस्पिटल नयी दिल्ली से आये डॉ आलोक अग्रवाल ने की। इसकी जानकारी देते हुए डॉ एससी श्रीवास्तव ने बताया कि ओटोस्क्लोरोसिस नामक बीमारी में कान की तीसरी हड्डी जाम हो जाती है जिससे मरीज को कम सुनायी पड़ता है, इसे ठीक करने के लिए स्टैपिडेक्टोमी कर पिस्टन लगा दिया जाता है।
इंडोस्कोपिक डीसीआर से बंद कर दिया आंसुओं का बहना
इसी प्रकार अंजुमनिशा नाम की महिला की इंडोस्कोपिक डाक्रियो सिस्टो राइनोस्टॉमी सर्जरी डॉ राकेश श्रीवास्तव ने की। इस महिला की लेकराइमल डक्ट जो कि नाक और आंख के बीच होती है, ब्लॉक हो गयी थी, नतीजतन इसकी आंख से आंसू बहते रहते थे। यह सर्जरी नाक के रास्ते की गयी। इस बीमारी के कारण के बारे में उन्होंने बताया कि यह रोग संक्रमण के चलते भी हो सकता है और पैदाइशी भी हो सकता है।