टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय

प्रो सूर्यकांत

लखनऊ। भारत विश्व में टीबी रोग से सबसे अधिक प्रभावित देश हैं विश्व में टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय हैं। भारत में 28 लाख लोग टीबी से पीडि़त हैं, 2015 में विश्व में टीबी  से कुल 14 लाख मौतें हुईं जिसमें से 80 हजार भारतीय शामिल थे।

50 वर्षों से प्रयास हो रहे फिर भी समस्या गम्भीर

यह जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के हेड प्रो सूर्यकांत ने देते हुए बताया कि भारत में टीबी यानी क्षय रोग को नियन्त्रित करने के लिए पिछले लगभग 50 वर्षों से लगातार प्रयास किये जा रहे हैं फिर भी यह गम्भीर समस्या बनी हुई हैं।
विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर आज केजीएमयू लखनऊ मे रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के संयुक्त तत्वावधान के रोगी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा परिसर मे क्षय रोग के मरीजो की जांच एवं चिकित्सकीय उपचार की सलाह दी गई। इस अवसर पर डॉ.सूर्यकान्त विभागाध्यक्ष , डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ.आनन्द श्रीवास्तव ,डॉ. दर्शन कुमार बजाज ,डॉ.अम्बरीश, डॉ.अनुभूति व समस्त जूनियर डॉक्टर उपस्थित रहे। प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि 24 मार्च 1882 में टीबी के जीवाणु की खोज रॉबर्ट कॉच ने की। इस खोज की याद में हर साल 24 मार्च को हम विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाते हैं। 2015 में सम्पूर्ण विश्व में 1.04 करोड टीबी के नये मरीज पाये गयें जिसमें 59 लाख पुरूष 35 लाख महिलायें और 10 लाख बच्चे थें। टीबी का संक्रमण मरीजों के खांसने, बलगम से हवा के जरिये दूसरों तक फैलता है।

भारत में हर तीन मिनट में टीबी से दो मौतें

भारत में हर 3 मिनट में टीबी से 2 मौतें होती हैं, टीबी के कुल मामलों में 85 फीसदी लोगो में फेफड़े की टीबी होती हैं। 15 फीसदी मरीज एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी से पीडि़त हैं। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, बलगम में खून का आना, भूख न लगना वजन कम होना व रात में पसीना आना इत्यादि टीबी के प्रारम्भिक लक्षण होते हैं। उन्होंने सलाह दी कि टीबी से बचाव के लिए पौष्टिक आहार लें, शुद्ध हवा लें, धूप में बैठें, भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें।

इन लोगों को है ज्यादा खतरा

कुपोषण, एचआईवी, मधुमेह, महिलाओं में कम उम्र में गर्भ धारण, बार-बार गर्भ धारण, भीड़, धूम्रपान तथा अन्य नशा साफ-सफाई की कमी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ न ले पाना जैसे मरीजों में टीबी की सम्भावना बढ़ जाती है। उन्होंनें बताया कि टीबी का उपचार डॉट्स के मध्यम से मुफ्त में सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध है।

2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने में प्रभावी कदम उठाये जायेंगे

लखनऊ। प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करेगी, ताकि सभी को सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें। अंतर्राष्ट्रीय क्षय दिवस के मौके पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक भारत को क्षयमुक्त बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार प्रभावी कदम उठाएगी, जिससे प्रदेश से एमडीआर/टीबी रोग को समाप्त किया जा सके। उन्होंने इस कार्य में प्रदेशवासियों से पूर्ण सहयोग की अपील करते हुए कहा कि टीबी अब लाइलाज रोग नहीं रहा है, फिर भी लोग अभी इससे ग्रस्त हैं।

निजी चिकित्सालयों को भी टीबी रोगियों का पंजीकरण करना अनिवार्य

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि निजी चिकित्सालयों की भी भूमिका टीबी रोग निवारण में महत्वपूर्ण है, इसलिए इनकी सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में टीबी रोग से ग्रसित लोगों का निजी चिकित्सालय में पंजीकरण नहीं किया जाता है, इससे वास्तविक टीबी मरीजों की संख्या स्पष्ट नहीं होती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के तहत अब राज्य में निजी चिकित्सालयों को भी टीबी रोगियों के पंजीकरण करना अनिवार्य है। उन्होंने चिकित्सकों और कर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि चिकित्सालय में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही मरीजों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए, क्योंकि अधिकांश बीमारियां गंदगी से ही फैलती हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने आज यहां राजाजीपुरम् स्थित रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में अन्तर्राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन दिवस पर टीबी रोगियों को दवा खिलाई। इसके बाद उन्होंने चिकित्सालय का निरीक्षण भी किया। उन्होंने रसोईघर, डायरिया वार्ड, जच्चा-बच्चा वार्ड, औषधि भण्डार गृह सहित सम्पूर्ण चिकित्सालय का गहन निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए भी दिए। उन्होंने चिकित्सालय में वेस्टेज का नियमित रूप से निस्तारण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वेस्टेज के निस्तारण से अस्पताल जहां स्वच्छ रहेगा, वहीं संक्रामक रोग फैलने की भी आशंका नहीं रहेगी। उन्होंने मरीजों से मुलाकात करके, अस्पताल में मिल रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में भी जानकारी हासिल की।
श्री सिंह ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि अस्पताल में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों के बैठने का भी उचित प्रबंध सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पद्माकर सिंह को निर्देश दिए कि अस्पतालों में जो कमियां हैं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए और चिकित्सा व्यवस्था में आवश्यक सुधार लाकर इससे प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है कि मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं सभी चिकित्सालयों में सुगमता से उपलब्ध हों।  इस मौके पर सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य बी. हेकाली झिमोमी, अपर निदेशक सहित अन्य चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और चिकित्सक मौजूद थे।