चिकित्सकों को आशा, होम्योपैथी के ‘अच्छे दिन’ आयेंगे

डॉ अनुरुद्ध वर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के होम्योपैथिक चिकित्सकों ने आशा व्यक्त की है कि वर्तमान सरकार में प्रदेश में होम्योपैथी को सर्वांगीण विकास के पर्याप्त अवसर प्राप्त होंगे और राज्य में होम्योपैथी के भी अच्छे दिन आयेंगे। केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के वरिष्ठ सदस्य एवं रिसर्च सोयाइटी ऑफ होम्योपैथी के सचिव डॉ. अनुरुद्ध वर्मा ने मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रियों को प्रेषित पत्र में कहा है कि प्रदेश में प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों में होम्योपैथी सबसे सरल, सुलभ, दुष्परिणाम रहित एवं अपेक्षाकृत कम खर्चीली पद्धति है। जिसके माध्यम से कम खर्च एवं कम संसाधनों में प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य की सुविधायें आसानी से उपलब्ध करायी जा सकती है, इसलिये होम्योपैथी पद्धति को केन्द्रित कर स्वास्थ्य की नीतियां बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा है कि पिछले सात वर्ष प्रदेश में होम्योपैथी के विकास के लिए बहुत अच्छे नहीं थे।

योगी सरकार को लिखा पत्र, कई बिन्दुओं पर ध्यान आकृष्ट कराया

उन्होंने प्रदेश के समस्त राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों को भवन, शिक्षक, अस्पताल, प्रयोगशाला, गैरशिक्षक कर्मचारियों, एम्बुलेन्स एवं अन्य संसाधनों को केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के मानकों पर सुसज्जित किये जाने, समस्त राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों एवं राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालयों को विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से किये जाने, प्रदेश के राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालयों में रिक्त चिकित्साधिकारियों, फार्मासिस्टों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों को भरा जाना चाहिए तथा समस्त चिकित्सालयों को मूलभूत सुविधायें जैसे-भवन, बिजली, पानी, शौचालय आदि की सुविधा उपलब्ध कराये जाने, नवनिर्मित अलीगढ़ एवं गोरखपुर के राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों जिनके भवन तैयार हो चुके है, में शिक्षक एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराकर बीएचएमएस की पढ़ाई प्रारम्भ किये जाने, प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों एवं पीएचसी स्तर पर सुसज्जित होम्योपैथी चिकित्सालयेां की स्थापना की जानी चाहिए तथा समस्त निगमों, पुलिस, पीएसी, कारागार एवं अन्य अर्धसरकारी विभागों में होम्योपैथी चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए तथा चिकित्सों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा है कि नवागत होम्योपैथी चिकित्सकों को क्लीनिक/चिकित्सालय स्थापित करने के लिए आसान शर्तों पर अनुदान/ऋण दिये जाने की व्यवस्था किये जाने, होम्योपैथी छात्रों का इन्टर्नशिप भत्ता बीस हजार रुपये प्रतिमाह किये जाने, संक्रामक रोगों के बचाव में होम्योपैथी की कार्यकारिता को देखते हुए योजना बनाकर क्रियान्वयन किये जाने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारियों को राष्ट्रीय आयुष मिशन में स्थानान्तरित कर उन्हें ऐलोपैथी के बराबर वेतन भत्ते अन्य सुविधायें प्रदान की जानी चाहिए तथा उन्हें नियमित किया जाना चाहिए एवं उन्हें होम्योपैथी औषधियां उपलब्ध कराये जाने, राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों एवं राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालयों में कार्यरत चिकित्साधिकारियों को एलोपैथी के बराबर वेतन भत्ते, प्रोन्नति, प्रैक्टिस निषेध वेतन आदि सुविधायें प्रदान किये जाने, जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी कार्यालय में स्टाफ जैसे-एकाउन्टेन्ट, क्लर्क, चतुर्थ श्रेणी आदि की व्यवस्था किये जाने, निजी चिकित्सकों का जीवन बीमा किये जाने, एसजीपीजीआई में होम्योपैथी विभाग खोलने, होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार के लिए होम्योपैथी स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो की स्थापना किये जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने पत्र में उम्मीद जतायी है कि सरकार प्रदेश में होम्योपैथी को विकास के पर्याप्त प्रदान कर होम्योपैथी को प्रथम पंक्ति की चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करेगी।