आपके ब्यूटी प्रोडक्ट्स ब्रेस्ट कैंसर तो नहीं दे रहे?

प्रो विनोद जैन

लखनऊ।  शृंगार और महिलाओं का आपस में गहरा सम्बन्ध है, शृंगार करने के लिए प्रकृति ने हमें अनेक वस्तुएं दी हैं लेकिन बहुतायत देखा यह जाता है कि बाजार में मिलने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल महिलाएं करती हैं, कॉस्मेटिक चीजों का बाजार इतना बड़ा है कि इसमें अनेक वे कम्पनियां भी आ गयी हैं जो सुंदर बनाने के नाम पर जो चीजें बेचती हैं उनका निर्माण ऐसे-ऐसे केमिकल्स से किया जाता है कि जो तात्कालिक खूबसूरती तो दिखाते हैं लेकिन उनका शरीर के हार्मोन्स पर ऐसा असर पड़ता है कि महिलाओं में स्तन के रोग पैदा कर देता है तथा स्तन कैंसर भी हो जाता है।

प्रोडक्ट्स में रासायनिक तत्वों का इस्तेमाल है खतरनाक

यह महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू के सर्जन प्रो विनोद जैन ने बताया कि शोध द्वारा यह ज्ञात हुआ है कि सौन्दर्य प्रसाधनों में पाये जाने वाले रासायनिक तत्व स्तन कैंसर तक पैदा कर देते हैं। उन्होंने बताया कि पैराबेन और थैलेट्स समूह के केमिकल का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने में किया जाता है। इनमें पैराबेन समूह में मेथाइल पैराबेन, प्रोपाइल पैराबेन तत्वों का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधनों के संरक्षण यानी प्रिजर्वेशन के लिए किया जाता है जिससे कि उन्हें अधिक समय तक उपयोग में लाया जा सके। उन्होंने बताया कि मॉस्चराइजर, बालों की क्रीम, बालों के कंडीशनर तथा जेल में पैराबेन युक्त तत्वों का प्रयोग होता है। कुछ कम्पनियों के डियोडोरेन्ट में भी यह प्रयोग में लाया जाता है। ये तत्व कमजोर इस्ट्रोजेन हॉरमोन की भांति कार्य करते हैं, त्वचा से इनका अवशोषण होता है तथा इस्ट्रोजेन रिसेप्टर पॉजिटिव स्त्रियों में ये कैंसर की वृद्धि कर सकते हैं।

हार्मोन्स का संतुलन बिगाड़ देते हैं ये केमिकल्स

प्रो जैन ने बताया कि इसी प्रकार थैलेट्स समूह के पदार्थों का प्रयोग नेल पॉलिश में रंग देने तथा नाखून को टूटने से बचाने के लिए किया जाता है। बालों के स्प्रे में भी यह प्रयुक्त होता है ये तत्व इस्ट्रोजेन हॉरमोन के संतुलन को बिगाड़ते हैं, शोध के अनुसार इनके अधिक प्रयोग से कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इन पदार्थों के अलावा  ट्राइक्लोसान रसायन का प्रयोग जीवाणु रोधी साबुन, डियोडोरेन्ट एवं टूथपेस्ट में इनका प्रयोग होता है, यह भी शरीर में हॉरमोन के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं तथा स्तन के विकास में बाधक हो सकते हैं। प्रो जैन ने बताया कि इसी प्रकार तारकोल का प्रयोग कुछ सौन्दर्य प्रसाधनों में किया जाता है तारकोल में पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रो कार्बन पाया जाता है, इसके प्रयोग से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
प्रो जैन ने बताया कि लेड भी एक धातु तत्व है जिसका प्रयोग लिपस्टिक, नेल पॉलिश, सनस्क्रीन क्रीम तथा दांत सफेद करने वाले टूथपेस्ट में किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसका अधिक प्रयोग से मानसिक शक्ति तो कम होती ही है, साथ ही बालिकाएं देर से किशोरावस्था को प्राप्त करती हैं। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार एल्यूमीनियम तथा कैडमियम तत्व बगल के पसीने को रोकने वाले स्प्रे में पाये जाते हैं, ये इस्ट्रोजेन हॉरमोन की तरह व्यवहार करते हैं तथा कोशिका के डीएनए को नष्टï करते हैं। उन्होंने बताया कि शोध में अपुष्टï रूप से यह पता चलता है कि इनके अधिक एवं लगातार प्रयोग से कैंसर हो सकता है। अभी इस मत में विरोधाभास है।

सस्ते और घटिया सौंदर्य प्रसाधनों से बचें

जब प्रो जैन से पूछा गया कि इससे बचने के लिए क्या करना चाहिये तो उन्होंने कहा कि यह एक कठिन प्रश्न है फिर भी मेरी राय में आप सौंदर्य प्रसाधन का प्रयोग कम करें, नैसर्गिक सौंदर्य प्रसाधन स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि सौंदर्य प्रसाधन का चुनाव करते समय यह अवश्य ध्यान रखेें कि वे किसी अच्छी कम्पनी के हों, सस्ते और घटिया प्रसाधनों से बचें। स्तन कैंसर के रोगी को विशेष रूप से इन बातों को ध्यान में रखना चाहिये।