…जब युवराज को मिला मेडल फेंक दिया था पिता योगराज ने

युवराज सिंह ने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा

युवराज के पिता योगराज बोले, मुझे अपने बेटे पर फक्र

…और वह घड़ी भी आ गयी जब भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। जैसा कि प्रेस कॉन्‍फ्रेंस बुलाये जाने के बाद से अनुमान लगाया जा रहा था कि युची अपने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने की घोषणा कर सकते हैं, वही हुआ भी, भारी मन से इस बड़े क्रिकेटर ने क्रिकेट से संन्‍यास लेने का ऐलान कर दिया।

 

युवी को फौलाद की तरह मजबूत बनाने के लिए कठोर बने उनके पिता क्रिकेटर योगराज भी आज अपने बेटे पर नाज करते हुए भावुक हो गये और यह कहने से गुरेज नहीं किया कि उनके बेटे ने उनकी बात रखने के लिए क्रिकेट की दुनिया को अपना कॅरियर बना लिया जबकि युवी को धूप में खेलना बिल्‍कुल भी पसंद नहीं था। उन्‍होंने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए भी जो युवराज ने जीवटता दिखायी है, वह वाकई मुझे गौरवान्वित करती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार युवराज के पिता योगराज ने कहा कि मुझे अपने बेटे पर फक्र है कि उसने मेरी जिद के लिए सारे दुख सहते हुए भी क्रिकेट को जारी रखा। बताया जा रहा है कि युवराज अगर मौजूदा वर्ल्‍ड कप 2019 में खेलते तो भी उनके पिता वर्ल्‍ड कप के बाद संन्‍यास दिला देते लेकिन चूंकि वर्ल्‍ड कप के लिए उन्‍हें नहीं चुना गया तो उन्‍होंने युवी को अभी संन्‍यास लेने को कह दिया। यही नहीं खुद युवराज भी इसी निर्णय पर पहुंचे थे।

 

बताते हैं कि युवराज सिंह को शुरुआती दिनों में क्रिकेट में बिल्कुल रुचि नहीं थी, उनको बचपन में स्केटिंग और टेनिस का शौक था और इन दोनों खेलों में वह काफी अच्छे भी थे, युवराज ने अंडर-14 रोलर स्केटिंग चैंपियनशीप का खिताब भी जीता, इन मेडल को जब उन्होंने अपने पिता योगराज सिंह को दिखाया तो योगराज ने मेडल को फेंक दिया और सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। क्रिकेटर पिता की संतान युवराज को पिता की जिद की वजह से धूप में क्रिकेटर बनने के लिए अभ्यास करना पड़ता था।

युवराज के पिता योगराज सिंह युवी को सीमेंट की विकेट पर घंटों बल्लेबाजी कराते थे, जिसका नतीजा था कि युवराज सिंह के पास गेंद खेलने के लिए काफी वक्त होता। डीएवी स्कूल चंडीगढ़ में पढ़ाई करने वाले युवराज सिंह को रोजाना स्कूल के अलावा ना चाहते हुए भी घंटों क्रिकेट की प्रेक्टिस करनी पड़ती थी। उन्होंने 1997-98 में उड़ीसा के खिलाफ अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच खेला। हालांकि इस मैच में युवराज कोई रन नहीं बना सके। इसके बाद युवराज को असली पहचान मिली अंडर-19 विश्व कप 2000 में जब उनको शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। अंडर 19 विश्व कप में 2000 में शानदार प्रदर्शन करने वाले युवराज सिंह को नैरोबी में चल रहे आईसीसी नॉक आउट टूर्नामेंट के लिए भारतीय टीम में चुन लिया गया था।