…तो एमबीबीएस करने में माथापच्‍ची क्‍यों करेगा छात्र

-आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों को सर्जरी करने की अनुमति के खिलाफ दो घंटे का सांकेतिक विरोध जताया आईएमए ने

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों को प्रशिक्षण के बाद सर्जरी करने का अधिकार देने वाली केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ आईएमए ने आज दो घंटे का कार्य बहिष्‍कार करके विरोध जताया। आईएमए की नेशनल बॉडी के आह्वान पर किये गये शांतिपूर्वक विरोध के तहत चिकित्‍सकों ने शहीद स्‍मारक पर पोस्‍टर के साथ कोविड नियमों का पालन करते हुए विरोध जताया। इससे पहले ये चिकित्‍सक रिवर बैंक कॉलोनी स्थित आईएमए भवन पर इकट्ठा हुए। यहां पर एक प्रेस वार्ता को भी सम्‍बोधित किया गया।

अध्‍यक्ष डॉ रमा श्रीवास्‍तव, आईएमए महिला विंग की अध्‍यक्ष डॉ रुखसाना खान व सचिव डॉ जेडी रावत द्वारा जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए कहा गया है कि‍ काउंसिल फॉर इंडियन मेडिसिन द्वारा जारी अधिसूचना का आई एम ए विरोध कर रही है, उन्होंने बताया कि मिक्सोपैथी के कारण हजारों मरीजों की जान को खतरा हो सकता है जिससे लोगों के मन में मेडिकल प्रोफेशन मे प्रति विश्वास तो घटेगा ही और साथ ही देश की चिकित्सा की गुणवत्ता पर काफी बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि यदि आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सर्जरी की इजाजत मिलने लगेगी तो आने वाली पीढ़ि‍यां एमबीबीएस जैसे जटिल कोर्स को करने से बचेंगी।

आई एम ए लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष डॉ पी के गुप्ता ने कहा कि आयुर्वेदिक एवं अन्य आयुष चिकित्सकों को कुछ सर्जरी यानी शल्य चिकित्सा करने की इजाजत दी गई है, जो कि उचित नहीं है। आयुष और एलोपैथिक मेडिसिन दोनों अपने आप में अलग-अलग विधाएं हैं और दोनों में किसी भी तरीके की मिक्सो पैथी करने के परिणाम घातक होंगे। उन्‍होंने कहा कि हम आयुष के खिलाफ नहीं हैं, इसे मॉडर्न पद्धति के साथ मिलाने के खिलाफ हैं।

आई एम ए लखनऊ के निर्वाचित अध्यक्ष डा0 मनीष टंडन ने भी इस मौके पर कहा कि सरकार को जल्द से जल्द अधिसूचना वापस लेनी होगी नहीं तो आई एम ए और उससे जुड़े हुए लाखों चिकित्सक देशभर में अपने-अपने स्थानों पर इसका विरोध करते रहेंगे।

विज्ञप्ति के अनुसार प्रेस वार्ता में आई एम ए लखनऊ की अध्यक्ष डॉ रमा श्रीवास्तव, डॉ मनोज अस्थाना, आईएमए वूमन्स विंग की डॉ रुखसाना खान, निवर्तमान अध्‍यक्ष आईएमए लखनऊ डॉ जीपी सिंह, डॉ राकेश श्रीवास्‍तव, डॉ नीरज टंडन, आईएमए नर्सिंग होम विंग के अध्यक्ष डॉ अनूप अग्रवाल, डॉ प्रांजल अग्रवाल समेत अनेक चिकित्सक मौजूद रहे। उन्‍होंने कहा कि सभी चिकित्‍सकों ने काला फीता बांध कर पूरा दिन काम किया।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मेडिकल शिक्षा में खिचड़ी तंत्र लाने का पूर्ण विरोध करती है तथा सरकार से अनुरोध करती है कि इस प्रकार की शिक्षा से चिकित्सकों की गुणवत्ता काफी कम हो जायेगी। उन्‍होंने बताया कि आज के सांकेतिक आंदोलन के बाद अब 11 दिसम्‍बर से इमरजेंसी एवं कोविड सेवाओं को छोड़कर बाकी स्‍वास्‍थ्‍य सेवायें बंद रखी जायेंगी। विज्ञप्ति के अनुसार ये सभी कदम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाये गये हैं।