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37 दिनों तक वेंटीलेटर पर रहने के दौरान दो बार बंद हुईं थीं दिल की धड़कनें

मरीज की हिम्‍मत, केजीएमयू के आरआईसीयू के डॉक्‍टरों के जज्‍बे ने दी 71 वर्षीय बुजुर्ग को नयी जिन्‍दगी

निमोनिया युक्त फेफड़ा, ब्लीडिंग से ट्रैकिया में थे तीन बड़े अवरोध, उल्टी भर गई थी फेफड़े में

लखनऊ। केजीएमयू में रेस्‍पाइरेटरी क्रिटिकल केयर यूनिट (आरआईसीयू)के विभागाध्यक्ष प्रो.वेद प्रकाश और उनकी टीम ने बेहोशी की हालत में ओपीडी में आये 71 वर्षीय उस बुजुर्ग व्यक्ति को मौत के मुंह से बाहर निकालकर स्वस्थ किया, जो 37 दिन वेंटीलेटर पर भर्ती रहा, इलाज के दौरान दो बार हार्ट ने स्पंदन बंद कर दिया था, सीपीआर से दोनों बार हृदय गति लौटी। इसके अलावा मैनेनजाइटिस की वजह से इंटर्नल ब्लीडिंग से सांस नली में अवरोधक बने तीन बड़े-बड़े थक्कों को ब्रॉन्कोस्कोपी तकनीक से बाहर निकालना पड़ा। फेफड़े में संक्रमण को भी बाहर निकाला गया। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्ग बलिहारी यादव को चिकित्सक द्वारा सोमवार को डिस्चार्ज किया जायेगा।

यह जानकारी देते हुए रविवार को विभागाध्यक्ष प्रो.वेद प्रकाश ने बताया कि आजमगढ़ निवासी बलिहारी यादव को उनके परिवारीजन 29 जनवरी को बेहोशी व सांस न ले पाने की गंभीर की हालत में आरआईसीयू में रात को नौ बजे भर्ती कराया गया था। मरीज को तुरन्त वेंटीलेटर पर भर्ती किया गया, दो दिन बाद होश आया, जांच में मैनेनजाइटिस की पुष्टि हुई, बीपी इत्यादि को कंट्रोल किया गया, मगर ऑक्सीजन सेचुरेशन फिर भी 85 प्रतिशत ही रहा। दिमागी बुखार की वजह से दिमाग में हाइड्रो कैफेलस (दिमाग मे झिल्लियों में सूजन आने की वजह से ब्‍लड का संचार रुकने से दिमाग के बीच में बड़ा धक्का जम गया था) जिसे हमारे विभाग के चिकित्सकों ने ही दवा द्वारा ठीक कर दिया।

उन्‍होंने बताया कि बेहोशी की हालत में उल्टी होने से पेट के अंदर का खाद्य पदार्थ दाहिने फेफड़े में पहुंच गया था। संक्रमण बढ़ता जा रहा था, इंटर्नल ब्लीडिंग हो गई, सांस नली में (ट्रेकिया में) खून के बड़े-बड़े थक्के जम गये, सांस लेने में अवरोध उत्पन्न हो गया था, जिन्हें आठ बार ब्रॉन्कोस्कोपी कर बाहर निकाला गया। इलाज के दौरान 7 व 18 फरवरी को हालत बिगड़ गई थी, हार्ट ने काम करना बंद कर दिया था, हमारे चिकित्सकों ने त्वरित सक्रियता दिखाते  हुए दोनों बार सीपीआर (छाती दबा-दबा कर सांसे देना) द्वारा हार्ट में सांस प्रक्रिया को पुन: चालू किया।

डॉ वेद ने बताया कि ब्‍लीडिंग की वजह से खून की कमी को दूर करने के लिए आठ यूनिट होल ब्‍लड के अलावा प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की कई यूनिटें चढ़ाई गईं। पूरे 37 दिनों तक मरीज के प्रत्येक अंग की सक्रियता पर निगरानी रखी गई। अब मरीज स्वस्थ है, जनरल वार्ड में है। सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया जायेगा। इलाज के दौरान आने वाले खर्च में उन्होंने बताया कि केवल दवा और वेंटीलेटर बेड चार्ज देना पड़ा है।

 

मरीज का इलाज करने वाली टीम

प्रो.वेद प्रकाश के नेतृत्व में सीनियर रेजीडेट्स डॉ. अंकित कटियार, डॉ.अभिषेक, डॉ.अहबाब,  डॉ.कैफी,  जेआर डॉ.आकाश और स्टाफ नर्स में मेराज अहमद, सुशीला वर्मा, सबा परवीन, संदीप, सुधा, रतिका, ओटी टेक्रीशियन हीना नाज, आदर्श, अनीश,  फिजियोथेरेपिस्ट आलिया आलम, एसपी मौर्या एवं नवनीत शुक्ल शामिल रहे।