जागरूकता बढ़ाने के लिए चिकित्‍सकों को किताबें भी लिखनी चाहिये

-केजीएमयू में यूपीएएसआईकॉन 2020 प्रारम्‍भ, वर्चुअल कार्यशाला में लिया 800 लोगों ने हिस्‍सा

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो


लखनऊ। चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने और आमजन में अधिक से अधिक जागरूकता बढ़ाने के लिए चिकित्सकों को किताबें लिखनी चाहिए तथा प्रयास यह हो कि किताबें हिन्दी में हो। इसका लाभ यह होगा कि सभी लोग इसे पढ़ स‍केंगे और आसानी से समझ सकेंगे जिससे लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी।  

यह सलाह शनिवार को केजीएमयू में आयोजित यूपीएएसआईकॉन 2020 में पहले दिन, केजीएमयू सर्जरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.टीसी गोयल ने दी। इस दो दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति ले.ज. डॉ. बिपिन पुरी ने किया। इस मौके पर अटल बिहारी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एके सिंह को प्रख्यात वरिष्ठ सर्जिकल शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ज्ञात हो प्रो एके सिंह केजीएमयू में प्‍लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष रह चुके हैं।



कार्यशाला में विभागाध्यक्ष सर्जरी प्रो.अभिनव अरुण सोनकर ने गॉल ब्लैडर कैंसर की सर्जरी करने की तकनीक पर प्रकाश डाला। वहीं ब्रिटेन के डॉ.अली जमीर खान ने थोरेसिक सर्जरी प्रशिक्षण पर व्याख्यान दिया। बीएचयू के डॉ.एके खन्ना ने वेरिकोज वेन्स,  प्रोबल नियोगी ने ट्रिक्स एंड टिप्स ऑन डिफिकल्ट लैपकोलेसिक्टोमी पर प्रकाश डाला। संजय गांधी पीजीआई के डॉ.ज्ञान चन्द्र ने एंडोस्कोपिक थायराइड सर्जरी, डॉ.वीके कपूर ने पित्ताशय की बीमारियों पर प्रकाश डाला।

इसके अतिरिक्‍त केजीएमयू के डॉ.संदीप तिवारी, डॉ.समीर मिश्र, डॉ.अनीता सिंह, डॉ.यदुवेंद्र धीर ने पेट में लगने वाली गंभीर चोटों के इलाज पर प्रकाश डाला। डॉ.जेडी रावत व डॉ.अर्चिका गुप्ता ने एनोरेक्टल मल्चिंग , डॉ.परवेज शेख व डॉ.कुशल मित्तल ने एनो-रेक्टल बीमारियों पर तकनीकियों की चर्चा की। कार्यशाला में डॉ.अजय कुमार पाल को टीपी बनर्जी संगोष्ठी को संचालित करने के लिए पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में 800 से अधिक विशेषज्ञों ने ऑन लाइन भाग लिया।