शोध : कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल करने वाली जीन खोजी एसजीपीजीआई के डॉक्‍टर ने

-डॉ रोहित सिन्‍हा व टीम ने इटली व सिंगापुर के साथ मिलकर हासिल की सफलता

-बढ़े कोलेस्‍ट्रॉल के कारण कार्डियोवस्‍कुलर डिजीज से भारत में हर साल 30 प्रतिशत मृत्‍यु

डॉ रोहित सिन्‍हा

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राजधानी स्थित संजय गांधी पीजीआई के चिकित्‍सकों द्वारा की गयी रिसर्च में एक और अहम कड़ी जुड़ गयी है, बढ़े हुए कोलेस्‍ट्रॉल के शिकार मरीजों के इलाज में यह रिसर्च मील का पत्‍थर साबित होगी। संस्‍थान के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ रोहित सिन्‍हा व उनकी टीम ने इटली और सिंगापुर के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक जीन ULK1 की खोज की है, यह जीन लिवर कोलेस्‍ट्रॉल के उत्‍पादन को नियंत्रित करता है, इस जीन को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि जीन को नियंत्रित करने के लिए अभी दवायें उपलब्‍ध नहीं हैं, लेकिन इन दवाओं पर भी शोध चल रहा है।

ज्ञात हो कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ना आज एक आम समस्‍या बन चुकी है, जबकि हमारे स्वास्थ्य को ठीक रखने में कोलेस्ट्रोल का सही होना नितांत आवश्यक है। डॉ रोहित सिन्‍हा ने बताया कि कोलेस्‍ट्रॉल का बढ़ना कई तरह की घातक बीमारियों को जन्म देता है, जैसे हाईपरटेंशन, ब्रेन स्ट्रोक। अधिकांश विकसित देशों के साथ-साथ भारत में भी 30% वयस्क रोगियों की कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के कारण मृत्यु हो जाती है। हम अपने खानपान और आहार से कोलेस्ट्रॉल ग्रहण करते हैं, किंतु लिवर से भी कोलेस्ट्रॉल का उत्पादन होता है। मानव शरीर में लिवर के कोलेस्ट्रोल बढ़ने की इसी संश्लेषण को अधिकांशतः कार्डियोवैस्कुलर जटिलताओं से जोड़ा जा सकता है। उन्‍होंने बताया कि कैंसर पर भी कंट्रोल करने में भी इसी जीन की भूमिका है।

इस तरह मिली कामयाबी :डॉ रोहित सिन्‍हा (बायें) व उनके छात्र संगम रजक

संस्थान के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ रोहित सिन्हा और उनकी टीम द्वारा इटली और सिंगापुर के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक जीन ULK1 की खोज की गई, जो लिवर कोलेस्ट्राल के उत्पादन को नियंत्रित करता है । डाo रोहित सिन्हा और उनके विद्यार्थी  संगम रजक द्वारा यह दिखाया गया कि ULK1 का ड्रग आधारित निषेध मानव हेपेटिक कोशिकाओं व माउस मॉडल में यकृत कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने वाले एंजाइमों को पैदा करने वाले कोलेस्ट्राल के जैव संश्लेषण को काफी कम करता है।

मानव कोलेस्ट्रोल संश्लेषण के नियामकों के रूप में ULKI जीन की पहचान एक निष्पक्ष अगली पीढ़ी अनुक्रमण पद्धति द्वारा संभव की गई थी, जिसमें पता चला के इस प्रोटीन की कमी वाली जिगर कोशिकाओं में कोलेस्ट्रॉल की कमी थी। इसके अतिरिक्त डाक्टर सिन्हा की लैब ने आवणिक और सेलुलर जीव विज्ञान तकनीकों का उपयोग उस तंत्र को उजागर करने के लिए किया, जिसके द्वारा ULK1 ने कोलस्ट्रोल संश्लेषण को विनियमित किया था। इस उल्लेखनीय खोज के अनुरूप वैज्ञानिक घटे हुए कोलेस्ट्रॉल के स्तर से संबंधित बीमारियों का उपचार  प्रदान कर सकते हैं।