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केजीएमयू में शोध : आंख में लगने वाले इंजेक्‍शन की दर्दरहित तकनीक विकसित

-तकनीक विकसित करने वाली डॉ शशि तंवर के थीसिस गाइड हैं प्रो संजीव कुमार गुप्‍ता

डॉ शशि तंवर

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के नेत्र विज्ञान विभाग ने एक ऐसी टेक्निक विकसित की है जिसमें आंख में इंजेक्शन लगने पर कोई दर्द नहीं होता है। इस तकनीक को शोध कर विकसित करने वाली डॉ शशि तंवर ने अपनी थीसिस में शामिल किया है, इसका प्रकाशन एक अंतर्राष्‍ट्रीय जर्नल में किया जा चुका है।

डॉ शशि तंवर के थीसिस गाइड प्रो संजीव कुमार गुप्‍ता ने बताया कि   यह तकनीक बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन रोगियों को डायबि‍टिक रेटिनोपैथी के इलाज की सलाह दी जाती है, वे आंख में इंजेक्शन लगने से डरते हैं,  चूंकि यह तकनीक इसे दर्द रहित बनाती है इसलिए अब इसके इलाज में रोगियों को पीड़ा नहीं होगी।

ज्ञात हो मधुमेह भारत में एक आम बीमारी बन गई है और एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2030 तक मधुमेह से नौ करोड़ 29 लाख आबादी प्रभावित हो जाएगी। सामान्‍यत: देखा गया है कि 5 से 10 वर्षों की अवधि के बाद रोगियों में विभिन्न मधुमेह जटिलताएं विकसित होना शुरू हो जाती है, इन्हीं में से एक है डायबीटिक रेटिनोपैथी।

प्रो संजीव गुप्ता ने बताया कि‍ डायबिटिक रेटिनोपैथी एक गंभीर डायबिटीज जटिलता है और यदि ठीक से इलाज न किया जाए तो स्थायी अंधापन हो सकता है। उन्होंने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के उपचार में आई ड्रॉप्स, लेजर, आंखों के इंजेक्शन और सर्जरी शामिल है। इन सभी तौर-तरीकों का उपयोग रेटिनोपैथी के चरण के अनुसार इलाज के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि परदे में सूजन और परदे में रक्त स्राव के इलाज के लिए आंखों के अंदर इंजेक्शन दिए जाते हैं जो कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के कारण होता है।

प्रो संजीव गुप्ता

उन्होंने बताया कि डॉ शशि द्वारा अपनी थीसिस के लिए प्रोजेक्ट में नई विकसित की गई है जिससे आंख में इंजेक्शन लगाने पर कोई दर्द नहीं होता है इस तकनीक का 155 रोगियों पर सफल परीक्षण किया गया। इस परिणाम को नेत्र विज्ञान के एक अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित भी किया गया है और मधुमेह रेटिनोपैथी से पीड़ित मरीजों को प्रभावी, किफायती और दर्द रहित उपचार करने में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में इसकी सराहना भी की गई है।

उन्होंने कहा कि अब यह उम्मीद की जाती है कि वे रोगी, जिन्हें अन्य नेत्र रोगों के लिए नेत्र इंजेक्शन की आवश्यकता होती है तो यदि इसी तरह की तकनीक अपनाई जाती है तो वह लाभान्वित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह उपचार गरीब रोगियों के लिए निशुल्क है तथा अन्य रोगियों को न्यूनतम खर्चे पर नियमित आधार पर दिया जाता है, इसके लिए रोगी को कार्य दिवसों में नेत्र विभाग की ओपीडी में आना होगा।

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