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मरीज और डॉक्टरों के बीच विश्वास के रिश्तों की दरकती दीवार को मजबूत करेगा ‘झरोखा’

केजीएमयू के हेमेटोलॉजी विभाग से हुई शुरुआत  

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय में मरीज और तीमारदारों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्‍य से झरोखा नाम की सेवा की पहल आरम्‍भ की गयी है। इसका लोकार्पण शुक्रवार को केजीएमयू के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने किया।

 

इस सुविधा केंद्र की सोच चिकित्‍सा विश्‍व विद्यालय के क्लीनिकल हेमोटोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो एके त्रिपाठी की है। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से मरीजों एवं तीमारदारों को बेहतर सेवाएं देने के उद्देश्य से तथा सकारात्मक वातावरण प्रदान करने की भावना से यह सुविधा केंद्र झरोखा शुरू किया गया है।

 

इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने सुविधा केंद्र झरोखा की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के नवोन्मेषी विचारों को लागू करने से डॉक्टर-मरीज के संबंधों को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही मरीज और उनके तीमारदार को बेहतर माहौल प्रदान करके उनके उपचार संबंधी तनाव को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक को अपने इलाज पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए। साथ ही निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का लाभ सबसे अधिक उसी को मिलता है, जो निस्वार्थ भाव से दूसरों को लाभान्वित  करने का प्रयास करता है।

कुलपति ने कहा कि आमतौर पर रोशनी झरोखे के माध्यम से बाहर से अंदर प्रवेश करती है लेकिन इस सुविधा केंद्र के माध्यम से ज्ञान की रोशनी इस परिसर से बाहर जाएगी और केजीएमयू की चिकित्सीय सेवा भाव एवं सुविधा के बढ़े हुए गौरव को और अधिक बढ़ाने का कार्य करेगी। उन्होंने प्रो एके त्रिपाठी के इस कार्य की सराहना करते हुए इस सुविधा केंद्र को रोल मॉडल बनाकर पूरे विश्वविद्यालय में लागू करने का आश्वासन दिया।

 

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार नरेन्द्र भदौरिया ने सुविधा केन्द्र झरोखा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसा अनूठा प्रयोग उन्होंने आजतक किसी भी अन्य चिकित्सालय एवं चिकित्सा विश्वविद्यालय में नही देखा। उन्होंने कहा कि ऐसे सुविधा केन्द्र की स्थापित करने में समाज के सभी वर्ग एवं चिकित्सकों को अपना सकारात्मक योगदान देना चाहिए।

 

इस अवसर पर क्लीनिकल हेमोटोलॉ विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो एके त्रिपाठी ने बताया कि डॉक्टर और मरीज का संबंध विश्वास और आस्था का होता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें कमी आई है। इसका कारण संवादहीनता है क्योंकि दोनों की पक्ष एक-दूसरे की क्षमताओं और सीमाओं को नहीं समझ पाते फलस्वरूप मरीज और उनके सहयोगियों के मन में असंतोष जन्म लेता है जिसके परिणामस्वरूप उपचार के दौरान कई बार हिंसा की नौबत आ जाती है। उन्होंने बताया कि इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए झरोखा सुविधा केन्द्र के माध्यम से कई सेवाएं प्रारम्भ की गईं हैं।  उन्‍होंने बताया कि सुविधा केन्द्र ‘झ्‍रोखा’ में मरीजों एवं उनके सहायकों के लिए पुस्तकें, पत्रिकाएं, टेलीविजन, फिल्म शो, फूड पैकेट्स, साप्ताहिक कार्यक्रम, साप्ताहिक पुरस्कार एवं पारस्परिक संवाद को शामिल किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि विभाग में भर्ती होते समय मरीज को सभी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी जाती है तथा भर्ती मरीजों से चयनित मुद्दों पर चर्चा की जाती है एवं नियमों का पालन करने पर प्रोत्साहन दिया जाता है। जिसके द्वारा उपचार एवं सेवाओं से संबंधित सुधार देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि सुविधा केन्द्र में नियमित समाचार पत्र मंगाए जाते हैं और यहां के पुस्तकालय में लगभग 300 किताबों का संकलन है, जिसमें आध्यात्मिक, स्वास्थ्य संबंधी तथा मोटिवेशनल किताबें मुख्य रूप से उपलब्ध है।

 

कार्यक्रम का संचालन डॉ भूपेन्द्र सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसएन संखवार, डीन डॉ विनीता सिंह, डॉ एसपी वर्मा, रजिस्ट्रार डॉ आरके राय, डॉ संतोष कुमार तथा विभिन्न विभागों के फैकेल्टी सदस्य उपस्थित रहे।