पंजीकृत पैथोलॉजिस्‍ट, माइक्रोबायोलॉजिस्‍ट व बायोकेमिस्‍ट  स्‍वयं को व मरीज की जान बचायें, समय रहते आपत्ति जरूर दर्ज करायें

पैथोलॉजी रिपोर्ट के लिए एमसीआई पंजीकृत पैथोलॉजिस्‍ट की बाध्‍यता बनी रहने के लिए आगे आने की अपील

क्‍लीनिकल इस्‍टैब्लिश्‍मेंट एक्‍ट के लिए पैथोलॉजी जांच पर संशोधन का नोटिफि‍केशन जारी, मांगी गयी हैं आपत्तियां

जयपुर /लखनऊ। क्‍लीनिकल इस्‍टैब्लिश्‍मेंट एक्‍ट के तहत तैयार नये रूल्‍स में पैथोलॉजी की बेसिक कॉम्‍पोसिट लैब के दूसरा संशोधन ड्राफ्ट तैयार करने के लिए 15 मार्च को नोटिफि‍केशन जारी किया गया है। इस पर सुझाव और आपत्तियां 30 दिन में मांगी गयी हैं,

मेरी एमसीआई में पंजीकृत सभी पैथोलॉजिस्‍ट, माइक्रोबायोलॉजिस्‍ट व बायोकेमिस्‍ट से अपील है कि बेसिक कॉम्‍पोसिट लैब से जांच होने वाली रिपोर्ट में दस्‍तखत करने वाले की योग्‍यता को तय न किये जाने के विरोध में अपनी आपत्तियां अवश्‍य दर्ज करायें। क्‍योंकि सुप्रीम कोर्ट का साफ ऑर्डर है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में पंजीकृत पैथोलॉजिस्‍ट ही रिपोर्ट पर दस्‍तखत कर सकता है।

 

यह अपील जयपुर के एक निजी अस्‍पताल में कार्यरत प्रैक्टिशसर्स पैथोलॉजिस्‍ट्स सोसाइटी राजस्‍थान के सचिव डॉ रोहित जैन ने देश भर के चिकित्‍सकों से की है। उन्‍होंने कहा है कि मरीज की सुरक्षा, पैथोलॉजी की सुरक्षा, हम पैथोलॉजिस्‍ट की सुरक्षा और झोलाछाप डॉक्‍टरों के विरोध  में अभियान के समर्थन के लिए भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा जारी किये गये ई मेल पते पर अपनी आपत्ति अवश्‍य भिजवायें। उन्‍होंने कहा कि सरकार द्वारा लैब को तीन कैटेगरी में बांटने से क्‍वैकरी को बढ़ावा मिलेगा।

 

उन्‍होंने बताया कि जो संशोधन किया गया इसमें पहले लिखा हुआ है ‘The authorized signatory will be liable for authenticity of laboratory test report ‘ अब बदले हुए ड्राफ्ट में यह लाइन कर दी गयी है ‘The authorized signatory will be liable for authenticity of laboratory test report only’ उन्‍होंने कहा कि यह सिर्फ शब्‍दों की बाजीगरी है, जाहिर सी बात है कि जब कोई भी व्‍यक्ति जो रिपोर्ट देता है तो उसका जिम्‍मेदार वही होता है लेकिन यहां बात तो यह महत्‍वपूर्ण है कि हस्‍ताक्षर करने वाली की योग्‍यता का निर्धारण नहीं किया गया है, ऐसी स्थिति में बहुत संभव है कि अयोग्‍य व्‍यक्ति भी मशीन की निकली रिपोर्ट पर दस्‍तखत कर सकता है, जो कि आपत्तिजनक है क्‍योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी दिये गये निर्णय के अनुसार इस पर दस्‍तखत करने का अधिकार सिर्फ एमसीआई में पंजीकृत पैथोलॉजिस्‍ट को ही है।

डॉ रोहित जैन

उन्‍होंने बताया कि इसी प्रकार कॉलम 3 में लिखे ‘wherever interpretation of lab results or opinion there on are required, registered bachelor of medicine and bachelor of surgery(MBBS) medical practitioner is essential’ में सिर्फ wherever शब्‍द हटाकर अब लिख दिया है कि ‘interpretation of lab results or opinion there on are required, registered bachelor of medicine and bachelor of surgery(MBBS) medical practitioner is essential’  इस बारे में डॉ जैन की आपत्ति है कि जहां कहीं आवश्‍यक हो की बात नहीं है, यह तो हर जगह आवश्‍यक है। उन्‍होंने कहा कि पैथोलॉजी की जांच को लेवल में नहीं बांटा जा सकता है क्‍योंकि जांच छोटी हो या बड़ी सभी जीवन से जुड़ी हैं।

डॉ जैन ने एक पत्र तैयार किया है जिस पर आपत्ति दर्ज कराने वाले को अपना नाम लिखते हुए help.ceact2010@nic.in पर भेज देना है।

 

आपको बता दें कि पैथोलॉजी जांच की छोटी सी चूक मरीज के इलाज की दिशा बदल सकती है। आवश्‍यक है कि जांच रिपोर्ट योग्‍य पैथोलॉजिस्‍ट की देखरेख में तैयार की जाये और पूरी जिम्‍मेदारी के साथ वह पैथोलॉजिस्‍ट उस पर दस्तखत करे। कुछ ऐसी ही मंशा के साथ उच्‍चतम न्‍यायालय ने 12 दिसम्‍बर, 2017 को अपना फैसला दिया था। लेकिन अफसोस है कि देश भर में करीब 80 फीसदी जांच रिपोर्ट मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की गाइडलाइंस के विरुद्ध तैयार हो रही हैं।

 

बीती 22 फरवरी को दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश ने पैथोलॉजी रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत अयोग्‍य लोगों द्वारा हस्‍ताक्षर करने के विरोध में डॉ रोहित जैन की ओर से इसी संदर्भ में दायर याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्‍ली सरकार, एनएबीएल (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) और इरडा (Insurance Regulatory and Development Authority)  को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि भारत के 100 करोड़ से अधिक नागरिकों के स्‍वास्‍थ्‍य से खिलवाड़ करने का अधिकार आखिर कैसे दिया जा सकता है?

 

डॉ जैन ने बताया कि नये नियम के अनुसार पैथोलॉजी को तीन कैटेगरी में बांटा गया है बेसिक कम्‍पोसिट, मीडियम और एडवांस्‍ड। इसमें बेसिक कम्‍पोसिट लैब के लिए एमबीबीएस, एमडी पैथोलॉजी की अनिवार्यता नहीं रखी गयी है, इसमें कोई भी दस्‍तखत कर सकता है। उन्‍होंने कहा कि जांच करने वाले की योग्‍यता को आधार मानते हुए कैटेगरी बनाना ही संविधान विरुद्ध है, क्‍योंकि जो बेसिक कम्‍पोसिट में जांच कराने वाले और एडवांस्‍ड लैबोरेटरी में जांच कराने वाले की जान की कीमत बराबर है।