थोड़े-थोड़े अंतराल पर समझा कर ही जागरूक किया जा सकता है यातायात सुरक्षा के प्रति

-सड़क सुरक्षा सप्‍ताह के मौके पर जनेश्‍वर पार्क में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम

-आईईसी बलरामपुर हॉस्पिटल व एसोसिएशन ऑफ रिसर्च प्रोफेशनल्स ने किया आयोजन

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। सड़क सुरक्षा जागरूकता को लेकर समय-समय पर कार्यक्रम करने की आवश्यकता है ताकि लोगों के मस्तिष्क में सुरक्षा के प्रति सावधान रहने की बात बैठ सके। यह संक्षिप्त लेकिन गहरी टिप्पणी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉक्टर बिपिन पुरी ने आज सड़क सुरक्षा सप्ताह के अवसर पर गोमती नगर स्थित जनेश्‍वर मिश्र पार्क में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही।

इस कार्यक्रम का आयोजन आईईसी बलरामपुर हॉस्पिटल तथा एसोसिएशन ऑफ रिसर्च प्रोफेशनल्स द्वारा किया गया था। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता पैदा करना था क्योंकि एक जागरूक नागरिक ही देश को सुरक्षित रख सकता है। ले ज डॉ बिपिन पुरी ने जागरूकता के इस प्रकार के कार्यक्रम को लगातार करने पर जोर देते हुए कहा कि नियमित और कम अंतराल पर इस प्रकार के प्रोग्राम करने से बड़ी संख्‍या में लोगों में सड़क सुरक्षा जागरूकता की गुणवत्ता में तेजी से वृद्धि होगी।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ डीएस नेगी और इग्नू की रीजनल डायरेक्टर डॉ मनोरमा सिंह ने यातायात नियमों और दिशानिर्देशों की पालन के महत्व को बताते हुए कहा कि कि इन नियमों का पालन कर के सड़क दुर्घटना को बचाकर समाज को सबसे अच्छे तरीके से कार्यशील रखा जा सकता है।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ राजीव मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाले बड़े नुकसान को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा सड़क दुर्घटनायें सिर्फ संपत्ति और व्यक्ति का ही नुकसान नहीं करती हैं बल्कि हमारे महान भारत के वर्तमान और भविष्य को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर कलाकार, नेता और अन्य वे लोग जो देश को प्रगति के रास्ते काफी ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं, उनको सड़क दुर्घटना से बचाये रखने के लिए इसके प्रति जागरूक किया जाना जरूरी है। डॉ राजीव मिश्रा ने वर्ष 2016 में बने गुड समैरिटन लॉ के बारे में भी जानकारी दी। ज्ञात हो गुड समैरिटन लॉ वह कानून है जिसमें एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति को बचाने वाले लोगों को कानूनी पचड़े में पड़ने से बचने का अधिकार मिला हुआ है।

समारोह में आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए बलरामपुर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ राजीव लोचन ने कहा की सड़क दुर्घटना में घायल होने से न सिर्फ व्यक्ति को आर्थिक हानि होती है बल्कि उनके परिवार और पूरे देश को इससे नुकसान पहुंचता है। इससे उपचार में होने वाले खर्च के साथ ही जो व्यक्ति घायल या मृत्यु के शिकार होते हैं उनसे होने वाली उत्पादकता के न होने का भी नुकसान होता है। एसपी ट्रैफिक लखनऊ पूर्णेन्दु सिंह ने इस मौके पर उपस्थित लोगों को बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को वाहन चलाने से विभिन्न प्रकार के नुकसान होते हैं। उन्‍होंने बताया कि नाबालिग के वाहन चलाते पकड़े जाने पर उसकी 18 वर्ष की उम्र के बाद से 8 और ज्यादा वर्षों के लिए लाइसेंस बनने पर बैन लगने के साथ ही नाबालिग को वाहन चलाने की सहमति देने वाले को 3 साल की सजा भी हो सकती है। इस मौके पर पूर्णेन्दु सिंह ने यातायात सुरक्षा को लेकर एक सुंदर कविता भी प्रस्तुत की।

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ संदीप तिवारी ने कहा कि भारत में लोगों की सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत सीमित सोच है। चौपहिया वाहक धारक पैसे बचाने के लिए सुरक्षा के नाम पर कार में दो एयर बैग्स लगाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। उन्‍होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने एक दुर्घटना के बाद होने वाले नुकसान को झेला नहीं होता है। उन्‍होंने कहा कि ऐसे में उन्‍हें बिना झेले ही एक्सीडेंट के दुष्परिणामों को समझने की जरूरत है।

एनएसएस यूनिट लखनऊ के एस एल ओ और विशेष कार्य अधिकारी डॉ अंशुमाली शर्मा ने गुड समरितान लॉ के बारे में विस्‍तृत जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले को कानूनी पचड़ों से बचाने के लिए इस गुड समरितान लॉ को बनाने के आदेश दिए थे।

इससे पूर्व एसडीआरएफ की टीम द्वारा कार्यक्रम में शामिल अन्य मेहमान, स्वयंसेवक और जनेश्वर पार्क में आए हुए लोगों के साथ मिलकर एक वाकाथन का आयोजन किया गया। एसडीआरएफ की टीम ने दो पहिया वाहन चलाते समय की जाने वाली गलतियों के सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इस मौके पर उन्होंने दुर्घटना होने पर उनकी टीम किस प्रकार व लोगों की मदद करती है, इसका प्रदर्शन भी किया। आयोजन स्थल पर यातायात सुरक्षा विषय को लेकर सुंदर पेंटिंग्स बनाई गई थीं। इन पेंटिंग्स को फाइन आर्ट्स के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहन मावा के नेतृत्व में टेक्नो ग्रुप ऑफ हायर स्टडीज के किशोरों और प्रमुख कलाकारों द्वारा बनाया गया था।