अब ट्रॉमा सेंटर स्थित सभी विभागों में फैकल्‍टी की ड्यूटी रात में ही लगेगी

-अस्थि शल्‍य रोग व मेडिसिन विभागों के रेजीडेंट्स के बीच विवाद की रिपोर्ट आयी
-चार डॉक्‍टरों का छह माह, दो का तीन माह के लिए केजीएमयू से निष्‍कासन
-छह रेजीडेंट्स डॉक्‍टरों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना

सेहत टाइम्‍य ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थित ट्रॉमा सेंटर में गत 28 सितंबर को अस्थि शल्य विभाग तथा मेडिसिन विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच हुई हिंसा की जांच रिपोर्ट आ गई है। इसके अनुसार दोषी पाये गये रेजीडेंट डॉक्‍टरों के खिलाफ काररवाई के केजीएमयू प्रशासन ने आदेश दिये हैं। इसके तहत 4 रेजिडेंट डॉक्टर को छह माह के लिए तथा दो रेजीडेंट डॉक्टरों को 3 माह के लिए चिकित्सा विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया है, जबकि घटना में शामिल 6 डॉक्टरों पर 10,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए केजीएमयू प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि ट्रॉमा सेंटर स्थित विभागों में उनके फैकल्‍टी की ड्यूटी रात को ही लगायी जायेगी।

केजीएमयू प्रशासन की ओर से चीफ प्रॉक्‍टर डॉ आरएएस कुशवाहा द्वारा जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि अस्थि शल्‍य रोग विभाग के  डॉ रजनीश, डॉ प्रांजल गुप्ता एवं मेडिसिन विभाग के डॉ मयंक मिश्रा एवं  डॉ कृष्णपाल सिंह को 6 माह के लिए चिकित्सा विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया है, जबकि अस्थि शल्य रोग विभाग के डॉ रोहित शुक्ला एवं डॉ शुभम सिंह को 3 माह के लिए  निष्कासित किया गया है।

इसके अतिरिक्‍त जिन छह डॉक्‍टरों पर दस-दस हजार का आर्थिक दंड लगाया गया है, उनमें अस्थि शल्‍य रोग विभाग के डॉ धीरेंद्र वर्मा, डॉ आदर्श सेंगर, डॉ अनुश्रव राय तथा मेडिसिन विभाग के रेजिडेंट डॉ अजहर, डॉ नीरज व डॉ प्रद्युम्न शामिल हैं। चीफ प्रॉक्‍टर द्वारा जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि ट्रॉमा सेंटर में विभिन्न तलों पर स्थापित विभागों के विभागाध्यक्षों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके विभाग से सीनियर रेजिडेंट्स की ट्रॉमा सेंटर में तैनाती के दौरान संबंधित सीनियर रेजीडेंट अपनी ड्यूटी के समय ट्रॉमा सेंटर में उपलब्ध रहेंगे।

इसके अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, संकाय प्रभारी ट्रॉमा सेंटर से अनुरोध किया गया है कि वे कुलपति के अनुमोदन के उपरांत ट्रॉमा सेंटर के पदों के सापेक्ष में नियुक्त फैकल्‍टी की पोस्टिंग रात्रि ड्यूटी में लगाएं, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटना पर अंकुश लग सके।