मिनी वेंटीलेटर की तरह काम करता है एनआईवी, खर्च भी कम

केजीएमयू के यूपीएपीकॉन शुरू, पहले दिन चार वर्कशॉप

लखनऊ। अगर मरीज के इलाज में साधारण ऑक्‍सीजन देने से काम न चल रहा हो तो उसे सीधे वेंटीलेटर पर रखने की बजाय एनआईवी लगाकर भी काम चलाया जा सकता है। यह कम खर्चीली विधि है तथा इसे वार्ड में भी लगाया जा सकता है,  इसके लिए आईसीयू की जरूरत नहीं है।

यह जानकारी शुक्रवार को चैप्टर ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया (यूपीएपीआई) के तत्वावधान में शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में दिल्‍ली से आये डॉ अर्जुन खन्‍ना ने दी। तीन दिवसी यूपीएपीकॉन का उद्घाटन किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कलाम सेंटर में किया गया है जो 22 सितम्‍बर तक चलेगा। कार्यशाला का उद्घाटन केजीएमयू मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो वीरेन्द्र आतम ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से कार्यक्रम के आयोजन सचिव एवं मेडिसिन विभाग के डॉ डी0 हिमांशु,  डॉ संजय टंडन सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।

डॉ अर्जुन खन्‍ना ने एनआईवी मशीन के बारे में बताया कि इसे मास्‍क की तरह मरीज को लगा दिया जाता है, किसी प्रकार की नली डालने की जरूरत नहीं पड़ती है। मरीज होश में भी रहता है, तथा खाने-पीने के समय मास्‍क को हटा भी सकता है।

कार्यशाला में इसके अलावा बेसिक लाइफ सपोर्ट,  बायोमेडिकल वेस्ट मेनेजमेंट और 2डी इको कार्डियोग्राफी विषय पर भी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया,  जिसमें 2डी इको कार्डियोग्राफी विषय पर जानकारी देते हुए एसजीपीजीआई लखनऊ की डॉ रूपाली खन्ना ने बताया कि 2डी इको एक स्क्रीनिंग टूल की तरह कार्य करता है और 2डी इको की जांच उपचार करने में बहुत ही सहायक होती है। उन्होंने बताया कि 2डी इको जांच एक प्रकार से हृदय का अल्ट्रासाउण्ड होता है। जब मरीज की सांस फूलती है और सांस हृदय की वजह से फूलती हो तो ऐसी स्थिति में मरीज को फ्लूइड नहीं देना चाहिए। उन्होंने इस जांच की उपयोगिता बताते हुए कहा कि यह जांच मरीज के उपचार में काफी सहायक होती है और इस विधि से मरीज को उसे सही उपचार मिलता है।

केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ अभिषेक ने बताया कि स्ट्रोक वाले मरीजों में हार्ट के चैम्बर में रक्त का थक्का जमा हुआ है या नहीं इसकों 2डी इको की जांच के द्वारा पता किया जा सकता है, जिससे मरीज को जल्द से जल्द सही उपचार देकर स्वस्थ किया जा सके।