दांत निकालने से पूर्व माइक्रोस्‍कोपिक जांच जरूरी, हो सकता है दांत बच जाये

उच्च शक्ति वाले माइक्रोस्कोप का उपयोग करके सधे हाथों से रूट कैनाल उपचार की कला सिखायी गयी

केजीएमयू के डिपार्टमेन्ट आाफ कंजरवेटिव डेन्टिस्ट्री एण्ड इण्डोडॉटिक्स में कार्यशाला का आयोजन

लख्‍नऊ। किसी भी दांत को निकालने और इम्‍प्‍लांट से पहले कंजरवेटिव डेन्टिस्ट्री एण्ड इण्डोडॉटिक्स के विशेषज्ञ की राय आवश्यक रूप से लेनी चाहिए क्‍योंकि माइक्रोस्‍कोपिक डेन्टिस्‍ट्री के तहत जांच से काफी संभावना होती है कि वास्तविक दांत को बचाया जा सके।

 

यह बात किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डिपार्टमेन्ट आाफ कंजरवेटिव डेन्टिस्ट्री एण्ड इण्डोडॉटिक्स द्वारा चतुर्थ एण्डो कोलोक्यूयम कार्यशाला मैग्नीफिकेशन एण्ड बियोण्ड का आयोजन के मौके पर विभाग के मुखिया डॉ एपी टिक्‍कू ने कही। इस कार्यशाला में अनेक राज्‍यों के कॉलेजों से आये शिक्षकों व छात्र-छात्राओं ने भाग लिया जिससे इस तकनीक का प्रयोग वे अपने क्षेत्रों में मरीजों के हित में कर सकें। इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता डॉ अल्फ्रेडो इयाण्डोलो थे। डॉ अल्‍फ्रेडो इटली के माइकोस्कोपिक डेन्टिस्ट्री के प्रसिद्ध विशेषज्ञ हैं, ने व्याख्यांन तथा कार्यशाला का संचालन किया। उन्‍होंने उच्च शक्ति वाले माइक्रोस्कोप का उपयोग करके सधे हाथों से रूट कैनाल उपचार की कला सीखने के लिए व्याख्यान दिया।

इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट  द्वारा आशा व्यक्त की गयी एवं विभिन्न राज्यों के कॉलेजों से आये शिक्षकगण छात्र एवं छात्राएं माइक्रोस्कोपिक डेन्टिस्ट्री की ट्रेनिंग लेकर इस विद्या को सर्वत्र प्रचार प्रसार करें ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।

विभागाध्यक्ष प्रो एपी टिक्कू ने बताया कि इस विभाग में माइकोस्कोपिक डेन्टिस्ट्री द्वारा पिछले 15 वर्षों से मरीजों का इलाज किया जा रहा है जोकि अपने आप में प्रमुख उपलब्धि  है तथा माइक्रोस्कोपिक डेन्टिस्ट्री द्वारा उपचार करने वाला यह राज्य का एकमात्र विभाग है।

उन्होंने बताया कि विभाग आने वाले 8 से 10 सालों में छात्रों को माइक्रोडेन्टिस्ट्री की तकनीकों का प्रशिक्षण दे सकेगा जिससे छात्र एवं छात्राओं का ज्यादा से ज्यादा कौशल विकास हो सके। इसके साथ ही उन्होने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी दांत को निकाल कर इम्पलान्ट करने से पूर्व कंजरवेटिव डेन्टिस्ट्री एण्ड इण्डोडॉटिक्स के विशेषज्ञ की राय आवश्यक रूप से लेनी चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा वास्तविक दांत को बचाया जा सके।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईटीआरसी के निदेशक डा आलोक धवन थे एवं इस कार्यशाला का आयोजन प्रो एपी टिक्कू एवं प्रो अनिल चन्द्रा की देखरेख में किया गया जिसमें डा प्रोमिला वर्मा, डा राकेश कुमार यादव, डा रमेश भारती, डा विजय कुमार शाक्य, डा रिदम एवं डा प्रज्ञा पाण्डेय ने अपना सहयोग प्रदान किया।