Thursday , July 28 2022

जिंदा मरीज ही नहीं पुतले ‘मरीज’ भी बच गये जलने से

शनिवार को ही समाप्त हुई एटीएलएस की ट्रेनिंग को देखने कुलपति भी पहुंचे थे 

एटीएलएस की ट्रेनिंग का डेढ़ करोड़ का सामान पूर्णतया सुरक्षित

डॉ विनोद जैन व उनकी टीम ने आधी रात के बाद तक निकाला सामान

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू के ट्रॉमा सेन्टर में बीते शनिवार को लगी आग में जिंदा मरीज ही नहीं पुतले भी जलने से बच गये। जिस स्टोर में आग लगी थी उसी के बगल स्थित डिजास्टर मैनेजमेंट वार्ड, जहां एटीएलएस की ट्रेनिंग करायी जाती है, में दूसरे छोर पर ये पुतले रखे थे।
हम बात कर रहे हैं एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (एटीएलएस) की ट्रेनिंग में प्रयोग होने वाले मैनीकिन्स यानी पुतलों की। इन विदेशी पुतलों की खासियत यह है कि इनमें सिर्फ प्राण ही नहीं होते हैं, अन्यथा बाकी इन पुतलों के अंदर और बाहर वे सभी अंग होते हैं जो एक मनुष्य में होते हैं, क्योंकि दुर्घटनाग्रस्स मरीजों की जान बचाने की ट्रेनिंग में उन सभी स्थितियों से निपटना सिखाया जाता है जो आमतौर पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के साथ होती हैं।
इस बारे में एटीएलएस ट्रेनिंग के इंचार्ज प्रो विनोद जैन ने बताया कि हम लोगों की तीन दिवसीय ट्रेनिंग शनिवार को ही समाप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें खबर लगी कि ट्रॉमा सेंटर में आग लगी है तो वे तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंचे। इसी के साथ ही एटीएलएस ट्रेनिंग कार्य में लगी उनकी टीम के सदस्य भी पहुंच गये। उन्होंने बताया कि हम सबकी सबसे पहली प्राथमिकता मरीजों को बचाने की थी। जब मरीजों को बचा लिया गया तो बड़ी राहत मिली। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें चिंता हुई कि ट्रेनिंग में प्रयोग होने वाले कीमती पुतले व अन्य उपकरण का क्या हुआ। उन्होंने बताया कि धुएं के बीच ही जब हम लोग पहुंचे तो देखा कि पुतलों सहित ट्रेनिंग का सारा सामान जलने से बच गया था, आग बुझाने में थोड़ा पानी वगैरह जरूर पड़ गया था लेकिन सब कुछ सुरक्षित था। उन्होंने बताया कि इसके बाद हम लोगों ने प्रशिक्षण का सारा सामान पुतलों सहित जैसे-तैसे निकाल कर कलाम सेंटर पहुंचाया। इस सारी कवायद में रात के करीब ढाई बज गये।

प्रो विनोद जैन ने अपनी टीम की सराहना करते हुए बढ़ाया उनका हौसला।

प्रो. जैन ने बताया कि पुतलों और अन्य उपकरणों को मिलाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान होने से बच गया। ज्ञात हो एक-एक पुतले की कीमत करीब 17 लाख तक होती है, इसके अलावा खाल जो कि हर बार ट्रेनिंग के बाद पुतलों पर चढ़ायी जाती है वह भी कीमती होती है। इन पुतलों के अलावा ट्रेनिंग में उपयोग होने वाले उपकरण भी कीमती होते हैं। प्रो जैन ने उस दिन के प्रयासों के लिए अपनी टीम के सदस्यों की सराहना की है। टीम के सदस्यों में प्रो विनोद जैन के अलावा शालिनी गुप्ता, नावेद, अभिषेक, अनिल तथा पैरामेडिकल स्टूडेंट्स शामिल थे।

 

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