ममता की ऐंठ ने बढ़ायीं मरीजों की दुश्‍वारियां, सोमवार को और खराब होंगे हालात!

डॉक्‍टरों का आंदोलन जारी, हड़ताली डॉक्‍टरों के प्रति ममता के रवैये में बदलाव नहीं, डॉक्‍टरों का भी बैठक में जाने से इनकार

आईएमए के देश भर में मौजूद तीन लाख से ज्‍यादा चिकित्‍सक सोमवार को करेंगे 24 घंटे की स्‍ट्राइक

दिल्‍ली एम्‍स के रेजीडेंट डॉक्‍टरों ने भी ममता बनर्जी को दिया अल्‍टीमेटम, 48 घंटे बाद से करेंगे बेमियादी हड़ताल

 

कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में बीते सोमवार 11 जून को 85 वर्षीय मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों द्वारा की गयी दो जूनियर डॉक्‍टरों की पिटाई के बाद पैदा हुए हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। राज्‍य में अब तक करीब 300 डॉक्‍टर इस्‍तीफा दे चुके हैं। हड़ताली डॉक्‍टरों ने अपनी छह सूत्रीय मांगें माने जाने तक हड़ताल समाप्‍त करने से साफ इनकार कर दिया है, डॉक्‍टरों ने आज शाम होने वाली बैठक में भी जाने से इनकार कर दिया। इस बैठक में राज्‍य की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी को भी शामिल होना था, लेकिन हड़ताली डॉक्‍टरों का साफ कहना है कि जब तक ममता बनर्जी अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगती हैं तब तक उनके साथ कोई बात नहीं होगी।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश भर से मिल रहे समर्थन के क्रम में दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) के रेजीडेंट डॉक्‍टरों ने भी ममता बनर्जी को अल्‍टीमेटम देते हुए कहा है कि 48 घंटे में अगर उन्‍होंने हड़ताली डॉक्‍टरों की मांगें नहीं मानीं तो वे लोग भी हड़ताल पर चले जायेंगे। जबकि सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े देश भर के चिकित्‍सकों की 24 घंटे की हड़ताल से मरीजों के इलाज में और दिक्‍कत बढ़ने वाली है।

देश भर के मेडिकल शिक्षण संस्‍थानों में कार्य करने वाले रेजीडेंट डॉक्‍टरों द्वारा विरोध जताये जाने के साथ ही तीन लाख से ज्‍यादा सदस्‍यों वाली चिकित्‍सकों की संस्‍था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के जूनियर डॉक्‍टरों के समर्थन में आने से चिकित्‍सकों की इस लड़ाई को खासी मजबूती मिली है। दरअसल चिकित्‍सकों की पिटाई का मसला ऐसा है जिससे सभी डॉक्‍टर कहीं न कहीं त्रस्‍त हैं, इसलिए दूसरे डॉक्‍टरों के संगठनों का भी समर्थन इस आंदोलन को आसानी से मिल रहा है।

 

आईएमए ने सोमवार 17 जून को सुबह 6 बजे से 24 घंटे तक पूर्ण हड़ताल का आह्वान किया है, ऐसी स्थिति में इलाज के दृष्टिकोण से हालात और बद्तर होने के आसार नजर आ रहे हैं। हालांकि एसोसिएशन ने इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा है लेकिन फि‍र भी कम गंभीर मरीजों के उपचार को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

 

हड़ताली जूनियर डॉक्‍टरों की ये हैं छह मांगें 

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को डॉक्टरों को लेकर दिए गए बयान पर बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए
  • डॉक्टरों पर हुए हमले की निंदा करते हुए एक बयान जारी करना चाहिए
  • पुलिस की निष्क्रियता की जांच होनी चाहिए
  • डॉक्टरों पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
  • जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों पर लगाए गए झूठे आरोपों को वापस लिया जाना चाहिए
  • अस्पतालों में सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए

 

दूसरी ओर हाई कोर्ट की फटकार के बाद भी अभी ममता बनर्जी की ओर से समाधान निकालने की गंभीरता नजर नहीं आ रही है। कोर्ट ने एक सप्‍ताह का समय दिया है, ऐसे में मुख्‍यमंत्री के इस दिशा में उठाये जा रहे हर कदम पर सभी की निगाहें लगी हैं। दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) के डॉक्टरों ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। रेसीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने न्यूज एजेंसी से कहा है कि, ‘‘हमने पश्चिम बंगाल सरकार की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। हमारी मांग है कि हड़ताल कर रहे डॉक्टरों की बात मानी जाए, नहीं तो हम सभी लोग अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।’’

इससे पूर्व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने 14 जून से तीन दिनों तक देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन शुरू करने के साथ 17 जून को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। आईएमए ने अस्पतालों में डॉक्टरों के खिलाफ होने वाले हिंसा की जांच के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की। संगठन का कहना है कि इसका उल्लंघन करने वालों को न्यूनतम सात साल जेल की सजा का प्रावधान होना चाहिए।

 

बंगाल में अब तक 300 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं, जिसमें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल के 175 डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया है। जूनियर डॉक्टरों के जॉइंट फोरम के प्रवक्ता डॉ.अरिंदम दत्ता ने हड़ताल वापस लेने के लिए सीएम बनर्जी के सामने छह शर्तें रखी हैं।