-विश्व दृष्टि दिवस पर 14 अक्टूबर को केजीएमयू के नेत्र विज्ञान की ओपीडी में होगा जागरूकता कार्यक्रम

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। दृष्टि हानि और अंधापन जीवन के सभी पहलुओं पर प्रमुख और दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है, जिसमें आपकी व्यक्तिगत दिनचर्या से लेकर सामाजिक कार्यों, स्कूल, ऑफिस व दूसरे कार्य शामिल हैं। विश्व स्तर पर, कम से कम 1 बिलियन लोग ऐसे हैं जिन्हें पास या दूर का दृष्टिदोष हैं, और इसे रोका जा सकता है। इसके लिए लोगों में जागरूकता फैलाना आवश्यक है।
यह जानकारी केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो अपजित कौर ने देते हुए बताया कि लगभग हर व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक बार नेत्र स्वास्थ्य की समस्या का शिकार होता है, यह भी सच है कि दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों की नेत्र देखभाल सेवाओं तक पहुंच नहीं है। ऐसे में आवश्यक है कि देश और विश्व स्तर पर नेत्र स्वास्थ्य के बारे में लोगों के बीच जागरूकता पैदा की जाये, इसी के मद्देनजर इस बार विश्व दृष्टि दिवस 2021 की थीम है, लव योर आईज यानी अपनी आंखों से प्यार करें। कल विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर केजीएमयू के नेत्र विज्ञान विभाग की ओपीडी में विभागाध्यक्ष प्रो अपजित कौर की अध्यक्षता में प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दों के रूप में अंधेपन और दृष्टि हानि के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कुलपति ले.ज. डॉ बिपिन पुरी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।
विभाग का उद्देश्य आम जनता को अंधेपन की रोकथाम के बारे में शिक्षित करना है। इसका उद्देश्य भविष्य में न केवल आंखों की देखभाल का दायरा बढ़ाना है बल्कि गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देना भी है। कार्यक्रम का उद्देश्य नेत्र स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाना और लोगों को निवारक नेत्र जांच के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में लगभग 285 मिलियन लोग कम दृष्टि और अंधेपन के साथ रहते हैं। इनमें से 39 मिलियन लोग अंधे हैं और 246 मिलियन लोग मध्यम या गंभीर दृष्टि दोष से पीड़ित हैं। 90% नेत्रहीन लोग कम आय वाले देशों में रहते हैं। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद इनमें 80% लोग ऐसे हैं जिन्हें आसानी से ठीक किया जा सकता है।
प्रो कौर ने कहा कि विश्व दृष्टि दिवस अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य अंधेपन सहित दृष्टि दोष पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करना है। यह दिन लोगों में जानकारी देने और जागरूकता पैदा करने के लिए समर्पित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल है और इस दिन विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों का समन्वय करता है।
