Friday , November 12 2021

ज्ञान, योग, धारणा तथा सेवा से बंधी होती है किसी भी प्रकार की शिक्षा

केजीएमयू के इंस्‍टीट्यूट ऑफ स्किल में दो दिवसीय ‘सॉफ्ट स्किल कोर्स फॉर हेल्‍थ प्रोफेशनल्‍स’ शुरू

 

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल के तत्वावधान में इसके निदेशक डॉ विनोद जैन के द्वारा द्वितीय दो दिवसीय ‘सॉफ्ट स्किल कोर्स फॉर हेल्‍थ प्रोफेशनल्‍स’ का शुभारम्भ अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में स्थित सॉफ्ट स्किल इंस्टीट्यूट में किया गया।

 

इस कार्यक्रम में ब्रह्मकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय के गोमती नगर स्थित केन्द्र की ब्रहम कुमारी सोनी बहनजी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहीं। इस अवसर पर उन्होंने LIFE की व्याख्या करते हुए इसका अर्थ Look Internally Forward Externally  का मंत्र दिया तथा यह बताया कि आत्मा में सात गुण प्रारम्भ से ही निहित होते है। आवश्यकता उन छुपे हुए गुणों को पहचानते हुए उन्हें अपने जीवन में अपनाने की है।

इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल के निदेशक डॉ विनोद जैन ने बताया कि कोई भी शिक्षा चार सूत्रों (ज्ञान, योग, धारणा तथा सेवा) से बंधी होती है। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम किसी भी कार्य के लिए हमें ज्ञान अर्जित करना चाहिए फिर उसमें आत्मसात करना चाहिए तत्पश्चात स्वयं उन गुणों को अपनाना चाहिए और अंत में लोगों में बांटना चाहिए। उन्होंने बताया कि लोगों में ज्ञान बांटने से सर्वप्रथम स्वयं का ही लाभ होता है।

 

कार्यक्रम में डॉ गीतिका नंदा सिंह ने करुणा एवं क्रोध प्रबन्धन के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि कई बार चिकित्सकों द्वारा मरीजों की समस्या को अनदेखा करना या उसे सही प्रकार से समझ न पाने के कारण चिकित्सक एवं मरीजों के बीच के संबंध खराब हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे में चिकित्सकों को मरीजों के प्रति करुणा भाव से किया गया कार्य एवं व्यवहार दोनों को ही मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है और मरीज के स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में क्रोध प्रबंधन पर आंतरिक अनुभूति के आधार पर ध्यान के माध्यम से आत्मसात कराया गया, जिसके बाद चिकित्सकों एवं छात्र-छात्राओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।

 

इस अवसर पर प्रोफेसर रीमा कुमारी ने बताया कि शांत मन से किए गए कार्य खासकर चिकित्सा सेवा में ऐसा करने से मानसिक एवं शारीरिक क्षमता बढ़ती है, जिससे सकारात्मक माहौल में कार्य करने की प्रेरणा मिलती हैं और चिकित्सक एवं मरीज के बीच मधुर संबंध बनते हैं।

 

कार्यक्रम में डॉ नीतू निगम ने बताया कि योग के माध्यम से निजी एवं पेशेवर जीवन में सकारात्मकता के साथ ही शारीरिक रोगों से मुक्ति तो मिलती ही है साथ में एक बेहतर माहौल में चिकित्सा सेवा का लाभ मरीजों को मिलता है। इससे पूर्व उद्घाटन सत्र में मुख्य रूप से प्रो अरुण चतुर्वेदी, प्रो अनिल निश्चल, प्रो अनुराधा निश्चल, डॉ भूपेन्द्र कुमार तथा कार्यक्रम संयोजक के रूप में दुर्गा गिरि उपस्थित रहीं।