-यूरोप के बाहर पहली बार आयोजित परीक्षा में एक साथ पांच चिकित्सकों ने पायी सफलता
सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थित पल्मोनरी विभाग को महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है, यूरोपियन रेस्पीरेट्री सोसाइटी के तहत जो परीक्षा अब तक यूरोप में आयोजित की जाती थी और इसमें शामिल होने वाले भारतीय चिकित्सकों को यूरोप जाकर परीक्षा देनी पड़ती थी, उसे यूरोपियन रेस्पीरेट्री सोसाइटी से करार होने के बाद बीती 8 दिसम्बर को प्रथम बार भारत (कोलकाता) में आयोजित किया गया। गुरुवार को इसका परिणाम आया है जिसमें केजीएमयू के पांच चिकित्सकों को सफलता हासिल हुई है। ऐसा पहली बार है कि भारत के किसी एक संस्थान से एक ही वर्ष में इस परीक्षा में इतनी संख्या में सफल हुए हैं। यह भी पहली बार है कि यह परीक्षा पहली बार यूरोप के बाहर आयोजित की गयी।
यह जानकारी देते हुए पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो सूर्यकांत ने पत्रकारों को बताया कि वर्ष 2016-17 में वह (डॉ सूर्यकांत) जब इंडियन चेस्ट सोसाइटी (आईसीएस) के अध्यक्ष थे, तब आईसीएस एवं यूरोपियन रेस्पीरेट्री सोसाइटी (ईआरएस) के बीच करार हुआ था। इसके बाद की प्रक्रिया में वर्ष 2018 में यूरोपियन सोसाइटी द्वारा भारत का दौरा करके विभिन्न प्रकार के इंस्पेक्शन किये गये तथा पिछले दिनों पहली बार 8 दिसम्बर को कोलकाता में आईसीएस एवं ईआरएस द्वारा संयुक्त रूप से परीक्षा का आयोजन किया गया।
डॉ सूर्यकांत ने बताया कि इस परीक्षा में पूरे भारत वर्ष से 196 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें 85 परीक्षार्थी सफल हुए हैं, इनमें केजीएमयू रेस्पीरेट्री मेडिसिन विभाग के 5 चिकित्सक जिसमें 3 संकाय सदस्य एवं 2 रेजीडेंट ने सफलता प्राप्त की है। इन चिकित्सकों में एडिशनल प्रोफेसर डॉ अजय कुमार वर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आनंद श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ दर्शन कुमार बजाज, सीनियर रेजीडेंट डॉ अविषेक कार एवं जूनियर रेजीडेंट डॉ तारिक अब्बास शामिल हैं। डॉ सूर्यकांत ने इस अवसर पर इन सफल चिकित्सकों को बधाई देते हुए उन्होंने भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने डिप्लोमा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले पांचों चिकित्सकों को बधाई देते हुए उन्हें सम्मानित किया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
