-फॉग्सी ने लखनऊ सहित देश में 40 स्थानों पर अपनी शाखाओं के माध्यम से शुरू किया ‘दो टीके जिन्दगी के’ अभियान

सेहत टाइम्स
लखनऊ। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गाइनीकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया FOGSI की अध्यक्ष डॉ सुनीता तंदुलवाडकर ने कहा है कि जिस प्रकार कोविड महामारी से बचने के लिए हमने वैक्सीन का सहारा लिया था उसी तर्ज पर महिला शक्ति को बचाने के लिए हमें 9 वर्ष से 14 वर्ष की आयु वाली बेटियों को सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन देने का प्रण करना होगा। सर्वाइकल कैंसर की भयावहता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि इससे प्रत्येक पांच मिनट में एक महिला की मौत होती है, और महिलाओं की मृत्यु का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
डॉ सुनीता ने यह बात आज मंगलवार को यहां लखनऊ में होटल क्लार्क्स अवध में FOGSI द्वारा शुरू की गयी सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन परियोजना “दो टीके जिंदगी के” आरम्भ किये जाने के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर अपने सम्बोधन में कही। FOGSI की लखनऊ इकाई LOGS लखनऊ ऑब्स्टेट्रिक एंड गाइनीकोलॉजिकल सोसाइटीज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुम्बई से लखनऊ पहुंचीं डॉ सुनीता ने कहा कि पूरे भारत वर्ष में हमारी 40 शाखाओं द्वारा यह अभियान आज शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जब हम कोविड से जूझ रहे थे, बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हो रही थीं, तब प्रत्येक व्यक्ति बेहद चिंतित था, हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम और सरकार के दृढ़निश्चय के चलते रिकॉर्ड समय में कोविड वैक्सीन बनाकर नागरिकों की जान की रक्षा की। उन्होंने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार एचपीवी वायरस से बचाने के लिए हमारे पास वैक्सीन है, ऐसे में वैक्सीन की उपलब्धता होने की जानकारी और इस वैक्सीन को लेकर मन में पलने वाली भ्रांतियों को दूर करते हुए अगर हम 9 से 14 वर्ष की बच्चियों को दो वैक्सीन के दो डोज देते हैं तो सर्वाइकल कैसर से बचने की संभावना 90 से 99 प्रतिशत तक हो जाती है। ऐसे में हम बड़ी संख्या में हो रही मौतों पर लगाम लगा सकते हैं। डॉ सुनीता ने बताया कि इस बात की स्टडी चल रही है कि क्या दो के स्थान पर एक ही टीके से कार्य चल सकता है, इस स्टडी के अब तक के परिणाम भी सार्थक दिख रहे हैं। कई देशों में एक टीका लगाया जा रहा है।



डॉ सुनीता ने कहा कि जहां बहुत से लोगों को सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए टीका लगाने के बारे में अभी जानकारी ही नहीं है, वहीं एक बड़ी संख्या उन लोगों की भी है जिनके मन में वैक्सीन को लेकर डर एवं भ्रान्तियां बैठी हैं। वे सोचती हैं कि वैक्सीन लेने से आगे चलकर कोई दिक्कत तो नहीं होगी, बच्चे पैदा हो सकेंगे कि नहीं, लेकिन मैं यह कहना चाहती हूं कि ऐसी कोई बात नहीं है, वैक्सीन लगवाने से कोई परेशानी नहीं होती है, बल्कि आप अपने आपको सुरक्षित रख सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यह बड़ी खुशी की बात है कि दो दिन पहले महाराष्ट्र की सरकार के हेल्थ मिनिस्टर और उप मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 9 से 14 वर्ष की सभी बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए वैक्सीन देना चाहिये। उन्होंने कहा कि सरकार को ही इस वैक्सीन को लगवाना अनिवार्य करना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम कोविड वैक्सीन का प्रमाणपत्र दिखाये बिना विदेश की यात्रा नहीं कर सकते हैं, उसी प्रकार आधार कार्ड की तरह सभी लड़कियों के पास सर्वाइकल वैक्सीन लगाये जाने का प्रमाण पत्र होना भी अनिवार्य किया जाना चाहिये।
डॉ सुनीता ने कहा कि हीमोपैपीलोमा वायरस (एचपीवी) से पुरुष भी ग्रस्त हो सकते हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों के इससे ग्रस्त होने की संख्या बहुत कम है, एचपीवी के चलते पुरुषों में पेनाइल कैंसर penile cancer हो सकता है। डॉ सुनीता ने कहा कि महाराष्ट्र ने इस टीके को देने की बात कही है, मुझे उम्मीद है धीरे-धीरे सभी राज्य इसके लिए आगे आयेंगे। उन्होंने कहा कि जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है तो यूपी इस समय बहुत आगे बढ़ रहा है, मुझे विश्वास है कि यूपी सरकार तो पीछे नहीं रहेगी, बच्चियों को कम से कम एक टीका तो जरूर देगी। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक डॉ सुषमा सिंह ने उम्मीद जतायी कि उत्तर प्रदेश में इस टीकाकरण की शुरुआत जल्दी ही की जायेगी।


डॉ सुनीता ने बताया कि फॉग्सी की कोशिश है कि जितने भी लो मिडिल इनकम ग्रुप वाले सभी क्षेत्रों में वहां की लड़कियों को यह टीका फॉग्सी की ओर से उपलब्ध कराया जाये। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी बीच-बीच में हमारी कई शाखाएं इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ही फ्री सर्वाइकल कैंसर वैक्सीनेशन करवाती रहती है।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत LOGS की सचिव डॉ. सीमा मेहरोत्रा के स्वागत भाषण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद संरक्षक डॉ. मंजू शुक्ला ने अपने आशीर्वचन कहे। कल्याण सिंह सुपर स्पेशिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट की प्रोफेसर डॉ सबुही खान ने एचपीवी वायरस और इससे होने वाले सर्वाइकल कैंसर पर एक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 9 से 14 साल की लड़कियों को वैक्सीनेशन और इससे ऊपर की महिलाओं की स्क्रीनिंग अनिवार्य की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से सर्वाइकल कैंसर का फ्री वैक्सीनेशन शुरू नहीं किया जा रहा है, तब तक माता-पिता जागरूकता का परिचय देते हुए अपनी बच्चियों को यह वैक्सीनेशन अवश्य करायें। लॉग्स की संयुक्त सचिव डॉ अनिता सिंह ने कहा कि यदि प्राइवेट और सरकार मिलकर इस टीकाकरण अभियान में अपनी भागीदारी निभाएं तो यह अभियान तेजी से सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कैंसर अपने आप में बहुत डरावना शब्द है। सबसे ज्यादा जागरूकता की जरूरत हमारे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को है। केजीएमयू में प्रोफेसर, लॉग्स की सेक्रेटरी डॉ सीमा मेहरोत्रा ने कहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना बहुत आवश्यक है। महिलाएं अपने परिवार का तो अच्छे से खयाल रख लेती हैं लेकिन अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत लापरवाह हो जाती हैं। प्रजनन अंग के कैंसर से बचने के लिए आवश्यक है कि यदि गंदा बदबूदार पानी आने की शिकायत है, मासिक धर्म बंद होने के बाद ब्लीडिंग हो रही हैं, पेट में सूजन है, वजन गिर रहा है तो उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिये। उन्होंने बताया कि मैं अपने यहां केजीएमयू में देखती हूं कि महिलाएं काफी देर से पहुंचती हैं, जब कैंसर एडवांस स्टेज का हो जाता है।
लॉग्स की अध्यक्ष डॉ प्रीती कुमार ने कहा कि हमारे देश में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर सबसे ज्यादा होता है। डॉ प्रीती कुमार ने कहा कि जिस प्रकार दूसरी कई बीमारियों का टीका बचपन में लगवाया जाता है उसी प्रकार 9 से 14 वर्ष की उम्र में इसे लड़कियों को अवश्य लगवाना चाहिये। उन्होंने कहा कि अगर किसी वजह से इस उम्र में टीका नहीं लग पाया है तो हम लोग यह सलाह देते हैं कि कम से कम शादी से पूर्व यह टीकाकरण अवश्य करा लेना चाहिये लेकिन उस स्थिति में दो की जगह तीन टीके लगवाने की सलाह दी जाती है। डॉ प्रीती ने कहा कि गाइडलाइन्स में 45 वर्ष तक टीकाकरण की बात कही गयी है लेकिन यहां साफ करना जरूरी है कि जितनी जल्दी और कम उम्र में टीकाकरण हो जाता है, उतना ही ज्यादा अच्छा है। उन्होंने कहा कि जहां तक लड़कों के टीकाकरण की बात है तो इसके दो लाभ हैं, पहला यह कि लड़के पेनाइल कैंसर जैसी बीमारी से बचे रहेंगे वहीं पत्नी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय पत्नी को इसके संक्रमण का डर नहीं रहेगा।
समारोह में FOGSI की महासचिव डॉ. सुवर्णा खादिलकर ने वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से भारत में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की वर्तमान स्थिति और HPV के साथ आगे की राह के बारे में जानकारी दी। FOGSI की राष्ट्रीय समन्वयक और HPV परियोजना प्रबंधक डॉ. प्रिया गणेश कुमार का वीडियो मैसेज भी प्रसारित किया गया। स्वास्थ्य के कारणों से समारोह में भाग न लेने के कारण लॉग्स की संरक्षक डॉ चन्द्रावती ने भी वीडियो के माध्यम से अपना संदेश दिया।
शैक्षिक कार्यक्रम में केजीएमयू की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. निशा सिंह द्वारा HPV और महिलाओं में इसके टीकाकरण के बारे में मिथक और तथ्य पर व्याख्यान शामिल थे। डॉ. अनीता सिंह एवं डॉ. वरदा अरोड़ा ने कार्यक्रम का समन्वयन किया, जबकि अन्य पदाधिकारी डॉ. मालविका मिश्रा, डॉ. वंदना सोलंकी ने दर्शकों एवं सदस्यों की समुचित भागीदारी सुनिश्चित की।
