Saturday , May 7 2022

भारत में दस करोड़ लोग अर्थराइटिस के शिकार, कहीं आप भी तो नहीं ?

3 जून से 8 जून तक आयोजित किया जा रहा निशुल्‍क परामर्श शिवि

लखनऊ। कहते हैं कि इलाज से बेहतर बचाव होता है। बचाव के लिए लोगों को जागरूक करना होता है, इसी संदर्भ में अर्थराइटिस से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए अर्थराइटिस फाउण्डेशन ऑफ लखनऊ के तत्‍वावधान में आयोजित शिविर में पूरे एक सप्‍ताह तक गोमती नगर स्थित हेल्‍थ सिटी हॉस्पिटल में वरिष्‍ठ विशेषज्ञ डॉ संदीप कपूर एवं डॉ संदीप गर्ग फ्री परामर्श देंगे। 3 जून से 8 जून तक चलने वाले इस विशेष जागरूकता अभियान के तहत दोनों चिकित्‍सक अस्‍पताल की ओपीडी में आयोजित फ्री कैम्‍प में उपलब्‍ध रहेंगे। इस शिविर में फ्री परामर्श के लिए हेल्‍थ सिटी अस्‍पताल के रिसेप्‍शन में फोन करके पंजीकरण कराना होगा।

 

शिविर में अर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ लखनऊ के संस्थापक डॉ संदीप कपूर व संदीप गर्ग प्रतिभागियों को न सिर्फ आर्थराइटिस उससे जुड़े लक्षण उसके इलाज के बारे में बताएँगे बल्कि उनकी जिज्ञासा का भी समाधान करेंगे।

 

डॉ कपूर ने बताया कि किस प्रकार से पिछले लगभग एक दशक से ज्यादा से फाउंडेशन आर्थराइटिस के लिए जन जागरण का काम कर रहा है और लोगों को अर्थराइटिस से बचाव के उपाय नए-नए तरीकों से समझाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ गर्ग ने बताया कि किस प्रकार से एक व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है और जोड़ों की समस्याओं से अपने को दूर रख सकता है। डॉ. कपूर ने बताया कि लखनऊ में लगभग 5 लाख व्यक्ति अर्थराइटिस से प्रभावित हैं। भारत में यह संख्या 10 करोड़ है।

 

आर्थराइटिस व काम्प्लेक्स फ्रैक्चर से परेशान रहे 8000 मरीजों को जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के माध्यम से पूर्णतया आराम दिला चुके डॉ कपूर और डॉ गर्ग मानते हैं की यदि हर व्यक्ति अपने ऑफिस घर के वातावरण के अनुरूप अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल कर ले और होने वाले लक्षणों को पहचान कर शुरुआती दौर में सावधानी बरते तो आर्थराइटिस को कण्ट्रोल किया जा सकता है। यदि बीमारी हो जाये तो सही और अनुभवी विशेषज्ञ से परामर्श और जल्द इलाज या प्रत्यारोपण सर्जरी से लाभ मिल सकता है।

 

उन्‍होंने बताया कि शुरुआती लक्षणों के आते ही सही समय पर जांच और इलाज से यह संभव है कि बीमारी को उसके शुरुआती स्टेज पर पकड़ा जाए और इलाज भी हो जिससे की सर्जरी से बचा जा सके।

ऑस्टियो आर्थराइटिस के कारक-

  1. मोटापा, 2. उम्र 3. गम्भीर चोट 4. जमीन पर बैठने की आदत 5. धूम्रपान व शराब का सेवन 6. सीढ़ियों का अत्यधिक इस्तेमाल 7. भारतीय प्रसाधन।

ऑस्टियो आर्थराइटिस से बचाव –

  1. सही/संतुलित वजन 2. सीढ़ियों का जरूरत पर इस्तेमाल 3. शराब व धूम्रपान न करना 4. जमीन पर न बैठना