अगर आप है 30 के पार, तो ब्‍लड प्रेशर चेक कराइये साल में दो बार

एक तिहाई लोगों को हाई ब्‍लड प्रेशर, लेकिन आधे लोग इससे अनजान

लखनऊ। भारत में एक तिहाई से ज्‍यादा यानी 34 प्रतिशत लोग ब्‍लड प्रेशर की बीमारी से ग्रस्‍त हैं, चिंता की बात यह है कि इनमें से आधे लोगों को पता ही नहीं है कि उन्‍हें हाई ब्‍लडप्रेशर की शिकायत है, नतीजा वह किसी प्रकार का परहेज नहीं करते हैं जिससे बीमारी के साथ-साथ उससे होने वाले नुकसान और बढ़ते जाते हैं।

 

यह जानकारी आज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा द्वारा विश्‍व उच्‍च रक्‍तचाप दिवस पर आईएमए भवन में आयोजित शिविर के अवसर पर अपने जागरूकता सम्‍बोधन में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ आरके सिंह ने दी। फ्री जागरूकता कैम्‍प का आयोजन कृष्णा होलिस्टिक लाइफ स्टाइल सेन्टर तथा आईएमए लखनऊ के संयुक्‍त तत्वावधान में किया गया इसमें 87 लोगो के ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर की फ्री जांच की गयी।

 

डा राकेश सिहं ने कहा कि हाईपरटेंशन अब केवल अमीरों की बीमारी नही रही यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित कर रही है। हमारे देश में यह कम उम्र में हो रही है,  महिलाओं में गर्भावस्था के उपरान्त यह और अधिक तेजी से बढ़ जाती है। उन्होंनें कहा कि देश में किये गये कई अनुसन्धानों से पता चला है कि किस तरह यह बीमारी बहुत तेजी से हमारे युवाओं में बढ़ रही है। उन्होनें इसके कारणों में तम्बाकू, तनाव, तथा अधिक वजन का बढ़ना तथा खान पान की असावधानी को बताया।

 

इस मौके पर मुख्‍य अतिथि केजीएमयू के न्‍यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ आरके गर्ग के साथ ही आईएमए लखनऊ के अध्यक्ष डा जीपी सिहं तथा सचिव डा जेडी रावत ने आईएमए के संकल्प को प्रकट किया कि संगठन हाइपरटेंसन के विषय में जागरूकता बढ़ाने हेतु कृत संकल्प है, और वह अन्य संगठनों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। डॉ जीपी सिंह ने कहा कि उच्च रक्तचाप अर्थात हायपरटेंशन हृदय, दिमाग, गुर्दा तथा अन्य अंगों पर भी अपना प्रभाव डालता है इसलिए 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को साल में 2 बार अपना बीपी अवश्य नपवाना चाहिए।

 

इसके उपरान्त डा जेडी रावत ने ब्लड प्रेशर के नापने में होने वाली गलतियों तथा उनसे बचने के विषय में बताया इन्होनें यह भी बताया कि वर्तमान में  प्रचलित आटोमेटेड बीपी मशीन को घर पर मरीजों को प्रयोग करने के पहले उन्हें प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है। तथा इनके प्रयोग के नियमों को जानना आवश्यक है। बीपी को नापने के पूर्व तम्बाकू/अल्कोहल, दवायें काफी चाय इत्यादि के सेवन के विषय में भी जानकारी होना आवश्यक है। मरीज के बैठने का तरीका, बीपी इन्स्ट्रूमेन्ट का हृदय के लेवल पर होना आवश्यक है। बीपी को बांधने तरीका तथा यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि बांह पर बांधने वाले कफ में से हवा पूरी तरह निकाल दी गयी है।

 

सचिव डा जेडी रावत ने यह भी बताया कि किस तरह प्रारम्भ की अवस्था में हाईपरटेन्शन को बिना दवाओं के भी कैसे कम किया जा सकता है, उन्होनें बताया कि हाईपरटेन्शन के इलाज में वजन कम करना तथा नमक कम रखते हुए भोजन में कमी लाना, व्यायाम को करना तथा तनाव को कम करना बहुत आवश्यक है यह दवाओं को अच्छी तरह कम करने में मदद करता है तथा कम दवाये प्रयोग करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से तनाव को कम करना है तथा खाने में किस प्रकार परिवर्तन करके बीपी को कम रखा जा सकता है। अंत में उन्होंने यह बताया कि कौन से रोगी कोन सी एक्सरसाइज नहीं कर सकते हैं। इस मौके पर सभी विशेषज्ञों ने उपस्थित जनता के प्रश्नों के उत्तर भी दिये। शिविर में लायन्‍स क्लब की भी भागीदारी रही।