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एनएचएम कार्मिकों के तबादले व वेतन विसंगति पर आदेश नहीं हुए तो 3 जुलाई को भेजेंगे मुख्यमंत्री को पत्र

-संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश ने की घोषणा

सेहत टाइम्स

लखनऊ। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश ने एनएचएम कार्मिकों के स्थानांतरण, वेतन विसंगति की मांगों को पूरा किये जाने की मांग करते हुए कहा है कि अगर मांगें पूरी न हुईं तो 3 जुलाई 2024 को प्रत्येक जनपद में जिला अधिकारी के माध्यम से संघ की जिला इकाई द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा।

यह जानकारी देते हुए संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री योगेश उपाध्याय ने बताया है कि 18 जून को संघ द्वारा विभाग तथा मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है यदि जून में माह में स्थानांतरण एवं वेतन विसंगति पर कार्यवाही नही हुई तो 3 जुलाई को प्रत्येक जनपद में जिला अधिकारी के माध्यम से संघ की जिला इकाई द्वारा ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा तथा आगे की रूपरेखा तय की जाएगी।

उन्होंने कहा कि एनएचएम कार्मिकों स्थानांतरण को लेकर विभागीय अधिकारी उपमुख्यमंत्री को भ्रमित कर रहे हैं कि केंद्र सरकार द्वारा इस पर रोक लगायी गयी है। उन्होंने कहा कि 17 जून को संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि मण्डल द्वारा उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात कर मुख्य रूप से स्थानातरण का लाभ देकर देकर सभी उनके गृह जनपद तैनाती का मुद्दा उठाया गया था साथ ही वेतन विसंगति दूर करते हुए मध्य प्रदेश की भांति नियमित कार्मिकों के मूल वेतन को संविदा का प्रारंभिक वेतन दिए जाने पर बात रखी गई थी। उन्होंने बताया कि स्थानांतरण के लिए उपमुख्यमंत्री को विभाग द्वारा गलत जानकारी दी गई थी कि भारत सरकार द्वारा स्थानांतरण पर रोक लगायी गयी है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में भारतीय मजदूर संघ के साथ मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात में मुख्यमंत्री द्वारा सहमति दी गई थी कि संविदा कार्मिकों को उनके गृह जनपद तैनाती दी जानी है तथा संघ के प्रतिनिधि मंडल द्वारा जानकारी दी गई की वर्ष 2019 में भारत सरकार ने स्थानांतरण नीति बनाए जाने का लिखित आदेश दिया है तथा वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश में अन्य मध्य प्रदेश 2024 में हरियाणा 2023 में किया गया है इसलिए उत्तर प्रदेश में भी किया जाना चाहिए ।

योगेश ने बताया कि इसी प्रकार वेतन विसंगति दूर किए जाने पर अवगत कराया गया कि वर्ष 2016 से भारत सरकार बजट भेज रहा है मगर अभी तक कुछ विशेष कार्यक्रम के लोगो का वेतन बढ़ाया गया है बाकी सामूहिक रूप से वेतन नीति निर्धारित कर मध्य प्रदेश एवं हरियाणा, बिहार की भांति वेतन विसंगति दूर नही किया गया।जिस पर उपमुख्यमंत्री ने विषय को संज्ञान में लिया।

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