‘प्रार्थनाओं’ को साकार कर लोगों को संतान की खुशी देना ही बना लिया लक्ष्‍य

लखनऊ में पहली टेस्‍ट ट्यूब बेबी प्रार्थना का जन्‍म कराने वाली डॉ गीता खन्‍ना से वर्ल्‍ड आईवीएफ डे पर विशेष बातचीत

डॉ गीता खन्‍ना

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। मां एक ऐसा शब्‍द जो कानों में उस खुशी को घोल देता है जो अनमोल है,  यह वह अहसास है, जो बयां नहीं किया जा सकता, सिर्फ महसूस किया जा सकता है। किन्‍हीं कारणों से मां का दर्जा न पाने वाली महिलाओं के इस सपनों को साकार करना ही अपना लक्ष्‍य बना लिया है डॉ गीता खन्‍ना ने। इन विट्रो फर्टीलाइज़ेशन यानी आईवीएफ तकनीक से लखनऊ में पहला टेस्‍ट ट्यूब बेबी का जन्‍म कराने की उपलब्धि भी डॉ गीता खन्‍ना के नाम है।

वर्ल्‍ड आईवीएफ डे के मौके पर ‘सेहत टाइम्‍स’ ने डॉ गीता खन्‍ना से विशेष बातचीत की। सफलता के जिस मुकाम पर डॉ गीता आज खड़ी हैं, वह उनकी वर्षों की तपस्‍या का परिणाम है। कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से डॉक्‍टरी में मास्‍टर डिग्री हासिल करने वाली डॉ गीता खन्‍ना शुरू से मेधावी रहीं, उन्‍होंने एमबीबीएस में 10 गोल्‍ड मेडल और ऑब्‍स एंड गाइनी से पीजी में टॉप कर यह अहसास दिला दिया था कि उनमें प्रतिभा का भंडार है। डॉ गीता बताती हैं कि आईवीएफ तकनीक के क्षेत्र में कार्य करके इनोवेटिव वर्क करते हुए आईवीएफ प्रणाली के जरिये इलाज कर निराश महिलाओं को सुख देने का खयाल उनकी डॉक्‍टरी की पढ़ाई के दौरान एमबीबीएस थर्ड इयर में ही आ गया था। जब दुनिया की पहली टेस्‍ट ट्यूब बेबी का जन्‍म हुआ। इसके बाद 1996 में धुन सवार हुई कि आईवीएफ क्षेत्र में कुछ नया करना है, लेकिन सोचने और करने के बीच की दूरी तय करने के लिए मैंने प्रयास करने शुरू किये। इसके प्रशिक्षण के लिए मैं सबसे पहले नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर गयी, उसके बाद क्‍लीवलैंड, सिडनी, अमेरिका, इंग्‍लैंड के साथ ही भारत में बेंगलूर गयी। सभी सीएमई अटेन्‍ड करती थी। फि‍र 1998 में वह दिन भी आया जब मुझे मेरी तपस्‍या का पहला इनाम ‘प्रार्थना’ का सफलतापूर्वक जन्‍म कराकर मिला।

ज्ञात हो विश्व में पहली बार इस आईवीएफ तकनीक का प्रयोग मैनचेस्‍टर, यूनाइटेड किंगडम में पैट्रिक स्टेपो और रॉबर्ट एडवर्डस ने किया था। उनकी इस प्रक्रिया को सफलता मिली और इस प्रक्रिया से 25 जुलाई, 1978 की रात्रि जब घड़ी की सुइयां 11 बजकर 47 मिनट दिखा रही थीं, तभी दुनिया के पहले टेस्‍ट ट्यूब बेबी लुईस ब्राउन का जन्‍म हुआ। अगर भारत की बात करें तो इस प्रक्रिया का इस्‍तेमाल पहली बार डॉ सुभाष मुखोपाध्‍याय ने किया था, और बात अगर लखनऊ की करें तो इस प्रक्रिया का इस्‍तेमाल कर पहली बच्‍ची ‘प्रार्थना’ को जन्‍म दिलाने वाली चिकित्‍सक डॉ गीता खन्‍ना का नाम आता है।

डॉ गीता खन्‍ना बताती हैं कि अब प्रार्थना 21 वर्ष की हो चुकी है, लेकिन उसे आज भी जब देखती हूं तो मुझे इस क्षेत्र में और ज्‍यादा कार्य करने, निराश दम्‍पतियों के चेहरे पर खुशी लाने की प्रेरणा मिलती है। मैं ईश्‍वर का बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं कि उन्‍होंने मुझ पर अपना आशीर्वाद बनाये रखा है। आईवीएफ तकनीक निस्संतान दंपति‍यों के लिए एक बड़ी आशा की किरण है।