एलपीजी, सौर ऊर्जा, बिजली के उपकरण ही बेहतर : डॉ. राजेंद्र प्रसाद

लखनऊ. भारत में बीड़ी-सिगरेट के साथ-साथ खाना बनाने में लकड़ी और कंडे का प्रयोग अब भी एक बड़ी समस्या है. जबकि अन्य तरीके से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या तो है ही. इन सभी चीजों के चलते जो वायु प्रदूषण होता है उससे सांस की बीमारी क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डीजीस (सीओपीडी) होती है. इस बीमारी के चलते हर साल 5 लाख मरीजों की मृत्यु होती है. भारत की बात करें तो इस समय लगभग डेढ़ करोड़ मरीज सीओपीडी से ग्रस्त हैं.
विश्व सीओपीडी दिवस पर एरा मेडिकल कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी देते हुए पल्मोनरी रोग विशेषग्य पूर्व निदेशक वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टीटयूट दिल्ली डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि लगभग 40 करोड़ व्यक्ति विश्व भर में सीओपीडी से पीड़ित हैं. सीओपीडी का प्रचलन दर 0.2 प्रतिशत से 37 प्रतिशत है. उन्होंने बताया कि सीओपीडी एक आम सांस की बीमारी है जिससे बचाव संभव है. फेफड़े के अन्दर हवा का प्रवाह बाधित होता है फेफड़े की संरचना की गड़बड़ी के कारण जो कि दूषित हवा और विभिन्न प्रकार के गैसेज सांस द्वारा फेफड़े में पहुँचने से यह रोग होता है.
उन्होंने बताया कि सिगरेट और बीड़ी दोनों ही बराबर खतरनाक हैं. डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि सीओपीडी एक नॉन कम्युनिकेबल डिजीज है और महिलाओं की तुलना में पुरूषों में ज्यादा पाया जाता है. उन्होंने कहा कि शुरू में सीओपीडी को पहचाना नहीं जाता क्योंकि इसके लक्षणों का बढ़ती आयु के साथ होने वाले बदलाव समझा जाता है। सीओपीडी का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान, बायोमास फ्यूल का प्रयोग एवं वायु प्रदूषण हैं। भारत वर्ष में सिगरेट एवं बीड़ी का प्रचलन आम है और बीड़ी का उपयोग जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा करता है. अनुसंधानों से ज्ञात हुआ है कि बीड़ी सिगरेट जैसा ही खतरनाक है। विश्वभर में 3 अरब व्यक्ति बायोमास फ्यूल के सम्पर्क में हैं, एवं भारत मे 75 प्रतिशत से ज्यादा घरों में अभी भी लकड़ी कोयला एवं कन्डे का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए होता है. यह एक बड़ी समस्या है।
प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने जोर देकर कहा कि सीओपीडी की रोकथाम संभव है, परन्तु इसके लिए कड़े प्रयास करने होंगे. सिगरेट एवं बीड़ी के प्रयोग को रोकना होगा और लकड़ी कन्डे एवं कोयले के स्थान पर एलपीजी और बिजली के प्रयोग पर जोर देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि घर-घर खाना पकाने के लिये एलपीजी को उज्ज्वला जैसी योजना की पूरे देश में जरूरत है. इस अवसर पर 100 से ज्यादा मरीज एवं उनके तीमारदार उपस्थित रहे. इसके अलावा डॉ. आनन्द वर्मा, डॉ. अभिषेक अग्रवाल, डॉ. सौरभ करमाकर, डॉ. अनामिका वर्मा एवं पीजी छात्र भी मौजूद रहे.

Sehat Times | सेहत टाइम्स Health news and updates | Sehat Times