केजीएमयू में शुरू हुआ उत्तर प्रदेश का पहला प्लाज्मा बैंक

– स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने किया उद्घाटन
-कुलपति ने कहा, दूसरे अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों को भी प्लाज्मा देने की योजना

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में बड़ी भूमिका निभा रहे प्लाज्मा के बैंक की शुरुआत आज उत्तर प्रदेश में भी हो गई।
कोरोना से स्वतंत्रता दिलाने के लिए ठीक हो चुके कोरोना मरीजों द्वारा दान किए गए प्लाज्मा के उत्तर प्रदेश के पहले बैंक की शुरुआत किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में हुई। प्लाज्मा बैंक का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं केजीएमयू के कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने ऑनलाइन किया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी कारगर है। प्लाज्मा डोनेशन के लिए संक्रमण मुक्त हो चुके नागरिकों को प्रेरित करें जिससे प्लाज्मा की कमी ना रहे।
कुलाधिपति ने भारत के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयास से कोरोनावायरस से होने वाली मौतों की संख्या भारत में काफी कम है। इलाज के लिए सुविधाओं में विस्तार हो रहा है प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी से इलाज शुरू किया जा चुका है तथा आने वाले समय में लोग स्वप्रेरणा से प्लाज्मा देने आगे आ सकें, इसके लिए भ्रांतियां दूर कर उन्हें प्लाज्मा डोनेशन के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके लिए चिकित्सा सेवाओं में संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना रोगियों को स्वस्थ करने में केजीएमयू के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अच्छा कार्य किया गया है। इसे बरकरार रखना होगा
इस कार्यक्रम में केजीएमयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी ने उत्तर प्रदेश के प्रथम प्लाज्मा बैंक का शुभारंभ केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा किए जाने को गर्व और गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में कोरोनावायरस से बचाव के लिए विभिन्न दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है लेकिन कोई भी यह सटीक दावा नहीं करता है कि यह दवाएं कोरोनावायरस पर कितनी असरदार हैं, लेकिन ऐसा देखा गया है कि प्लाज्मा थेरेपी से कोरोनावायरस से ग्रस्त रोगियों की हालत में सुधार होता है और इसी गंभीरता को देखते हुए कुलाधिपति ने इस प्लाज्मा बैंक को गंभीरता से लिया और यह कार्य केजीएमयू में संभव हो पाया।
कुलपति ने कहा कि इस प्लाज्मा बैंक में  दान कर्ताओं द्वारा दान किए गए प्लाज्मा को स्टोर करने, इसके नमूने को एकत्रित करने के साथ ही इसे अन्य सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों को दिए जाने की सुविधा उपलब्ध होगी।
इस मौके पर ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ तूलिका चंद्रा ने बताया कि प्लाज्माफेरेसिस की प्रक्रिया पूर्णतया सुरक्षित एवं हानिरहित है। इस प्रक्रिया में दानकर्ता का ब्लड प्लाज्माफेरेसिस मशीन में डाला जाता है तथा केवल वही ब्लड प्रयोग में लाया जाता है जिसमें कोरोना संक्रमण से लड़ने की एंटीबॉडी होती है एक आम इंसान में सामान्यतः 5 से 6 लीटर रक्त होता है जबकि इस प्रक्रिया के लिए सिर्फ 400 से 500 मिलीलीटर लिया जाता है तथा रक्त का अवशेष प्लाज्माफेरेसिस मशीन द्वारा शुद्ध करके उनके शरीर में पहुंचा दिया जाता है। इस मौके पर प्रति कुलपति प्रोफ़ेसर जी पी सिंह, कुलसचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर एसएन संखवार सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।