हैदराबाद से आये होम्यो विशेषज्ञ ने डिप्रेशन पर अध्ययन प्रस्तुत किया
होम्योपैथिक साइंस कांग्रेस सोसाइटी ने आयोजित की राष्ट्रीय संगोष्ठी
लखनऊ। राजकीय जेएसपीएस होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद के पूर्व प्राचार्य प्रो एस प्रवीन कुमार ने डिप्रेशन के होम्योपैथिक प्रबंधन विषयक शोध पत्र में बताया कि देश में लगभग पांच करोड़ लोग डिप्रेशन का शिकार हैं जबकि देश में मात्र छह हजार मानसिक विशेषज्ञ ही उपलब्ध हैं। आपाधापी, बहुत कुछ प्राप्त करने की इच्छा, कम समय में उन्नति करने की आकांक्षा पूरी न होने के कारण लोग अवसाद का शिकार हो रहे हैं, इसलिए लोगों को अपने जीवन को थोड़ा सा सुधारने की आवश्यकता है।
यहां गोमती नगर स्थित एक होटल में होम्योपैथिक साइंस कांग्रेस सोसाइटी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रो प्रवीन कुमार ने कहा कि होम्योपैथी में मानसिक लक्षणों के आधार पर उपचार होता है। इसलिए हर होम्योपैथी चिकित्सक मानसिक रोग विशेषज्ञ है। उन्होंने होम्योपैथिक द्वारा उपचारित 100 अवसाद रोगियों का साक्ष्य सहित अध्ययन प्रस्तुत किया।
राजकीय डॉक्टर एसी होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज भुवनेश्वर के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर एलके नंदा ने बताया कि सभी प्रकार के ट्यूमर होम्योपैथिक औषधियों द्वारा ठीक किये जा सकते हैं। परन्तु इसके लिए सटीक औषधि का चयन किया जाना आवश्यक है। इसके लिए सही केस टेकिंग करना आवश्यक है। उन्होंने अनेक उपचारित रोगियों का विवरण प्रस्तुत किया।
प्रयागराज के साईनाथ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी के प्रोफेसर डॉ एसएम सिंह ने बताया कि वृद्धावस्था के रोगों जैसे प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना, वृद्धावस्था में स्मरण शक्ति का लोप तथा पेशाब संबंधी रोग होम्योपैथी से ठीक हो सकते हैं। उन्होंने जीवी सिन्ड्रोम, सोरायसिस एवं चर्म रोगों की होम्योपैथिक द्वारा की गयी सफल चिकित्सा का प्रमाण सहित विवरण प्रस्तुत किया।
इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने कहा कि चिकित्सक देवता का रूप होता है, उन्हें पूरी निष्ठा के साथ रोगी को स्वस्थ करना चाहिये। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि सफाई के अभाव में बीमारियां घर कर लेती हैं, इसलिए चिकित्सकों को रोगियों को उपचार के साथ-साथ उन्हें सफाई की सलाह भी देनी चाहिये।
समारोह के विशिष्ट अतिथि एमके भावनगर विश्व विद्यालय गुजरात के कुलपति प्रोफेसर डॉ गिरीश पटेल ने कहा कि होम्योपैथी जनस्वास्थ्य के विकल्प के रूप में स्थापित होने की ओर अग्रसर है। उत्तर प्रदेश के होम्योपैथिक निदेशक डॉ वीके विमल ने कहा कि राज्य सरकार होम्योपैथी के विकास के लिए प्रयासरत है। आयोजन सचिव डॉ अनुरुद्ध वर्मा ने कहा कि 80 प्रतिशत रोगो का उपचार होम्योपैथिक द्वारा संभव है। होम्योपैथी की लोकप्रियता को देखते हुए सरकार को अधिक से अधिक चिकित्सालय स्थापित करने चाहिये। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी महंगी ऐलोपैथिक दवाओं का कम खर्चीला विकल्प है और ऐलोपैथी के महंगे इलाज के कारण 50 लाख लोग हर वर्ष गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे पूर्व निदेशक होम्योपैथी उत्तर प्रदेश प्रो बीएन सिंह ने कहा कि छात्रों को मन लगाकर शिक्षा प्राप्त कर पूरे मनोयोग से जनता की सेवा करनी चाहिये। उद्घाटन सत्र को राजकीय लाल बहादुर शास्त्री होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ आनन्द चतुर्वेदी, राजकीय नेशनल होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ हेमलता, डॉ वीवी सिंह नवाब, डॉ पंकज श्रीवास्तव, डॉ आशीष वर्मा आदि ने सम्बोधित किया।
