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कर्मचारियों का आरोप- कर्मचारी हित सरकार के एजेंडे में नहीं, संवादहीनता कर रही

-मांगों को लेकर जन‍प्रतिनिधियों को ज्ञापन देने का क्रम जारी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के आवाहन पर कर्मचारियों की समस्यायों के समाधान हेतु जनप्रतिनिधियों के आवास पर ज्ञापन देकर ध्यानाकर्षण आन्दोलन के अन्तर्गत पूरे प्रदेश के कर्मचारियों द्वारा अपने अपने क्षेत्र व शहर तथा इकाइयों में प्रदेश सरकार के मंत्रीगणो/विधायकों तथा विधानपरिषद सदस्य गणों को ज्ञापन प्रेषित करने का क्रम जारी है।

इस क्रम में आज लखनऊ में कर्मचारियों शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश सरकार के मंत्री,जल शक्ति विभाग, डा.महेन्द्र सिंह के लखनऊ आवास पर तथा मंत्री  सहकारिता विभाग उत्तर प्रदेश सरकार मुकुटबिहारी वर्मा के आवास पर जाकर ज्ञापन प्रेषित किया गया।

उक्त आशय की जानकारी देते हुए मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष वी पी मिश्रा, महासचिव शशि मिश्रा ने बताया कि सरकार कर्मचारियों के साथ संवादहीनता कर रही है, कर्मचारी हित सरकार के एजेंडे में नहीं है । निजीकरण की विचारधारा जनहित के प्रतिकूल है, जिला चिकित्सालयों महिला चिकित्सालयों को मेडिकल कॉलेज बनाने के नाम पर  निजीकरण किया जा रहा है, जो कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, मोर्चा इसका भरपूर विरोध कर रहा है ।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय मे कर्मचारियों में निराशा व्याप्त है।  ठेकेदारी प्रथा, संविदा की स्पष्ट नीति नहीं है, पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण रोकने सहित विभिन्न कर्मचारी समस्याओं पर ध्यानाकर्षण के लिए यह कार्यक्रम 30 सितम्बर तक प्रदेश के सभी जनपदों में चलेगा।

प्रमुख उपाध्यक्ष एवं फार्मेसिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि आज कर्मचारियों की मांग है कि पुरानी पेंशन योजना बहाल हो,  ठेकेदारी, संविदा समाप्त हो, वेतन व अन्य सुविधाएं केंद्र के समान दी जाएं, ठेकेदारों के माध्यम से रखे गए कर्मचारियों का शोषण ख़त्म करते हुए उनका भविष्य सुरक्षित किया जाए।

परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश मिश्रा ने निगम कर्मचारियों की मांग उठाते हुए कहा कि फायदे वाले निगमो के कर्मचारियों के भी वित्तीय मामले लंबित हैं। ज्ञापन कार्यक्रम में परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत, संगठन प्रमुख के के सचान, जिला अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव  आदि शामिल थे।

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