‘मुख्यमंत्री जी, क्षमता से ज्यादा काम कर रहे हैं हम चिकित्सक, जायज मांगें पूरी कर दीजिये’

प्रांतीय चिकित्‍सा सेवा संघ का प्रतिनिधिमंडल ने की सीएम से मुलाकात, 35 फीसदी नॉन प्रैक्टिसिंग भतता के साथ ही योग्‍य चिकित्‍सकों को मेडिकल कॉलेज में शिक्षण कार्य के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजने सहित कई मांगों को रखा, मुख्‍यमंत्री ने दिया आश्‍वासन  

लखनऊ। प्रान्‍तीय चिकित्‍सा सेवा संघ ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से मिलकर सातवें वेतन आयोग के अनुसार 35 फीसदी नॉन प्रैक्टिसिंग भत्‍ता के साथ ही आवश्‍यक योग्‍यता रखने वाले चिकित्‍सकों को मेडिकल कॉलेज में शिक्षण कार्य के लिए प्रतिनि‍युक्ति पर जाने का प्रावधान सहित अन्‍य मांगों पर विचार करने की अपील की है। इन मांगों को लेकर संघ का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को गुख्‍यमंत्री से मिला तथा अपनी मांगों पर चर्चा की। संघ का कहना है कि मुख्‍यमंत्री ने उनकी बात गंभीरतापूर्वक सुनकर इस पर विचार करने का आश्‍वासन दिया है।

 

यह जानकारी देते हुए संघ के महामंत्री डॉ अमित सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि संघ के अध्यक्ष डा0 अशोक यादव के नेतृत्व में मुख्‍यमंत्री से भेंट की और संवर्ग और सेवाओं में सुधार हेतु एक ज्ञापन सौपकर राज्य में चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ करने के लिये व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की। डॉ अशोक यादव ने मुख्‍यमंत्री से चर्चा में कहा कि भारत सरकार के चिकित्‍सकों की अपेक्षा हम लोग विषम परिस्थितियों में कई गुना ज्यादा कार्य दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

 

डॉ अमित सिंह ने रेखांकित किया कि राजकीय चिकित्सा सेवाओं में विशेषज्ञों की भारी कमी है और ब्‍लॉक स्तर तक विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये संघ द्वारा सुझाये गये सी0पी0एस0 डिप्लोमा पाठ्यक्रम को अविलम्ब आरम्भ किया जाना चाहिये।

 

डॉ सिंह ने कहा कि जिन बिन्‍दुओं पर चर्चा हुई उनमें महाराष्ट्र राज्य की तरह उ0प्र0 के चिकित्सकों को भी नान प्रैक्टिस भत्ता मूल वेतन का 35 प्रतिशत दिया जाना, विशेषज्ञ चिकित्सकों को उत्‍तराखण्ड राज्य की भांति मूल वेतन का  20, 30, 40 प्रतिशत, विशेषज्ञता भत्ता दिया जाना, ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों के लिये ग्रामीण भत्ता दिया जाना शामिल है।

 

उन्‍होंने बताया कि इसके अतिरि‍क्‍त प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिये देश के अन्य राज्यों की तरह राजकीय चिकित्सालयों में विशेषज्ञ की उपाधि प्रदान करने के लिये डीएनबी पाठ्यक्रम आरम्भ करने के लिए प्राथमिकता पर कार्यवाही किया जाना।   अधिवर्षता आयु बढ़ाने में विकल्प चुनने का प्राविधान बहाल किया जाना।. पात्र चिकित्सकों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की सुविधा बहाल किया जाना, दंत संवर्ग को भी पीएमएस संवर्ग की तरह विशिष्ट एसीपी का लाभ व अन्य भत्ते दिया जाना तथा अधिवर्षता आयु 60 वर्ष से 62 वर्ष विकल्प के साथ किया जाने पर चर्चा की गयी।

 

डॉ सिंह ने बताया कि लखनऊ में स्थित निशातगंज में उपलब्ध विभागीय भूखण्ड पर मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में शिलान्यास कर प्रेक्षागृह एवं अतिथि गृह का निर्माण प्रारम्भ किया जाने की मांग शामिल है। इसी प्रकार    संवर्ग में लगभग डेढ़ हजार ऐसे विशेषज्ञ चिकित्साधिकारी मौजूद हैं, जो चिकित्सा शिक्षक की अर्हता यथा एम0डी0/एम0एस/एम0डी0एस0/डी0एम0/एम0सी0एच0 रखते हैं तथा चिकित्सा शिक्षक के रूप में नियुक्त किये जाने के लिए वांछित शिक्षण अनुभव भी रखते हैं। उनसे विकल्प मांगते हुये और प्रतिनियुक्ति की स्पष्ट एवं पारदर्शी सेवा शर्तें निर्धारित करते हुये सुस्पष्ट नीति बनाकर राजकीय मेडिकल कालेजों में रिक्त पदों पर प्रतिनियुक्ति किये जाने पर विचार किया जाना राज्य हित में होगा।

 

उन्‍होंने बताया कि इसी प्रकार जिला स्तरीय एवं ब्‍लॉक स्तरीय चिकित्सालयों में विभिन्न उपक्रमों (एन0एच0एम0, सिफ्सा एवं यू0पी0एच0एस0एस0पी0) द्वारा संविदा पर चिकित्सकों की तैनाती की अपेक्षा केवल लोक-सेवा आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा या महानिदेशालय द्वारा तदर्थ नियुक्त की निर्धारित प्रक्रिया के तहत, संवर्ग में एक समान सेवा शर्तो के साथ चिकित्सकों की तैनाती किया जाना औचित्पूर्ण और व्यवस्थापरक होगा।

 

चिकित्‍सकों का यह भी कहना था कि राज्य में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के मेडिकल, पैरामेडिकल कार्मिकों तथा अन्य कार्मिकों के भारी संख्या में रिक्त पड़े पदों पर स्थाई नियुक्ति की जानी चाहिये। जन स्वास्थ्य के मानकों के अनुरूप सेवाओं को सम्वेदनशील उत्तरदायी और गुणवत्तपरक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि सेवाओं के कुल पदों में से अधिकतम 5 प्रतिशत पदों पर ही संविदा या काम चलाऊ व्यवस्था के कार्मिकों की सेवायें ली जानी चाहिये। चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी और गुणवत्तापरक प्रदायन के लिये यह अनिवार्य शर्त हैं कि, सभी संवर्गों के कार्मिको के पद स्थाई रूप से भरे जाने चाहिये।

 

चिकित्‍सकों का कहना था कि  हमारे संघ का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के ढांचे का व्यावहारिक और सृदृढ़ तकनीकी आधार पर सशक्तीकरण किया जाना चाहिये और पीपीपी मोड की परिकल्पना को शुद्ध निजी आधार पर किन्ही निश्चित सीमित क्षेत्रों में पायलेट प्रौजेक्ट के रूप में पहले परखकर देखा जाना चाहिये। शिष्ट मण्डल में प्रान्तीय अध्यक्ष डा0 अशोक कुमार यादव, महासचिव डा0 अमित सिंह  के साथ ही उपाध्यक्ष (मुख्यालय) डा0 आशुतोष कुमार दूबे तथा उपाध्यक्ष डॉ विकासेन्दु अग्रवाल भी मौजूद रहे।