मोबाइल सैनिटाइज जरूर कीजिये, लेकिन सामान्‍य सैनिटाइजर से नहीं…

-देर तक अल्‍कोहल के सम्‍पर्क में रहने से खराब हो सकती है स्‍क्रीन

-कोविड-19 की प्रशिक्षण कार्यशाला में दिये गये अनेक उपयोगी टिप्‍स

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। मोबाइल फोन, घड़ी जैसे इलेक्‍ट्रॉनिक वस्‍तुओं को विसंक्रमित करने के लिए साधारण तौर पर चलने वाले सैनिटाइजर का प्रयोग नहीं करना चाहिये, इसके लिए आईसोप्रोपिल अल्‍कोहल (Isopropyl alcohol) का प्रयोग करना चाहिये, क्‍योंकि सामान्‍य तौर पर प्रयोग करने वाले सैनिटाइजर में जो अल्‍कोहल होता है वह जल्‍दी उड़ नहीं पाता है, उसका असर देर तक बना रहता है, साथ ही उसमें अन्‍य केमिकल भी होते हैं, ऐसी स्थिति में खासतौर से अगर मोबाइल फोन में स्‍क्रीन गार्ड नहीं लगा है, तो यह स्‍क्रीन को, उसके टच सिस्‍टम को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आईसोप्रोपिल अल्‍कोहल नहीं है तो आप कपड़े में किसी भी औषधियुक्‍त साबुन को लगाकर उससे मोबाइल साफ कर लें तथा बाद में सूखे कपड़े से उसे पोंछ लें।

यह जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल साइंसेज के अधिष्‍ठाता डॉ विनोद जैन ने दी। उन्‍होंने बताया कि केजीएमयू एवं  आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में केजीएमयू के ब्राउन हॉल आरोग मित्र कोविड-19 प्रशिक्षण की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला का देश-विदेश के 12000 लोगों ने सजीव प्रसारण देखा।

इसका यूट्यूब पर सजीव प्रसारण किया गया था। इसका आयोजन केजीएमयू के इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल साइंसेज के अधिष्‍ठाता डॉ विनोद जैन ने कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट के संरक्षण एवं आईटी सेल के सहयोग से किया। इस मौके पर आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ बीएन सिंह ने कहा कि भारत वर्ष का यह पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसमें साढ़े तीन घंटे की अवधि में कोरोना संक्रमण से संबंधित समस्त जानकारी सुरुचिपूर्ण तरीके से दी गई।

इस कार्यक्रम में अध्यक्ष आरोग्य भारती अवध प्रांत एवं कुलपति केजीएमयू प्रो एमएलबी भट्ट ने अपने संबोधन में कहा कि लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने पर बल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि‍ संयमित जीवनशैली एवं भोजन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण की समस्त जानकारी एवं परीक्षा से संबंधित वीडियो आदि विश्वविद्यालय की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध है जिसका कभी भी और कहीं से भी प्रयोग कर जानकारी प्राप्‍त की जा सकती है।

इस अवसर पर कुलपति द्वारा का कोविड-19 से बचाव के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए हाथ की स्वच्छता, मास्क का सही प्रकार से उपयोग करना, सामाजिक दूरी का अनुपालन करना, अनावश्यक रूप से मुंह, नाक एवं आंख को न छूना इत्यादि के बारे में विशेष बल दिया।

डॉ विनोद जैन

डॉ विनोद जैन ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान जनसामान्य के लिए उपयोगी समस्‍त जानकारियों के वीडियो, व्याख्यान एवं प्रयोगात्मक तरीके विश्वविद्यालय की अधिकृतइ वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। उन्‍होंने बताया कि एक chikitsasetu ऐप भी बनाया गया है जो किसी भी एंडरॉयड फोन पर डाउनलोड किया जा सकता है, जिसमें प्रशिक्षण से संबंधित समस्त वीडियो उपलब्ध हैं। इसके साथ ही कोविड-19 के प्रशिक्षण की अभूतपूर्व लोकप्रियता को देखते हुए उन्होंने निकट भविष्य में भी इस प्रकार का जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करने की बात कही। इस दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद, 30 से 40 मिनट व्‍यायाम, 15 से 30 मिनट प्राणायाम तथा संतुलित भोजन जैसे वि‍टामिन बी एवं सी युक्त भोजन, वि‍टामिन डी के लिए धूप का नियमित सेवन तथा गुनगुने पानी का नियमित सेवन, सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्देशित भोजन में लहसुन, अदरक, जीरा, हल्दी, धनिया, दालचीनी और काली मिर्च का प्रयोग तथा गले की खराश के लिए लौंग का सेवन इत्यादि की जानकारी दी।

इस कार्यक्रम में आरोग्‍य भारती के राष्‍ट्रीय संगठन मंत्री डॉ अशोक वार्ष्‍णेय ने टेली कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिये प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का समापन आरोग्‍य भारती अवध प्रांत के सचिव डॉ अभय नारायण तिवारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राघवेन्‍द शर्मा, वीनू दुबे, मंजरी शुक्‍ला के साथ ही संचालिका शालिनी गुप्‍ता की महत्‍वपूर्ण भूमिका रही।