पत्रकार हत्‍याकांड में डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत रामरहीम को उम्रकैद

बलात्‍कार कांड में सजा पूरी होने के बाद 70 साल की आयु में शुरू होगी उम्रकैद  

पंचकूला सीबीआई अदालत ने  डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है, उसके साथ ही उनके तीन सहयोगियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस तरह करीब 17 साल बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के परिवार को इंसाफ मिला। अदालत ने गुरमीत राम रहीम पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। खास बात यह भी है कि अदालत ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि उम्रकैद की सजा बलात्कार में मिली सजा(20 वर्ष) के बाद शुरू होगी। इसका अर्थ यह हुआ कि जिस समय बलात्कार मामले में सजा समाप्त होगी उस समय राम रहीम की उम्र करीब 70 साल होगी।

 

सीबीआई ने राम रहीम को फांसी देने की मांग की थी। राम रहीम व उसके तीन करीबी सहयोगियों को पहले ही दोषी करार दिया जा चुका था। 2002 के इस मामले में इस मामले में राम रहीम के अलावा तीन अन्य दोषियों निर्मल सिंह और कृष्ण लाल और जगदीप सिंह को भी सजा सुनाई गई थी। आपको बता दें कि 51 वर्षीय राम रहीम अपनी दो अनुयायियों के बलात्कार के जुर्म में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल की सजा काट रहा है।

 

पंचकूला, सिरसा और हरियाणा के अन्य हिस्सों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सिरसा में डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय है। पंचकूला अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हरियाणा पुलिस ने अदालत जाने वाले मार्गों पर अवरोधक लगा दिए हैं। राज्य सरकार ने मंगलवार को एक याचिका दायर कर कहा था कि डेरा प्रमुख की आवाजाही के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है।

 

2002 में पत्रकार छत्रपति के समाचार पत्र ‘पूरा सच’ ने एक पत्र प्रकाशित किया था जिसमें यह बताया गया था कि डेरा मुख्यालय में राम रहीम किस प्रकार महिलाओं का यौन उत्पीड़न कर रहे हैं। इसके बाद छत्रपति को अक्टूबर 2002 में गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के कारण पत्रकार की बाद में मौत हो गई थी। सजा के ऐलान को देखते हुए पंचकूला में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

 

आरोप लगा था कि गोली डेरा अनुयायियों ने मारी गोली मार दी थी। 2002 के इस मामले में गुरमीत राम रहीम को मुख्य षड़यंत्रकर्ता नामित किया गया है। 2003 में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले को 2006 में सीबीआई को सौंप दिया गया था। जुलाई 2007 को सीबीआई ने चार्जशीट पेश की और साल 2014 में सबूतों पर कोर्ट में बहस शुरू हुई, फिर ऐसा करते-करते यह केस इस अंजाम तक पहुंचा है।